रायपुर। खबरी गुल्लक।। 18 मई 2025।।
छत्तीसगढ़ में हुए 2000 करोड़ से अधिक के शराब घोटाला मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो व एंटी करप्शन ब्यूरो की टीमों ने 17 मई को राजधानी रायपुर , जगदलपुर, अंबिकापुर, दंतेवाड़ा व सुकमा सहित 13 अलग अलग ठिकानों पर छापा मारा। सूत्रों के मुताबिक संदेहियों के निवास व अन्य स्थानों से आबकारी घोटाले के संबंध में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कई बैंक एकाउंट व जमीनों में निवेश से संबंधित दस्तावेज जब्त किए गए हैं। छापे में 19 लाख रुपए नगद, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंक एकाउंट व जमीनों के दस्तावेज बरामद किए गए हैं। जिन ठिकानों पर छापेमारी की गई है वे सभी ठिकाने पूर्व मंत्री कवासी लखमा से जुड़े लोगों के हैं। बताया जा रहा है कि राजधानी रायपुर के देवेंद्रनगर में जी नागेश्वर राव और कृष्णानगर में कमलेश के घर पहुंची जांच टीम। नाटा के घर पर ईओडब्ल्यू की अलग- अलग टीम पहुंची और छापे की कार्रवाई की। दंतेवाड़ा में कांग्रेस नेता राजकुमार तामो के घर पर ईओडब्ल्यू की टीम ने सुबह दबिश दी। बताया जा रहा है कि 2019 से 2022 तक सरकारी शराब दुकानों से अवैध शराब डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर बेची गई। इससे शासन को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हुआ है। ईडी का आरोप है कि पूर्व मंत्री कवासी लखमा सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे। कवासी लखमा के निर्देश पर ही सिंडिकेट काम करता था। इस मामले में कवासी लखमा फिलहाल जेल में बंद हैं। शराब घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है
सूत्रों के मुताबिक छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा भी जांच की जा रही है। ईडी ने एसीबी में एफआईआर दर्ज कराई है। एफआईआर में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले का खुलासा हुआ है। ईडी ने जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में रिटायर आईएएस अधिकारी अनिल टूटेजा, आबकारी विभाग के विशेष सचिव एपी त्रिपाठी व कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था। ईडी की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर की जांच एसीबी कर रही है। कार्रवाई से इस केस से जुड़े लोगों में हड़कंप है। इनमें से कई संदेहियों का DMF घोटाले में भी नाम है।



