खबरी गुल्लक। संभाग मुख्यालय अंबिकापुर के कार्मेल कान्वेंट स्कूल की कक्षा छठवीं की छात्रा अर्चिता सिन्हा के द्वारा सुसाइड किए जाने के मामले में कथित तौर पर छात्रा को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का आरोप लगने पर कान्वेंट स्कूल की नियमित शिक्षिका सिस्टर मर्सी उर्फ एलिाबेथ जोस के द्वारा आरोप पत्र निरस्त करने प्रस्तुत याचिका को खारिज करते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कहा है कि अनुशासन और शिक्षा के नाम पर स्कूल में बच्चे के साथ शारीरिक हिंसा करना क्रूरता की श्रेणी में आता है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप पत्र और प्राथमिकी को रद्द करने का कोई आधार नहीं पाया और याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर, याचिका में दिए गए दावे कि याचिकाकर्ता के खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे हैं, को बीएनएसएस की धारा 528 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते समय नहीं देखा जा सकता है और याचिकाकर्ता के वकील द्वारा पेश फैसले को वर्तमान मामले से अलग किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि इसके मद्देनजर, इस न्यायालय को याचिकाकर्ता, अभियुक्त के खिलाफ लगाए गए आरोप पत्र के साथ एफआईआर को रद्द करने का कोई आधार नहीं मिला, क्योंकि मामले (30.08) को ट्रायल कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप तय करने के लिए तय किया गया है। अंबिकापुर के कार्मेल कान्वेंट स्कूल की शिक्षिका सिस्टर मर्सी उर्फ एलिाबेथ जोस के खिलाफ मणिपुर थाने में शिकायत दर्ज। दर्ज कराई गई थी। जिसमें शिक्षिका पर छात्रा को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगा था। शिक्षिका ने आरोप को झूठा बताते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप पत्र निरस्त करने का अनुरोध किया था। एक प्रतिष्ठित अखबार के 4 अगस्त के अंक में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के हवाले छपे खबर के मुताबिक इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि सरकार का यह दायित्व है कि वह बच्चे को सभी प्रकार की शारीरिक या मानसिक हिंसा, चोट, दुर्व्यवहार, यातना, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार, यौन शोषण से सुरक्षित करने विधायी, प्रशासनिक, सामाजिक और शैक्षिक उपाय करे। विदित हो कि कक्षा छठवीं की छात्रा द्वारा आत्महत्या किए जाने के बाद समूचे अंबिकापुर शहर में शोक और रोष का माहौल था। अभिभावको के द्वारा कार्मेल स्कूल के समक्ष कई दिनों तक प्रदर्शन कर कार्यवाई की मांग की जा रही थी। जिससे चलते स्कूल में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात करने के साथ छुट्टी की स्थिति भी निर्मित हो गई थी। स्कूल प्रबंध ने तनाव की स्थिति दूर नहीं होने तक स्कूल का संचालन करने में असमर्थता जताई थी। हालांकि संबंधित शिक्षिका के खिलाफ fir दर्ज होने के बाद स्थिति सामान्य होने पर स्कूल में कक्षा का संचालन पुनः शुरू हो सका था। अभिभावको ने आरोप लगाया था कि स्कूल में प्रताड़ना की वजह से यह घटना हुई।



