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आत्मसर्पित 120 नक्सलियों ने देखी विधानसभा की कार्रवाई.. इतिहास के पन्ने में दर्ज हुआ स्वर्णिम पल..

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रायपुर।। खबरी गुल्लक।। 

छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जब माओवादी वैचारिक युद्ध की राह छोड़कर संविधान और लोकतंत्र की मुख्यधारा में लौटे 120 पुनर्वासित पूर्व नक्सलियों ने विधानसभा की कार्यवाही को करीब से देखा और संवलियों की कार्यप्रणाली को समझा। इस 120 सदस्यीय समूह में 66 पुरुष और 54 महिलाएं हैं, जिसमें एक सीसीएम सदस्य, पांच दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य, सात डिविजनल कमेटी सदस्य, 33 एरिया कमेटी सदस्य तथा 74 पार्टी सदस्य शामिल हैं। 

पूर्व नक्सलियों से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी का जय जोहार के साथ स्वागत किया और कहा कि जिन्होंने पुनर्वास का निर्णय लिया है, उन सभी को राज्य सरकार हृदय से अभिनंदित करती है। साय ने स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया कि सरकार पुनर्वासित युवाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता के प्रति विशेष ध्यान रखेगी।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने पुनर्वासित युवाओं को गन तंत्र से गणतंत्र की मुख्यधारा में लौटने के लिए बधाई दी और कहा कि संविधान का मार्ग ही शांति, विकास और समृद्धि का रास्ता है। वित्तमंत्री ओपी चौधरी, वनमंत्री केदार कश्यप, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष व विधायक किरण सिंह देव तथा अन्य मंत्रियों ने भी पूर्व नक्सलियों से मुलाकात की और उन्हें आश्वस्त किया कि राज्य शासन उनके साथ दृढ़ता से खड़ा है। 

 विधानसभा में भारत माता की जय का नारा  

पूर्व नक्सलियों ने विधानसभा की कार्यवाही के बीच मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों के साथ “भारत माता की जय” के नारे लगाए, जिससे वातावरण भावुक हो उठा। विधानसभा अध्यक्ष धर्मजीत सिंह ने सभा की आसन्नी पर उनका स्वागत करते हुए कहा कि यह घटना दुर्लभ और ऐतिहासिक है, जब इतने उच्च स्तर के पुनर्वासित माओवादी संविधान के दायरे में लौटकर लोकतंत्र की कार्यप्रणाली को सीखने आए हैं। 

 रात्रि भोज और लोकतंत्र की प्रेरणा  

पूर्व नक्सली दल गुरुवार को रायपुर पहुंचे थे, जहां उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के सरकारी निवास पर उन्होंने रात्रि भोज किया और सरकार के साथ खुले एवं सहज संवाद में भाग लिया। पूर्व नक्सलियों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि अब वे संविधान और कानून के साथ रहकर समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएंगे और अन्य लोगों को भी मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करेंगे। 



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