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शर्मनाक: मटर तोड़ने पर दो मासूम बच्चों को तालिबानी’ सजा..! हाथ-पैर बाँधकर बेरहमी से पीटा ... बलरामपुर जिले में हुई घटना

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अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक।। 6 जनवरी 2026।। 

बलरामपुर ज़िले के राजपुर थाना क्षेत्र में दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। खेत से मटर तोड़ने के आरोप में दो मासूम बच्चों को ऐसी अमानवीय सजा दी गई, जिसे देखकर हर संवेदनशील दिल कांप उठे। ग्राम लडुवा में दो छोटे बच्चों के हाथ-पैर रस्सी से कसकर बाँध दिए गए और उनके असहाय शरीर पर बेरहमी से लाठियाँ बरसाई गईं।  आरोप है कि बच्चों को न केवल बुरी तरह पीटा गया, बल्कि इस पूरी घटना का वीडियो भी बनाया गया, मानो यह किसी सजा का तमाशा हो। वीडियो में मासूमों की चीखें, उनकी आँखों में बसे डर और बेबसी साफ दिखती है। छोटी-सी गलती के लिए बच्चों के साथ ऐसा बर्ताव कर मानो इंसानियत को ही कठघरे में खड़ा कर दिया गया हो। पीड़ित बच्चों के पिता ने हिम्मत जुटाकर राजपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गाँव के ही कुछ लोगों ने बच्चों को मटर तोड़ते देख गुस्से में आकर पहले उन्हें पकड़ा, फिर हाथ-पैर बाँधकर बुरी तरह पिटाई की और उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी की। पिता का कहना है कि उनके बच्चे अभी इतने छोटे हैं कि ठीक से अपनी बात भी नहीं रख पाते, लेकिन उनके चेहरे का डर सब कुछ बयां कर रहा है। मामला सामने आने के बाद गाँव में भी हलचल मच गई है। कुछ लोग इस घटना को गलत बताकर कड़ी निंदा कर रहे हैं, तो कुछ चुप्पी साधे हुए हैं। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटी सी बात पर बच्चों के साथ इतनी नृशंस हरकत करना न सिर्फ क़ानून के ख़िलाफ़ है, बल्कि मानवता के भी ख़िलाफ़ है।  सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है और दोषियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। अगर वीडियो में दिख रहे लोगों की पुष्टि हो जाती है, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होने की बात कही जा रही है। पुलिस का कहना है कि किसी भी हालत में बच्चों के साथ इस तरह का अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ग्राम लडुवा की यह घटना एक बड़े सवाल को जन्म देती है: क्या बच्चों की छोटी गलती का जवाब इतनी हिंसा और अपमान से दिया जा सकता है? स्कूल जाने और खेलने-कूदने की उम्र में जब बच्चों के हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए, तब उनके हाथ-पैर रस्सियों से बाँधे जा रहे हैं। यह दृश्य समाज के उस कठोर चेहरे को सामने लाता है, जहाँ अनुशासन के नाम पर ज़ुल्म और सज़ा के नाम पर क्रूरता को बढ़ावा मिल रहा है।

इस घटना ने न सिर्फ दो मासूमों के बचपन पर गहरी चोट की है, बल्कि पूरे समाज की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस जघन्य कृत्य के दोषियों को क्या सज़ा देता है और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। इस घटना को लेकर परिजनों में रोष है। 



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