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प्रतापपुर मुख्यालय से लगे खेत में मिला नर हाथी का शव, करंट से हुई मौत, इलाके में मचा हड़कंप, करंजवार के आमा पारा की घटना, लंबे समय से हाथी-मानव द्वंद से जूझ रहा क्षेत्र

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 सूरजपुर।। खबरी गुल्लक।। भूपेंद्र राजवाड़े।।

प्रतापपुर वन विभाग की घोर लापरवाही से प्रतापपुर नगर पंचायत क्षेत्र एवं वन कार्यालय से महज 2 किलोमीटर दूर प्रतापपुर अंबिकापुर मार्ग के कर्णजवार जंगल में हाथी का 100 मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है।   हाथी-मानव द्वंद के बीच  एक नई घटना सामने आई है।ग्राम करंजवार के आमा पारा में एक नर दातेल हाथी का शव गेहूं के खेत में पाया गया, जिसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने सुबह खेत की ओर जाते समय हाथी को मृत अवस्था में देखा, जिसके बाद इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दी गई।

मिली जानकारी के अनुसार यह नर हाथी पिछले कुछ दिनों से प्रतापपुर क्षेत्र में घूम रहा था। ग्रामीणों के मुताबिक हाथी आसपास के जंगलों और खेतों में लगातार विचरण कर रहा था, जिससे लोगों में पहले से ही डर का माहौल बना हुआ था। आज शुक्रवार सुबह जब ग्रामीण खेत की ओर पहुंचे तो उन्होंने गेहूं के खेत में हाथी को मृत पड़ा देखा।

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और पूरे क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक तौर पर हाथी की मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है। विभागीय अधिकारी पोस्टमार्टम और जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होने की बात कह रहे हैं।

गौरतलब है कि प्रतापपुर क्षेत्र लंबे समय से हाथी-मानव द्वंद को लेकर संवेदनशील और विवादग्रस्त क्षेत्र रहा है। अक्सर हाथियों के झुंड या अकेले हाथी जंगल से निकलकर गांवों और खेतों की ओर पहुंच जाते हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना रहता है। कई बार फसलों को नुकसान और जनहानि की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।

इधर खेत में हाथी का शव मिलने के बाद ग्रामीणों की बड़ी संख्या मौके पर पहुंच गई। वन विभाग की टीम लोगों को दूर रहने और स्थिति सामान्य बनाए रखने की अपील कर रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार हाथी के शव का परीक्षण कर मौत के कारणों का पता लगाया जाएगा, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सबसे बड़ी बात यह है कि प्रतापपुर वन परिक्षेत्र से महज कुछ दूरी पर यह हाथी का दर्दनाक मौत हुआ है हाथी के सुर में चोट के भी निशान पाए गए हैं सवाल यह उठता है कि यह नर हाथी कई दिनों से क्षेत्र में भ्रमण कर रहा था जिसकी खबर वन विभाग को नहीं थी और अचानक से इसकी मौत हो जाने के बाद में वन विभाग सहित जिले के अधिकारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 

वन विभाग द्वारा हाथियों का सही मॉनेटरी नहीं करने की वजह से साफ लापरवाही सामने आ रही है जब प्रतापपुर वन परिक्षेत्र से लगे हुए कुछ दूरी पर यह घटना हो सकती है तो सोचिए ग्रामीण क्षेत्र में हाथियों की क्या स्थिति बनती है। हाथियों का लगातार करंट से मौत, एवं हाथी और मानव का लगातार द्वंद से साफ जाहिर है कि वन विभाग कुंभकरणीय नींद में सो रहा है। 

वन विभाग के द्वारा यह भी पता नहीं लगाया जा सकता है कि हाथी किस जगह पर है या कितने संख्या में है जब ग्रामीण इनको बताते हैं तब यह अपना कोरम पूरा करने के लिए मौके पर पहुंच कर फोटो खींच कर चले जाते हैं। सवाल यह उठता है कि वन विभाग की निष्क्रियता से हाथियों की मौत हो रही है इसके बाद भी वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों पर कार्यवाही नहीं होने से हौसले बुलंद है। 

वन विभाग के रेंजर सहित कर्मचारियों पर हाथियों से हो रही मौत एवं हाथी की मौत का जिम्मेदारी जिले के अधिकारी तय नहीं कर पा रहे हैं कई बार शिकायत के बाद भी कार्यवाही नहीं होना ना लापरवाह लोगों का ट्रांसफर होना साफ यह जाहिर करता है कि वन विभाग के लापरवाही का नतीजा वन्य जीव को झेलना पड़ रहा है। जिसका जिम्मेदार और कोई नहीं वन विभाग के रेंजर और बीट गार्ड है। जांच के नाम से हमेशा लीपा पोती कर मामला को शांत एवं ठंडे बस्ती में कर दिया जाता है।

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