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मुँह खोलकर सांस लेना आदत नहीं, बीमारी का हो सकता है संकेत .. गर्मी में बच्चों में बढ़ रहे नाक की एलर्जी, जुकाम, गले के संक्रमण और एडिनॉयड के मामले - डॉ शैलेन्द्र गुप्ता

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अम्बिकापुर।।खबरी गुल्लक।।

वर्तमान गर्मी के मौसम में नाक- कान- गला विभाग की ओपीडी में बच्चों में बार-बार सर्दी-जुकाम, नाक बंद रहना, छींक आना, गले में खराश, खांसी, खर्राटे और मुँह खोलकर सांस लेने के मामले अपेक्षाकृत अधिक देखे जा रहे हैं। लगभग 50–60 मरीजों की दैनिक ENT ओपीडी में  में ऐसे 3-5 बच्चे प्रतिदिन आ रहे हैं। 

राजमाता श्रीमती देवेन्द्रकुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अम्बिकापुर के नाक-कान-गला विभाग के प्रोफेसर डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता ने बताया कि बच्चों में लगातार नाक बंद रहना केवल सामान्य जुकाम नहीं हो सकता। कई बार इसके पीछे नाक की एलर्जी, बार-बार संक्रमण, एडिनॉयड बढ़ना या कान में पानी जमना जैसी समस्या होती है। एडिनॉयड नाक के पीछे स्थित रक्षात्मक ऊतक है, जो 3–10 वर्ष की उम्र के बच्चों में बढ़ सकता है। इसके लक्षण प्रायः 4–8 वर्ष की आयु में अधिक स्पष्ट होते हैं।लंबे समय तक मुँह से सांस लेने पर चेहरे, तालू और दांतों की बनावट पर भी असर पड़ सकता है।यदि बच्चा रात में खर्राटे लेता है, मुँह खोलकर सोता है, बार-बार क्या? पूछता है, टीवी या मोबाइल की आवाज तेज करता है, पढ़ाई में ध्यान कम लगाता है या दिन में सुस्त रहता है, तो यह एडिनॉयड या कान में तरल जमा होने का संकेत हो सकता है। 

एसी का तापमान बहुत कम रखना, बच्चे को सीधे ठंडी हवा में सुलाना, गंदे कूलर-फिल्टर, कमरे की धूल, नमी, फफूंद, धूम्रपान, मच्छर कॉइल, अगरबत्ती, तेज सुगंध, जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक और स्क्रीन टाइम बढ़ना बच्चों में एलर्जी व गले की परेशानी को बढ़ा रही हैं। धूप से आते ही बहुत ठंडा पानी, बर्फ या आइसक्रीम देना भी संवेदनशील बच्चों में लक्षण बढ़ा सकता है। शुरुआती अवस्था में एलर्जी नियंत्रण, नमक-पानी से नाक की सफाई, सही दवा, धूल से बचाव, एसी-कूलर की सफाई, पौष्टिक भोजन, पर्याप्त पानी, नियमित नींद और खेलकूद  से लाभ मिल सकता है। लेकिन यदि दवा से सुधार न हो, लगातार मुँह से सांस लेना, तेज खर्राटे, नींद में सांस रुकने जैसा लक्षण, बार-बार कान में पानी, सुनाई कम होना या चेहरे-दांतों में बदलाव दिखे, तो विशेषज्ञ द्वारा जांच के बाद एडिनॉयड ऑपरेशन या अन्य उपचार की सलाह दी जा सकती है। उचित समय पर किया गया उपचार बच्चे की सांस, नींद, सुनने, बोली-विकास और पढ़ाई को सुरक्षित रखने में मदद करता है।

बच्चों का मुंह खुला होना आदत नहीं बीमारी का संकेत

डॉ शैलेन्द्र गुप्ता ने बताया कि 1–2 सप्ताह से अधिक नाक बंद रहना, लगातार खांसी-जुकाम, गले में बार-बार संक्रमण, खर्राटे, मुँह से सांस लेना या सुनाई कम होने की शिकायत को सामान्य न समझें। बच्चे का मुँह खुला रहना आदत नहीं, बीमारी का संकेत हो सकता है।



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