अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक।। 10 मार्च 2026।।
शहर के श्रीराम हॉस्पिटल गली स्थित श्री अपार्टमेंट में निवास कर रहे वरिष्ठ नागरिक श्री असीम कृष्ण डे का आज 10 मार्च 2026 को 78 वर्ष की आयु में देहांत हो गया। वे एसईसीएल विश्रामपुर से सेवानिवृत्त हुए थे, जिन्होंने अपने जीवनकाल में कर्तव्यनिष्ठा से कार्य किया। इस दुखद घटना में हिंदू धर्म की एक अनन्य परंपरा ने सभी को रुला दिया। इकलौती पुत्री बोनी डे ने पिता के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि देकर पुत्र धर्म का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।
हिंदू शास्त्रों में अंतिम संस्कार की यह पवित्र परंपरा अंत्येष्टि क्रिया का अभिन्न अंग है। गरुड़ पुराण और मनुस्मृति के अनुसार पुत्र को पिता की आत्मा को मुक्ति दिलाने का दायित्व सौंपा गया है। मुखाग्नि देकर पुत्र पितृऋण चुकाता है, जिससे आत्मा पितृलोक को प्रस्थान कर पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो। लेकिन जब पुत्र न हो, तब पुत्री यह धर्म निभा सकती है। बोनी डे ने ठीक यही किया। पिता के पार्थिव शरीर को अग्नि देते हुए उनकी आंखों से अविरल अश्रुधारा बह रही थी। वह दृश्य देख मौजूद हर व्यक्ति ,परिवारजन, पड़ोसी, मित्र सभी की आंखें नम हो गईं। यह क्षण न केवल पारिवारिक बंधन की मर्मस्पर्शी कहानी था, बल्कि हिंदू संस्कृति की लचीलापन और समावेशिता का प्रतीक भी।
बोनी डे स्वयं एक प्रेरणास्रोत हैं। वे अश्वमेघ कॉलेज की प्राचार्य रह चुकी हैं और वर्तमान में ब्रह्म रोड स्थित प्रसिद्ध पंचामृतम बेकरी की मैनेजर हैं। शिक्षा और व्यवसाय के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों के बावजूद, उन्होंने पिता के प्रति कर्तव्य को सर्वोपरि रखा। स्व. असीम कृष्ण डे उनके प्रेरणास्त्रोत थे। वे अपने पीछे पत्नी श्रीमती अनीता डे और इकलौती पुत्री बोनी डे को शोकाकुल छोड़ गए।
यह घटना हमें हिंदू परंपराओं की गहनता याद दिलाती है। जहां पुत्री मुखाग्नि देकर पुत्र का कर्तव्य निभा सकती है, वहीं यह बेटी- बाप के अटूट प्रेम को भी उजागर करती है। सामाजिक परिवर्तन के दौर में बोनी डे जैसी बेटियां सिद्ध करती हैं कि कर्तव्य लिंग या रिश्ते की सीमा से परे है।



