रायपुर/अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ पंजीयन एवं मुद्रांक कार्यपालिक अधिकारी, कर्मचारी कल्याण संघ रायपुर के अध्यक्ष विरेन्द्र कुमार श्रीवास के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने वित्त, वाणिज्यिक कर,पंजीयन मंत्री ओपी चौधरी को ज्ञापन सौंपकर एनजीडीआरएस प्रणाली में आवश्यक सुधार किए जाने की मांग की है। ज्ञापन में संघ ने वित्त मंत्री से कहा है कि आपके निर्देशानुसार रजिस्ट्री विभाग में भारत सरकार का एनजीडीआरएस प्रणाली लागू किया गया, जिससे विभाग में विगत् 7 वर्षों से निरंकुश रूप से जारी प्राइवेट कंपनी के मनमानेपन तथा भ्रष्टाचार से छुटकारा मिल पाया। संघ शुरू से ही उच्च संरक्षण प्राप्त प्रायवेट ऑपरेटर के खिलाफ आवाज उठाता रहा है। संघ विभाग में एनजीडीआरएस प्रणाली लागू करने का स्वागत करता है तथा आपके प्रति धन्यवाद ज्ञापित करता है। रजिस्ट्री प्रकिया को सरल, पारदर्शी, जनहितैषी, उपयोक्ता हितैषी, त्रुटि निरपेक्ष तथा जनोन्मुख बनाने के किसी भी प्रयास में संघ का संपूर्ण सहयोग रहेगा।
तकनीकी और व्यवहारिक खामियों का सुधार जरूरी
संघ ने ज्ञापन में कहा है कि NGDRS प्रणाली एक जेनरिक सॉफ्टवेयर है, जिसमें अपने मिशन तथा विजन के हिसाब से कान्फिगरेशन किए जाने का पूर्ण प्रावधान है। पर्याप्त कान्फिगरेशन करके इस सॉफ्टवेयर को देश में एक मॉडल के रूप में स्थापित किया जा सकता था। महोदया, प्रदेश के तीन पंजीयन कार्यालयों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 2021 में NGDRS से पंजीयन शुरू किया गया था। जहां तीन वर्षों से निरंतर NGDRS प्रणाली से पंजीयन चल रहा था। इस दौरान वहां पदस्थ हमारे साथी NGDRS प्रणाली में उद्भूत होने वाले समस्याओं के बारे में लगातार फीडबैक देते रहें है तथा संशोधन एवं मूल्य संवर्धन हेतु सुझाव देते रहे हैं। पायलट प्रोजेक्ट का मूल उद्देश्य ही यह होता है कि किसी प्रणाली के व्यवहारिक परिचालन से उदभूत होने वाली कठिनाइयों का निराकरण किया जा सके। बिना पर्याप्त कान्फिगरेशन तथा संशोधन, सुधार के साफ्टवेयर का प्रयोग अत्यधिक जटिल, प्रतिगामी, त्रुटिपूर्ण पक्षकारों व उपयोक्ताओं दोनों के हित विपक्षी हैं। अतः यह आवश्यक है कि पायलट परिचालन के दौरान उद्भूत समस्याओं, सुझावों को संज्ञान में लिया जाकर पर्याप्त कॉन्फिगरेशन किया जाए। अपने जेनरिक स्वरूप में NGDRS लागू किये जाने से हमें अत्याधिक असुविधा हो रही है, फन्टियर सिपाही होने के कारण जनता के आकोश का शिकार होना पड़ रहा है, इसके बावजूद भी हमने NGDRS को आपके नेतृत्व में संपूर्ण राज्य में लागू कराया। अब 5 फरवरी 2023 से एन.जी.डी.आर.एस. सिस्टम संपूर्ण छत्तीसगढ़ में लागू हो चुका है।
लोगों की उम्मीदों पर नही उतर पा रहा खरा
संघ ने कहा है कि राज्य में अत्यंत देर से 2017 में ई-पंजीयन प्रणाली शुरू हुआ। 2023 में जब हम नया कोई प्रणाली लॉन्च कर रहे हैं तो स्वाभाविक रूप से पक्षकार व उपयोक्ता दोनों की ये अपेक्षा से होती है कि नया प्रणाली, पुराने प्रणाली से अत्याधिक उन्नत त्रुटिविरोधी, समय मितव्ययी, लागत मितव्ययी, सुविधाजनक, आसान तथा मूल्य संवर्धन हो। आवश्यक कान्फ़िगरेशन किया जाकर NGDRS को ऐसा बनाया जा सकता था, लेकिन नहीं किया गया।
