ADD

ब्रेकिंग: स्वास्थ्य विभाग में संलग्नीकरण हटाने शासन के फैसले पर छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वा. कर्मचारी संघ ने उठाया सवाल.. कहा - पहले रिक्त पद भरें फिर अटैच कर्मियों की वापसी हो वरना स्वास्थ्य सुविधा होगी बदहाल..

0


अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक।।

छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वा. कर्मचारी संघ ने सरगुजा संभाग के संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाओं को पत्र लिखकर संलग्न कर्मचारियों के संलग्नीकरण समाप्ति के आदेश पर आपत्ति दर्ज की है। पत्र में कहा गया है कि संभाग की स्वास्थ्य संस्थाओं में 35-40 प्रतिशत पद रिक्त हैं, ऐसे में सभी संलग्नीकरण हटाने से सेवाएं ठप हो सकती हैं।

 16 मार्च 2026 को जारी आदेश के अनुसार समस्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) व सिविल सर्जनों को निर्देश दिए गए हैं कि संभाग के सभी संलग्न कर्मचारियों व अधिकारियों को तत्काल कार्यमुक्त कर मूल पदस्थापना पर भेजें। अधोहस्ताक्षरित अधिकारियों को प्रमाण पत्र भी प्रेषित करने के आदेश हैं।

संघ ने तर्क दिया है कि जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा व आवश्यकता पर किए संलग्नीकरण से सेवाएं सुचारू चल रही हैं। सभी को हटाने से आम जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं में परेशानी होगी, जिसकी जिम्मेदारी विभाग पर आएगी।

 रिक्त पदों की समस्या

सरगुजा संभाग में शासन-अनुमोदित पदों का 35-40 प्रतिशत चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टाफ रिक्त है। हालिया भर्ती अभियान में सीएमएचओ सरगुजा ने 134 संविदा पदों (जैसे 35 सीएचओ, 10 स्टाफ नर्स) की घोषणा की, लेकिन ये 31 मार्च 2026 तक ही हैं।[1] बिना भर्ती के संलग्नीकरण ही एकमात्र विकल्प है, अन्यथा ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र प्रभावित होंगे। पत्र में उल्लेख है कि कई संस्थाओं में कर्मचारी कम होने से कार्यभार बढ़ा है, जिससे मानसिक तनाव व सेवा प्रभावित हो रही है। निरीक्षणों में भी 31 कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए, जो स्टाफ की कमी दर्शाता है।

 संघ का सुझाव

संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल पांडेय ने मांग की है कि जहां स्वीकृत सेटअप से कम कर्मचारी हैं, वहां संलग्नीकरण न हटाया जाए। केवल उन संस्थाओं से हटाएं जहां अतिरिक्त स्टाफ हो या मूल पदस्थापना प्रभावित हो। संस्था प्रमुखों से उपयोगिता की जानकारी लेकर निर्णय लें।यह कदम जनहित में आवश्यक है ताकि स्वास्थ्य सेवाएं निर्बाध चलें। पत्र अनिल कुमार पाण्डेय, छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वा. कर्मचारी संघ ने हस्ताक्षरित किया।


## संभावित प्रभाव


संलग्नीकरण समाप्ति से ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टर-नर्स की कमी गहरा सकती है। सरगुजा जैसे आदिवासी बाहुल्य संभाग में यह महामारी या आपात स्थिति में घातक साबित हो सकता। भर्ती प्रक्रिया धीमी है, जबकि मरीजों की संख्या अधिक।[3][5]



एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें (0)