ADD

ब्रेकिंग: शिक्षा विभाग की लापरवाही से शिक्षकों का भविष्य लगा दांव पर ... अंतरिम वरिष्ठता सूची से नाम गायब , प्रधान पाठकों में मचा हड़कंप.. शिक्षक संगठन सड़क पर उतरने की तैयारी में...

0


अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक ।।

 कार्यालय संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा द्वारा प्रधान पाठक प्राथमिक शाला, उच्च श्रेणी शिक्षक टी.ई. संवर्ग की अंतरिम वरिष्ठता सूची जारी की गई है। यह सूची 1 अप्रैल 2025 की स्थिति पर आधारित है, लेकिन जारी होते ही शिक्षा विभाग में भूचाल आ गया। अधिकांश प्रधान पाठकों का नाम इस सूची में शामिल नहीं है, खासकर 14 अक्टूबर 2022 के बाद पदोन्नत हुए एक भी शिक्षक का नाम दर्ज नहीं किया गया। इससे जिला शिक्षा अधिकारियों की घोर लापरवाही और  भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगे हैं।

इस सूची के अवलोकन के साथ ही शिक्षक संगठनों में रोष फैल गया है। सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के जिला प्रवक्ता  प्रभाकर मुखर्जी ने आरोप लगाया कि बलरामपुर  जिले में 14 अक्टूबर 2022 को पदोन्नति प्राप्त प्रधान पाठकों की सर्विस बुक और जीपीएस पासबुक अभी तक संधारित नहीं की गई। संगठन ने बार-बार अनुरोध किया, जिस पर सभी विकासखंडों में कार्य प्रारंभ हुआ। लेकिन इसमें भी लापरवाही बरती गई, बवाल मचने पर यह प्रक्रिया ठंडे बस्ते में डाल दी गई। नतीजा यह कि जिला शिक्षा कार्यालय ने  प्रधान पाठकों के विवरण संयुक्त संचालक कार्यालय को अग्रेषित ही नहीं किए, इसलिए वरिष्ठता सूची से उनका नाम गायब हो गया।

यह मामला केवल तकनीकी चूक नहीं लगता। प्रभाकर मुखर्जी ने आगे कहा कि जब अनैतिक रूप से पैसा वसूली का सिलसिला बंद हुआ, तब अधिकारियों का ध्यान इस ओर पूरी तरह हट गया। पदोन्नति और सर्विस बुक संधारण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में जानबूझकर देरी की गई। इससे शिक्षकों का भविष्य अधर में लटक गया है। फेडरेशन के अनुसार, सरगुजा संभाग में ऐसे सैकड़ों मामले लंबित हैं, जहां पदोन्नति के बाद भी टी/ई संवर्ग में समायोजन नहीं हो पाया। इससे प्रभावित शिक्षकों को वेतनमान, प्रमोशन और पेंशन जैसे लाभों से वंचित होना पड़ रहा है।

शिक्षकों का आरोप है कि बलरामपुर जिले में यह समस्या पुरानी हो चुकी है। यहां पदोन्नति हो या युक्तियुक्तिकरण, शिक्षा विभाग की लापरवाही  आम बात बन गई है। पूर्व में युक्तियुक्तिकरण प्रक्रिया में रिक्त पदों को छिपाया गया और प्रभावशाली शिक्षकों को बचाने के लिए हेरफेर किया गया। इसकी पोल खुलेगी तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।  अब सवाल यह है कि इस वरिष्ठता सूची विवाद पर क्या होगा? क्या दोषी अधिकारियों पर विभागीय जांच बैठेगी, या शिक्षकों का शोषण यूं ही जारी रहेगा?

शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, राज्य स्तर पर भी ऐसी शिकायतें बढ़ रही हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में शिक्षक भर्ती और पदोन्नति नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अमल न होने से विभाग की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। प्रभावित शिक्षक अब संगठनों के माध्यम से उच्च अधिकारियों तक अपनी आवाज पहुंचाने की तैयारी में हैं। प्रदर्शन और धरना-प्रदर्शन की चेतावनी भी दी जा रही है। यदि शीघ्र सुधार नहीं हुए, तो यह विवाद पूरे संभाग में फैल सकता है।

शिक्षकों का कहना है कि ऐसी लापरवाही से न केवल उनका मनोबल गिरता है, बल्कि प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। बच्चों का भविष्य दांव पर लगे हुए हैं, जबकि अधिकारी कुर्सी की गर्मी में सुस्ताते रहें। अब देखना यह है कि समाचार प्रकाशन के बाद क्या विभाग जागेगा या मामला फिर दब जाएगा।


एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें (0)