NGDRS प्रणाली में यह सुधार आवश्यक -
* पंजीयन विभाग के अधिकारियों के सामने छद्म प्रतिरूपण एक गंभीर समस्या है। आए दिन ऐसी घटनाएँ होती रहती है कि अमूक व्यक्ति की जगह में अमूक व्यक्ति ने आकर रजिस्ट्री करा ली। इससे लोगों का संपत्ति संव्यवहार के मामलों में विश्वास कम होता जाता है तथा पीड़ित भू-स्वामी को मानसिक एवं आर्थिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। वहीं दूसरी ओर ऐसी घटनाओं के पुलिस में जाते ही पुलिस द्वारा पंजीयन अधिकारी को उस काम के लिए प्रताड़ित किया जाता है जो उसने शासकीय पदीय हैसियत से अपने कर्तव्य के निर्वहन करते हुए किया है। मैं, व्यक्तिगत रूप से 2016 से आधार इंटिग्रेशन के लिए लगातार पत्र भेजता रहा हूँ। इस बाबत् मुख्य सचिव, सचिव, आई.जी. आदि उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराते रहे हैं। गतवर्ष संघ के अनुरोध पर मुख्य सचिव ने तत्कालीन विभागीय सचिव को शीघ्र से शीघ्र आधार इंटिग्रेशन चालू करने का निर्देश भी दिया था लेकिन आज पर्यन्त ये चालू नहीं हो पाया है। आश्यर्च का विषय है कि मोबाईल का कनेक्शन लेना तथा बैंकिंग जैसे संव्यवहार भी आधार से लिंक हो गया है तो रजिस्ट्री जैसा कार्य क्यों नहीं। अतः निवेदन है कि विभाग में शीघ्र ही रजिस्ट्री कार्य के KYC को आधार एंव पेन से लिंक किया जाए।
*दस्तावेजों की पूर्व अपलोडिंग दस्तावेजों तथा पंजीयक के बीच भौतिक संपर्क कम करने तथा पंजीयन हेतु प्रस्तुत दस्तावेजों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ रोकने के लिए निष्पादित प्रस्तुत दस्तावेजों के अपलोडिंग के साथ ही टोकन कटता था। वर्तमान सिस्टम में अपलोडिंग का प्रावधान पंजीयन के पश्चात है। महोदया, जमीन वर्तमान में सर्वाधिक बहुमूल्य संपदा है, तथा जमीन से संबंधित मामलो में विविध रूपों में धोखाधड़ी की घटनाएं होती रहती हैं। पूर्व में मैन्युअल रजिस्ट्री के समय रजिस्ट्री के पृष्ठों में छेड़छाड़ की अनेक घटनाएं हो चुकी है। मध्यप्रदेश में भी दस्तावेजों की अपलोडिंग पहले की जाती है, तथा अपलोडेड दस्तावेज पंजीयन के लिए रजिस्ट्रार के पोर्टल ट्रान्सफर होता है। अतः निवेदन है कि दस्तावेजों का अपलोडिंग रजिस्ट्री के पहले ही कराये जाने का प्रावधान सॉफ्टवेयर में किया जाए।
*रजिस्ट्रीकृत दस्तावेज की पेज नम्बरिंग पूर्व में रजिस्ट्रकृत दस्तावेज में बारकोड तथा पेज नम्बरिंग होता था। इसके बाद की कई ऐसी घटनाएं हुई है, जब नकली रजिस्ट्री को बंधक रखकर लोन ले लिया गया है। वर्तमान सिस्टम में पेज नम्बरिंग नहीं होने से धोखाधड़ी की संभावनाएं बढ़ गई है। अतः निवेदन है कि पेज नम्बरिंग के साथ-साथ प्रत्येक पेज में बार कोडिंग तथा मूल व फर्जी दस्तावेज के बीच अंतर करने वाला Optical Mark आवश्यक है। जिला पंजीयन कार्यालय का कम्प्युटरीकरण IT Solution के निविदा में जिला पंजीयक कार्यालय के कम्प्युटरीकरण का प्रावधान भी