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ब्रेकिंग : सूरजपुर जिले में फर्जी स्कूल खोल शिक्षा माफिया शासन को लगा रहे चुना... शिक्षा के अधिकार कानून के तहत गरीब बच्चों के फीस पर डाल रहे डाका, 4 संस्थाओं को नोटिस ।शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर भी सवालों के घेरे में...

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सूरजपुर।। खबरी गुल्लक।। (भूपेंद्र राजवाड़े)।। 

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में शिक्षा माफिया कागजों को निजी स्कूल खोल शासन की योजना के तहत गरीब बच्चों के नाम मिलने वाले राशि पर डाका डालने का खेल चल रहा है। इससे न सिर्फ शासन को व्यापक क्षति पहुंचा स्वयं का खजाना भरा जा रहा है बल्कि वास्तविक जरूरतमंद बच्चों को इस योजना से निजी स्कूलों में शिक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की कार्यशैली सवालों के घेरे में यह। नागरिकों का आरोप है कि यह गड़बड़ी पकड़ने के बाद विभाग के अधिकारी इसे कमाई का जरिया बना लिए और कमीशन खोरी के साथ इस अवैध कमाई को खुली छूट दे दी। मीडिया के माध्यम जब यह मामला प्रकाश में आया तब अपना दामन बचाने के लिए अधिकारियों ने केवल नोटिस जारी किया। मगर अभी तक थाने में प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है।

यह है मामला 

 सूरजपुर जिले के चार निजी स्कूलों पर शिक्षा के अधिकार के तहत शासकीय फंड हड़पने के लिए नोडल प्राचार्य की लॉगिन आईडी और पासवर्ड हैक करने का सनसनीखेज आरोप लगा है। इसके जरिए इन स्कूलों ने दावा सत्यापन की पूरी प्रक्रिया न केवल गुपचुप तरीके से पूरी कर ली, बल्कि शासन-प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने की भी कोशिश की है। यह पूरा मामला शिक्षा विभाग की पारदर्शिता पर भी सवालिया निशान लगा रहा है। इस संगठित अपराध के उजागर होते ही जिला शिक्षा अधिकारी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित स्कूल प्राचार्यों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। साथ ही जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग ने संयुक्त रूप से गहन जांच की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी है। जिन स्कूलों पर यह आरोप लगा है, उनमें इंडियन पब्लिक स्कूल, गुरुकुल पब्लिक स्कूल, ओमकार पब्लिक स्कूल और ज्ञानगंगा पब्लिक स्कूल शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि राज्य शासन निर्धन और वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा के लिए निजी स्कूलों को छात्रवृत्ति और अन्य अनुदान की प्रतिपूर्ति राशि प्रदान करता है। इसके लिए स्कूलों को ऑनलाइन आवेदन करना होता है, जिसका सत्यापन नोडल प्राचार्य द्वारा किया जाता है। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं। लेकिन कुछ स्कूल संचालकों ने नोडल प्राचार्य की लॉगिन आईडी और पासवर्ड हैक कर सिस्टम के साथ छेड़छाड़ की, जो न केवल अनैतिक है, बल्कि साइबर अपराध की श्रेणी में भी आता है। जानकारों का कहना है कि नोडल प्राचार्य के लॉगिन डिटेल्स का दुरुपयोग केवल आर्थिक गड़बड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संगठित साइबर अपराध है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में केवल नोटिस तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। दोषी स्कूलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।  इस घटना से शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है। आईडी और पासवर्ड हैक कर निजी स्कूल संचालकों के द्वारा राशि हड़पने के लिए किए गए कार्य के मामले में जहां एक ओर साइबर अपराध का मामला बनता है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक गड़बड़ी इन्हीं चार स्कूलों तक सीमित नहीं है। जानकारों का कहना है कि एक संगठित गिरोह के रूप में काम हो रहा है और इसमें जिला शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की संलिप्तता से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

मिली भगत से चल रहा सारा खेल

 इस मामले में शिक्षा विभाग सुर्खियों में बना हुआ है और संबंधित स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी होने के साथ विभाग ने जांच की कार्रवाई प्रारंभ कर दी है, लेकिन अभी तक इस आर्थिक गड़बड़ी और अनियमितता को लेकर संबंधित स्कूलों के खिलाफ शिक्षा विभाग द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराने को लेकर कोई पहल नहीं हुई है। विभाग के अधिकारियों के इस कार्यशैली पर उनकी निष्ठा पर सवाल उठने लगे हैं। नागरिकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिली भगत से ही यह सारा खेल चल रहा है। 

ऐसा भी हो रहा 

नागरिकों का कहना है कि निजी स्कूलों को मान्यता तो दी जाती है मगर संबंधिक स्कूल चल रहा है या नहीं इसकी इसकी कभी जांच नहीं होती। अधिकारियों की मिली भगत से योजनाबद्ध तरीके से एक स्कूल के पंजीयन और नाम के आधार पर कई शाखा  स्कूल कागजों में खोल दिया जाता है। जिसमें से एक स्कूल में यदि 50 या 60 बच्चे हुए तो यही संख्या और नाम अन्य शाखा स्कूलों में भी दर्शा गरीब बच्चों के नाम फीस की राशि का घोटाला किया जाता है। 


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