अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक।। 17 मार्च 2026
छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर शहर की सीमा से सटे सघन संरक्षित वन क्षेत्रों पर अवैध कब्जेदारों का राज कायम है। करीब 1500 एकड़ के इस हरे- भरे इलाके में महामाया पहाड़, खैरबार, बधियाचुवा, बाकी डेम, लालमाटी और लुचकी जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जो शहर को ऑक्सिजन का प्रमुख स्रोत हैं। नगर निगम अंबिकापुर के वरिष्ठ पार्षद आलोक दूबे ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया है कि वन विभाग के निचले अमले बीट गार्ड, वन रक्षक, फॉरेस्टर, डिप्टी रेंजर, रेंजर, एसडीओ, फॉरेस्ट भूमाफियाओं से सांठगांठ कर लाखों रुपये की अवैध वसूली कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की शिकायतें दबाई जा रही हैं और अवैध कब्जे थमने का नाम नहीं ले रहे। पत्र में बताया गया है कि जनवरी और जून 2025 में मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम ने महामाया पहाड़ तथा रनपुर खुर्द के चोरकाकछार क्षेत्र में करीब 100 अवैध मकानों को ध्वस्त किया था। लेकिन यह कार्रवाई महज दिखावा साबित हुई। उसके बाद भी कब्जे की प्रक्रिया तेज हो गई है। विशेष रूप से कक्ष संख्या 2581 और 2582 में खैरबार, बधियाचुंवा तथा बाकी डेम के संरक्षित वनों पर बेतहाशा अतिक्रमण हो रहे हैं। होली के आसपास खैरबार क्षेत्र में सागौन प्लांटेशन को बड़े पैमाने पर काटा गया, जिसकी फोटो पत्र के साथ संलग्न है। यह फोटो अवैध कब्जे के प्रयासों का जीवंत प्रमाण है। इस संबंध में संबंधित वन अधिकारी कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पाने के कारण उनका पक्ष नहीं लिया जा सका। यदि संबंधित अधिकारियों कर्मचारियों का बयान बाद में भी आता है तो खबरी गुल्लक उसे प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।
शिकायत पर नहीं होती कार्रवाई
शहर की आबोहवा के लिए खतरे की घंटी
यह अतिक्रमण अम्बिकापुर के पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है। शहर की बढ़ती आबादी के बीच ये वन फेफड़े का काम करते हैं, लेकिन शहरीकरण और लालच के चलते इन्हें खतरा हो रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से शिकायतें की जा रही हैं, मगर कोई कार्रवाई नहीं होती। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, वन रक्षक खुद कब्जेदारों से पैसे लेकर आंखें बंद कर लेते हैं। होली पर तो सैकड़ों पेड़ काटे गए, कोई रोकने वाला नहीं था।
जांच में बड़ी गड़बड़ी होगी उजागर
प्रतिलिपि में वन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य वन संरक्षक सरगुजा तथा वन मंडलाधिकारी सरगुजा को शामिल किया गया है। वन विभाग के अधिकारियों से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। यदि यह पत्र गंभीरता से लिया गया तो बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है। पर्यावरण कार्यकर्ता इसे छत्तीसगढ़ के वन संरक्षण की बड़ी चुनौती मान रहे हैं। विशेषज्ञों का मत है कि संरक्षित वनों पर कब्जे न केवल जैव विविधता को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी बाधा बनते हैं। अंबिकापुर वासी उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार वन अमला की 'मिलीभगत की दीवार' टूटेगी और हरा सोना सुरक्षित रहेगा।









