गड़बड़झाला : निजी आनलाइन सेंटरों ने छात्रों से शुल्क ले थमाई फर्जी रसीद... पीजी कॉलेज के प्रोफेसरों ने बगैर सत्यता जांचे दे दिया दाखिला .... छात्रवृत्ति के लिए फार्म भरते समय खुला राज .... आजाद सेवा संघ ने की कार्रवाई की मांग ....
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जनवरी 18, 2024
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अंबिकापुर। संभाग के सबसे बड़े पीजी कॉलेज अंबिकापुर में आनलाइन प्रवेश के दौरान कतिपय निजी आनलाइन सेंटरों के द्वारा छात्रों से राशि लेकर फर्जी रसीद थमा महाविद्यालय प्रबंधन के साथ लाखों की धोखाधड़ी का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में सबसे आश्चर्य जनक तथ्य यह भी है कि कालेज की कमेटी के द्वारा इन फर्जी रसीदों की बगैर सत्यता जांचे छात्रों को प्रवेश दे दिया गया। इस मामले में यह धोखाधड़ी उजागर होने के बाद आजाद सेवा संघ के प्रदेश सचिव रचित मिश्रा, छात्र मोर्चा के जिला अध्यक्ष प्रतीक गुप्ता ने प्राचार्य व अपर संचालक डॉ. एसएस अग्रवाल को ज्ञापन सौंप कार्यवाई की मांग की है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि यूजी एवं पीजी के छात्रों का प्रवेश नवम्बर माह में ऑनलाइन माध्यम से हो रहा था। बहुत से छात्र स्वयं से फॉर्म भरने एवं शुल्क भुगतान किए, तो वहीं कई छात्रों ने चॉइस सेंटर से फॉर्म भरवाने के साथ शुल्क का भुगतान किया और फार्म की हार्ड कॉपी महाविद्यालय के विभागों में जमा किए। आरोप लगाया गया कि महाविद्यालय के समीप संचित ऑनलाइन सेंटर द्वारा बहुत से छात्रों के साथ धोखाधड़ी किया गया। ऑनलाइन सेंटर द्वारा छात्रों के प्रवेश फार्म भरने के पश्चात उनसे पैसे लेने के बाद महाविद्यालय के खाते में मात्र 1रुपए का भुगतान कर अथवा प्रवेश शुल्क से बहुत कम रुपयों का भुगतान कर छात्रों को फर्जी रसीद दिया गया। जब हार्ड कॉपी महाविद्यालय में छात्रों द्वारा जमा किया गया तो महाविद्यालय के किसी भी विभाग द्वारा इसका पुनः जांच नहीं किया गया एवं प्रवेश स्वीकार लिया गया। छात्रों और कालेज के साथ हुई धोखाधड़ी का मामला दिसंबर माह में सामने आया था जब छात्रों द्वारा छात्रवृत्ति का फॉर्म भरने के पश्चात महाविद्यालय में महाविद्यालय की रसीद के साथ जमा किया जा रहा था। जहां बहुत से छात्रों का यह शिकायत सामने आया की उन्होंने पूरा पैसा दिया था उसके बाद भी महाविद्यालय में उनका मात्र एक रुपए या उनका फॉर्म भरने के बाद पैसा ही नहीं जमा किया गया है। सभी छात्र निजी ऑनलाइन सेंटर से ही फार्म भरवाए थे। छात्रों द्वारा आवेदन के माध्यम से इसकी सूचना महाविद्यालय के प्राचार्य को दी गयी। मांग की गई कि ऐसे छात्र हैं जिनका पूरी तरह शुल्क भुगतान नहीं किया गया उनका जांचकर लिस्ट निकाला जाए। इस मांग पर महाविद्यालय द्वारा छात्रों का लिस्ट जारी किया गया जिसमें 70 से 75 छात्र थे, जो आधी-अधूरी लिस्ट थी। लिस्ट से बाहर के ऐसे छात्र थे जिनका पैसा भुगतान नहीं हुआ था। ऑनलाइन सेंटर द्वारा सभी मामले को स्वीकारते हुए छात्रों का पुनः भुगतान किया गया। जिसके बाद यह सामने आया की न्यूनतम डेढ़ लाख रूपयों का गबन किया गया था। इसकी सूक्ष्मता से जांच हो तो बड़ी गड़बड़ी सामने आ सकती है। प्राचार्य ने कहा है कि जल्द से जल्द इसपर जांच व कार्रवाई होगी।




