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मैनपाट में साढ़े चार करोड़ की सड़क 3 माह में उखड़ी... कुनिया- मुसाखोल मार्ग पर घटिया काम ने ग्रामीणों की उम्मीदों पर फेरा पानी..! मिट्टी पर चढ़ा दिया डामर का लेप

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अंबिकापुर/मैनपाट।।खबरी गुल्लक।। 

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मैनपाट विकासखंड में प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान के तहत बनी करोड़ों की सड़क मात्र तीन माह में ही उखड़कर बर्बाद हो गई। कुनिया ग्राम से मुसाखोल तक के 8.16 किलोमीटर लंबे इस मार्ग का निर्माण 4 करोड़ 55 लाख रुपये की भारी- भरकम लागत से किया गया था। 20 जनवरी 2025 को शुरू हुए इस प्रोजेक्ट को 19 जनवरी 2026 को पूर्ण घोषित कर बोर्ड तक लगाया गया, लेकिन आज की तारीख में सड़क की हालत ऐसी हो चुकी है मानो किसी मूसलाधार बारिश ने इसे बहा दिया हो। हल्के वाहनों की आवाजाही मात्र से ही डामर के टुकड़े उखड़ रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी निराशा और आक्रोश व्याप्त है। वर्षों पुरानी इस बहुप्रतीक्षित मांग के निर्माण में कथित धांधली ने न केवल सरकारी योजनाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि जनजातीय समुदाय के लोगों को फिर से जर्जर पथरीले रास्तों पर धकेल दिया है।

 निर्माण की शुरुआत और ग्रामीणों की आस

 मैनपाट पहाड़ी इलाके में स्थित कुनिया से मुसाखोल तक का मार्ग हमेशा से ही ग्रामीणों के लिए सिरदर्द रहा है। दुर्गम भूभाग, पथरीली चट्टानें और जर्जर रास्ते न केवल दैनिक आवागमन को कठिन बनाते थे, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और बाजार तक पहुंच को भी अवरुद्ध कर देते थे। जनजातीय बहुल इस क्षेत्र में रहने वाले लोग वर्षों से सड़क निर्माण की मांग करते आ रहे थे। शासन द्वारा प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान के तहत राशि स्वीकृत होने पर ग्रामीणों में उत्साह का संचार हुआ। सभी को लगा कि अब आधुनिक सड़क से उनकी जिंदगी में नया दौर शुरू होगा। निर्माण कार्य 20 जनवरी 2025 को धूमधाम से आरंभ हुआ। जनप्रतिनिधियो, अधिकारियों, ठेकेदारों ने वादा किया कि उच्च गुणवत्ता का काम किया जाएगा, जिसमें मजबूत बेस और टिकाऊ डामरिकरण से काम होगा। लगभग एक वर्ष के कार्यकाल के बाद 19 जनवरी 2026 को सड़क को पूर्ण कर बोर्ड लगाया गया। ग्रामीणों ने इसे विकास का प्रतीक माना और जश्न मनाया। लेकिन यह खुशी ज्यादा दिनों तक कायम न रह सकी।


सड़क उद्घाटन के महज तीन माह बाद ही इसकी पोल खुल गई। अप्रैल 2026 के अंत तक सड़क के कई हिस्सों में डामर उखड़ने लगा। हल्के वाहनों जैसे मोटरसाइकिल और छोटे ट्रैक्टरों की आवाजाही से ही सड़क टूट-फूट रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क जूते की ठोकर से भी चूर-चूर हो जाती है। कुनिया से मुसाखोल के बीच कम से कम आधा दर्जन स्थानों पर स्थिति सबसे खराब है। बारिश के मौसम से पहले ही सड़क की हालत मिट्टी के ढेर जैसी हो चुकी है। निर्माण के दौरान न तो उचित बेस तैयार किया गया, न ही ग्रेवल परत बिछाई गई। सीधे मिट्टी पर डामर का पतला लेप चढ़ा दिया गया, जिससे इसकी पकड़ ही न रह गई। नतीजा यह हुआ कि थोड़ी सी कंपन या भार सहन न कर पाने के कारण पूरा सतह फिसलने लगी। 

 धांधली और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप

ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में जमकर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि ठेकेदारों ने मापदंडों को ताक पर रखकर घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही भी सामने आ रही है। निर्माण अवधि में जिम्मेदार इंजीनियर या अधिकारी कभी साइट पर झांकने तक नहीं आए। ठेकेदार मनमाने ढंग से काम चला रहे थे, लेकिन शिकायतों पर कोई ध्यान न दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि कमीशनखोरी के चक्कर में अधिकारी आंखें बंद किए हुए थे। हमने कई बार शिकायत की, लेकिन सुनवाई न हुई।   मात्र सतही डामरिंग से 4.55 करोड़ का प्रोजेक्ट तीन माह में ही विफल हो गया। यह न केवल सरकारी धन का अपव्यय है, बल्कि जनता की उम्मीदों पर भी चोट है।

 प्रभावित ग्रामीणों की व्यथा

इस सड़क के ध्वस्त होने से मुसाखोल और कुनिया के सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए हैं। जनजातीय समुदाय के लोग मुख्यतः खेती-बाड़ी और पशुपालन पर निर्भर हैं। फसलें बाजार ले जाना, स्कूल-कॉलेज जाना या मेडिकल इमरजेंसी में अब फिर वही पुरानी मुसीबत। एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि पिछले हफ्ते मेरी बहू को प्रसव पीड़ा हुई, लेकिन सड़क की वजह से समय पर अस्पताल न पहुंच पाईं। ट्रैक्टर और जीप अब सड़क पर चल ही नहीं पाते। पैदल चलना पड़ता है, जो दुर्गम इलाके में जानलेवा साबित हो रहा है। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा परेशान हैं। विकासखंड स्तर पर यह सड़क कई गांवों को जोड़ती है, इसलिए इसका असर व्यापक है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई न हुई तो वे आंदोलन करेंगे।

उठी यह मांग

  जिला प्रशासन से ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क निर्माण की बारीकी से जांच हो, जिसमें सामग्री की क्वालिटी टेस्ट, बेस स्ट्रक्चर और व्यय का ऑडिट शामिल हो। ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही, नए सिरे से गुणवत्तापूर्ण सड़क बनवाई जाए। 

✍️ विकास .. 99268 49074

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