भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने लगाया आरोप - संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय अंबिकापुर में अधिकारी भ्रष्टाचार में कंठ तक डूबे... अध्यादेशों, शासनादेशों का उल्लंघन कर विवि को बना लिया कमाई का जरिया .... उच्च शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को ज्ञापन सौंप कार्यवाई की मांग....

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 अंबिकापुर। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा अंबिकापुर में  भ्रष्टाचार, अध्यादेशों के उल्लंघन का आरोप लगा भाजपा के वरिष्ठ पार्षद आलोक दुबे ने उच्च शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को ज्ञापन सौंपकर इसमें लिप्त कर्मचारियों एवं अधिकारियों पर सख्त कार्यवाई की मांग की  है।  ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि  आदिवासी बाहुल्य सरगुजा क्षेत्र में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के उददेश्य से स्थापित संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा  वर्तमान समय में भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया है. भ्रष्टाचार में लिप्त इस विवि के कर्मचारी तथा अधिकारी विश्वविद्यालय से बाहर के लोगों से सांठ-गांठ करके शासनादेशों, अध्यादेशो तथा नियमों का सीधे-सीधे उल्लंघन कर रहे हैं. जिससे विश्वविद्यालय का विकास बाधित हो गया है। आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन   कुलसचिव  ने अपने आर्थिक लाभ के लिए विश्वविद्यालय के सभी विभागों में अपने पसंद के कर्मचारियों को पदस्थ कर विश्वविद्यालय से बाहर के लोगों से साठ- गांठ कर अपना भष्टाचार का पूरा नेटवर्क स्थापित कर रखा है. तत्कालीन कुलसचिव तथा  कार्य परिषद सदस्य इंजीनियर  ने मिलकर नियम विरुद्ध तरीके से कार्य परिषद को धोखे में रखकर विश्वविद्यालय के परिनियम व अध्यादेश का उल्लंघन करते हुए कई भ्रष्टाचार किये तथा लाखों रुपये का घोटाला किया है। आलोक दुबे ने आरोप लगाया कि  दीक्षांत समारोह में समस्त सामग्रियों की खरीदी तथा टैंट पंडाल व वाहनों के किराये में लाखों रुपये की अनियमितताएं की गई। भोपाल की संस्था  को कई वर्षों से परीक्षा व गोपनीय कार्य का ठेका देकर प्रति वर्ष करोड़ों का भुगतान किया जा रहा है जबकि इस संस्था के कार्य मानक अनुसार नहीं है। भकुरा में निर्माणाधीन विश्वविद्यालय भवन के लिए  कार्य परिषद सदस्य इंजीनियर  को प्रति माह 50,000 मानदेय पर सलाहकार नियुक्त कर दिया गया, हालांकि  बाद में कुलपति के हस्तक्षेप पर इसे रोक दिया गया। 

दस लाख का स्मार्ट क्लास बोर्ड 40 लाख में खरीदा

भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने आरोप लगाया है कि यूटीडी में खराब एवं गुणवत्ता विहीन 7 स्मार्ट क्लास बोर्ड की 50 लाख रुपये में खरीदी की गई जबकि बढ़िया से बढ़िया स्मार्ट क्लास बोर्ड 1 से 1.5 लाख रुपये में बाजार में उपलब्ध हैं. इस प्रकार  सात स्मार्ट क्लास बोर्ड 10 लाख रुपये तक में आ सकते थे, जबकि इसके लिए 40 लाख रुपयों का भुगतान किया गया।  विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में 50 लाख रुपये से अधिक के डुप्लीकेट तथा अनुपयोगी पुस्तको का क्रय किया गया। 

बगैर टेंडर वाहन ले रहे किराए पर 

आलोक दुबे ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय के लिए किराये पर लिए जाने वाले वाहन भी उन्हीं लोगों से लिया जाता है जो मोटा कमीशन देते हैं, वाहनों को किराये पर लेने के लिए निविदा (टेंडर) भी नहीं आमंत्रित किया गया। आलोक दुबे ने आरोप लगाया कि नियम विरुद्ध तरीके से कुलसचिव द्वारा अपने उपयोग के लिए विश्वविद्यालय वाहन का लगातार निजी कार्यों में उपयोग किया जा रहा है, कुलसचिव ने वाहन के साथ साथ दो वाहन चालक भी अपने साथ रखा है जबकि विश्वविद्यालय नियमों के अनुसार कुलसचिव को वाहन और वाहन चालक की पात्रता ही नहीं है.

दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों से करवा रहे घरेलू काम

 आलोक दुबे ने आरोप लगाया है कि नियम विरुद्ध तरीके से  अपने आवास पर विश्वविद्यालय की तीन महिला दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को अपने घरेलू काम के लिए रखा है, जबकि विश्वविद्यालय नियमों के अनुसार कुलसचिव को इसकी पात्रता नहीं है.

गोपनीय चरित्रावली गायब कर 5 साल से प्रोन्नति लटकाया

आलोक दुबे ने आरोप लगाया है कि जानबूझकर UTD के सभी शिक्षकों का वार्षिक गोपनीय चरित्रावती गायब तथा नष्ट कर दिया और उनका समय पर प्रोन्नति बाधित कर दिया, UGC के मानदंड अनुसार वर्ष 2019 तक UTD के सभी शिक्षकों की प्रोन्नति हो जानी थी जो कि अब लंबित है,

 एलएलएम में गलत पुनर्मूल्यांकन कर बढ़ाया अंक

भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने आरोप लगाया है कि  विश्वविद्यालय कार्य परिषद सदस्य इंजीनियर  के दबाव में आकर सीबीसीएस अंतर्गत संचालित एलएलएम पाठ्यक्रम में तमअंसनंजपवद का प्रावधान न होने के बाद भी परीक्षा परिणाम घोषित हो जाने के बाद कार्य परिषद को गुमराह कर एलएलएम चतुर्थ सेमेस्टर के कुछ छात्रों का पुनर्मूल्यांकन कराया तथा अपने चहेते परीक्षक से उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराया जिसे निर्देश दिया कि सभी छात्रों को 40 से अधिक अंक दिए जाएँ और इस प्रकार से फेल हुए छात्रों को 45 से 50 अंक दिलाये गए, जबकि प्रथम मूल्यांकन करने वाले परीक्षक का दावा है कि छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का मानक पुस्तकों से मिलान कराकर देख लिया जाये जिन छात्रों को पुनर्मूल्यांकन  में इतने अधिक अंक दिए गए वह गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि एलएलएम चतुर्थ सेमेस्टर में फेल हुए छात्रों से   कार्य परिषद सदस्य इंजीनियर  के दबाव में आकर पुनर्मूल्यांकन का फॉर्म भी नहीं भराया फिर भी उनकी  उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराया। आरोप लगाया गया कि जातिगत व क्षेत्रगत विद्वेष से ग्रषित होकर   कार्य परिषद सदस्य इंजीनियर  के दबाव में आकर एलएलएम चतुर्थ सेमेस्टर के परीक्षक का नाम सार्वजनिक किया जो कि नियमविरुद्ध है । यह परीक्षक के जीवन तथा संपत्ति को खतरे में डालने वाला है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भंडार विभाग द्वारा किये जाने वाले समस्त खरीदी (अलमारी, कंप्यूटर, प्रिंटर, डेस्क-बैच, कुर्सी-मेज, स्टेशनरी इत्यादि) में भी दस्तावेजों को अपने अनुरूप निर्मित करा  सांठ-गांठ वाले फर्मों को सामग्री प्रदान करने के लिए आदेश दिया,  तथा उनसे कमीशन प्राप्त किया। इन सभी आरोपों के संबंध में कुल सचिव से अनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, मगर मोबाइल रिसीव नहीं किए जाने से उनका पक्ष नही लिया जा सका। 


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