किया गया था, जिसे कंपनी ने आज दिनांक तक नहीं किया। निविदा शर्तों के अनुरूप जिला पंजीयक कार्यालय का कम्प्युटरीकरण नहीं करने के कारण ही तत्कालीन आईजी. श्री गोयल ने कंपनी का पेमेंट रोक दिया था। जनता से जुड़े कई कार्य यथा स्टाम्प रिफण्ड, बाजार मूल्य निर्धारण, स्टाम्प वसूली, सम्यक मुद्रांकन, स्टाम्प प्रमाणपत्र, अपील आदि जिला पंजीयन कार्यालय में संपादित किए जाते हैं। अतः पंजीयन कार्यालय का सही मायने में कम्प्युटरीकरण तब तक अधूरा रहेगा, जब तक जिला पंजीयन कार्यालय का कम्प्युटरीकरण नहीं हो जाता है।
* निरस्त पावर ऑफ एटार्नी के आधार पर रजिस्ट्री महोदया, विदित हो कि आज बाजार में पावर ऑफ एटार्नी हस्तांतरण पत्र की तरह उपयोग होने लगा है, तथा सर्वाधिक धोखाधड़ी की घटनाएं पावर ऑफ एटार्नी में ही होती है बहुधा ऐसी घटनाएं होती रहती है कि निरस्त किए गए पावर ऑफ एटानी या समयबाधित अथवा संपत्ति बाधित पॉवर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर रजिस्ट्रियां हो जाती है। पूर्व साफ्टवेयर में निरस्त पावर ऑफ एटार्नी के आधार पर रजिस्ट्री को टोकन स्तर पर ब्लाक का प्रावधान था। वर्तमान सॉफ्टवेयर में भी ऐसी प्रावधान किया जाना चाहिए, कि निरस्त अथवा समयबाधित, संपत्ति बाधित पावर ऑफ एटार्नी के आधार पर कोई रजिस्ट्री अपाईंटमेंट स्तर पर ही ब्लॉक हो जावे।
* मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों में सर्च, नकल सभी कार्य वर्षों पूर्व आनलाईन हो चुका है। छत्तीसगढ़ में सर्च, नकल का कार्य पूर्णतः ऑनलाईन किया जाना चाहिए।
* कोविड के समय अपाईंटमेंट सिस्टम लागू किया गया था। वर्तमान में अपाईंटमेंट सिस्टम नाम मात्र का है, और कोई भी कभी भी आकर रजिस्ट्री करा दे रहा है। या तो वह अपाइमेंट सिस्टम रखना चाहिए या तो पंजीयन मैन्युअल में यथा प्रावधानित कार्य विभाजन के अनुसार रजिस्ट्री किया जाना चाहिए।
*वर्तमान सिस्टम में उप पंजीयक के लिए दिया गया चेक लिस्ट गैर जरूरी तथा बिना प्राधिकार का है तथा समयव्ययी है। हटाया जाना चाहिए।
*बोगस अपाईंटमेंट रोकने के लिए Adjustable Nominal फीस होना चाहिए।
* NGDRS प्रणाली में पंजीयन नियमों के अनुसार प्रावधानित विभिन्न प्रकार के रिपोट त्रुटिपूर्ण जनरेट हो रहे हैं। विभिन्न विभागो, एजेन्सियों द्वारा पंजीयन विभाग से तत्काल जानकारियों मांगी जाती है। NGDRS का रिर्पोटिंग इतना आसान व त्रुटिरहित होना चाहिए कि विभिन्न एजेन्सियों की मांगों की समय पर पूरा किया जा सके।
* पूर्व सॉफ्टवेयर में किसी भी स्तर पर टोकन को डिलीट करने का प्रावधान था। वर्तमान साफ्टवेयर में टोकन डिलीट करने का प्रावधान प्री-रजिस्ट्री पश्चात् सीधा पंजीयन प्रमाण पत्र के स्टेज में है। ऐसी स्थिति में कई बार निष्पादन स्वीकृति के समय ऐसा तथ्य संज्ञान में आता है कि पंजीयन रोकना पड़े या शुल्क के समय त्रुटिपूर्ण गणना संज्ञान में आता है लेकिन रिवर्ट ऑप्शन नहीं होने के कारण पक्षकारों को कई-कई दिन तक परेशान होना पड़ रहा है। अतः निवेदन है कि इन स्तरों पर भी रिवर्ट का प्रावधान किया जाना आवश्यक है।



