सूरजपुर।। खबरी गुल्लक।। 9 जून 2026
जिले में किसानों को गुणवत्तायुक्त खाद, बीज एवं कीटनाशक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा सहकारी समितियों एवं निजी विक्रय केन्द्रों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। कलेक्टर सूरजपुर के निर्देशन एवं उप संचालक कृषि के मार्गदर्शन में जिलेभर में उर्वरकों के भण्डारण एवं वितरण व्यवस्था की सतत निगरानी की जा रही है।
इसी क्रम में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सूरजपुर श्रीमती शिवानी जायसवाल एवं उर्वरक निरीक्षक अशोक सोनवानी, कृषि विकास अधिकारी द्वारा डबल लॉक विश्रामपुर एवं सूरजपुर, समिति जयनगर, समिति कन्दरई तथा निजी उर्वरक विक्रय केन्द्र मेसर्स महानंद राय अग्रवाल का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान मेसर्स महानंद राय अग्रवाल द्वारा अभिलेखों के संधारण, बिल बुक एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित संस्था को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
वहीं विकासखंड प्रतापपुर में उर्वरक निरीक्षक श्री शिवशंकर यादव द्वारा विभिन्न उर्वरक विक्रय केन्द्रों का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान तायल ट्रेडर्स, गर्ग ट्रेडिंग कम्पनी, रामबिलास कृषि सेवा केन्द्र, श्याम ट्रेडर्स, किसान सेवा केन्द्र एवं कृषि रक्षा केन्द्र प्रतापपुर में उर्वरक गुण नियंत्रण आदेश 1985 के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन पाए जाने पर सभी संबंधित विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कृषि विभाग के अनुसार अब तक जिले के 95 उर्वरक विक्रय केन्द्रों का निरीक्षण किया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान 8 विक्रय केन्द्रों के लाइसेंस 21 दिनों के लिए निलंबित किए गए हैं तथा विक्रय प्रतिबंध लगाकर कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए हैं।
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि शासन द्वारा निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर खाद की बिक्री, कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा अन्य अनियमितताओं पर जिला एवं विकासखंड स्तरीय निगरानी दल द्वारा सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने किसानों से अपील की है कि यदि कहीं खाद-बीज की अधिक कीमत वसूली जा रही हो या किसी प्रकार की अनियमितता दिखाई दे तो इसकी सूचना तत्काल निकटस्थ कृषि विभाग कार्यालय को दें।
विभाग ने कहा है कि किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तायुक्त बीज एवं उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण अभियान लगातार जारी रहेगा तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कड़ी प्रशासनिक, कानूनी एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।




