अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक।।
सरगुजा संभाग मुख्यालय से लगे ग्राम लालमाटी में मंगलवार की दोपहर उस समय अफरातफरी मच गई जब जंगली हाथियों का एक झुंड अचानक उग्र हो गया। ग्रामीणों के लापरवाह रवैये और पटाखे फोड़कर उन्हें भड़काने की करतूत ने एक युवक की जान ले ली। भोपाल निवासी 28 वर्षीय राजकुमार नायक काम करने अंबिकापुर आया था। घटना के वक्त पास जाकर फोटो खींचने की कोशिश कर रहा था। तभी एक दांतेल हाथी ने उस पर हमला कर दिया और उसे कुचल डाला। मौके पर वन विभाग का अमला मौजूद था, मगर उनकी निष्क्रियता ने पूरे मामले को और भी दर्दनाक बना दिया।
ग्राम खैरबार, बधियाचूआं में तबाही मचाने के बाद एनएच पार कर सुबह से ही ग्राम लालमाटी के पास के जंगलों में करीब 20 से 25 हाथियों का दल विचरण कर रहा था। इसकी सूचना ग्रामीणों ने वन विभाग को दी थी, जिसके बाद कुछ कर्मचारी वहाँ तैनात किए गए। लेकिन भारी भीड़ को नियंत्रित करने या लोगों को हाथियों से दूर रखने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए। इसके विपरीत, ग्रामीणों में से कुछ लोग हाथियों के करीब जाकर मोबाइल से वीडियो बना रहे थे, तो कुछ लोग पटाखे फोड़कर उकसा रहे थे। स्थिति तब भयावह हो गई जब तेज आवाज वाले पटाखे को हाथियों के पास फेंका गया। अचानक से शोर और धमाके से एक दांतेल हाथी बुरी तरह भड़क गया। भीड़ में भगदड़ मच गई, लेकिन राजकुमार नायक फोटो लेने की कोशिश में थोड़ी दूर तक वहीं खड़ा रहा। तभी उग्र हाथी ने उस पर धावा बोल दिया और कुछ ही क्षणों में उसे कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। घटनास्थल पर मौजूद लोग भय से चीख उठे। वन विभाग के कर्मचारी भी कुछ नहीं कर पाए और हाथियों के झुंड को शांत करने के नाम पर भागदौड़ करते रह गए। ग्रामीणों के अनुसार अगर वन विभाग शुरू से ही सख्ती दिखाता और लोगों को हाथियों से दूरी बनाए रखने की चेतावनी देता, तो यह हादसा नहीं होता।
प्रशासन की तैयारियों पर उठे सवाल
हादसे के बाद स्थानीय नागरिकों ने वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि विभाग हर साल गज प्रबंधन के नाम पर बड़ी राशि खर्च करता है, लेकिन इसके बावजूद हाथियों की निगरानी के लिए कोई आधुनिक व्यवस्था नहीं की गई है। विभाग के पास अब तक ड्रोन कैमरा तक नहीं है, जबकि कई बार ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। इस दल में हाथियों की सटीक संख्या का भी कोई आधिकारिक रेकॉर्ड नहीं है। कोई अधिकारी कहता है दल में 25 हाथी हैं, तो कोई 19 बताता है। इस अपुष्ट जानकारी से गज प्रबंधन योजनाओं की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब हाथियों की सही संख्या और उनकी गतिविधियों पर निगरानी नहीं होगी, तो यह जानना असंभव होगा कि कौन सा हाथी आक्रामक है और किसे ट्रेंकुलाइज करने की जरूरत है।
केवल हो रही औपचारिकता
एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि क्षेत्र में हाथियों के लगातार बढ़ते आवागमन से स्थिति काफी जटिल हो गई है। कभी वे बस्तियों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, तो कभी मानव पर हमला कर देते हैं। लेकिन इस दिशा में कोई स्थायी समाधान निकालने की बजाय विभाग केवल घटनाओं के बाद औपचारिक कार्रवाई कर खुद को जिम्मेदारी से मुक्त कर लेता है।
ग्रामीणों की लापरवाही भी बनी जानलेवा
विभाग के साथ ग्रामीणों की असावधानी भी इस घटना का बड़ा कारण बनी। हाथियों को देखने और उनके साथ छेड़छाड़ करने में ग्रामीणों ने कोई हिचक नहीं दिखाई। कई युवाओं ने सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो डालने के उद्देश्य से हाथियों के पास जाकर उन्हें उकसाया। यह तमाशा अंततः एक जीवन की कीमत पर खत्म हुआ। इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने अब खेत-खलिहानों और जंगल के मार्गों पर मुनादी कराई है कि हाथियों के विचरण क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति न जाए।
हाथी मानव संघर्ष होता रहेगा
लालमाटी की यह घटना चेतावनी है कि जंगली जानवरों के प्रति अज्ञानता और प्रशासनिक लापरवाही, दोनों मिलकर कितनी बड़ी त्रासदी जन्म दे सकते हैं। एक तरफ हाथियों का प्राकृतिक व्यवहार था, तो दूसरी ओर मानव की जिज्ञासा और असंवेदनशीलता। नतीजा यह कि एक युवा की जिंदगी खत्म हो गई और प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया कि आखिर कब तक गज-मानव संघर्ष यूँ ही बेकाबू रहेगा।



