देश के सर्वोच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भारतीय सेना के खिलाफ अपमानजनक बयान के लिए कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा है कि आप सच्चे भारतीय हैं, तो ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए थी। राहुल गांधी ने कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सेना के खिलाफ टिप्पणी की थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ मानहानि मामले में याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने राहुल गांधी के अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी से सवाल पूछा वे कैसे कह सकते हैं कि 2,000 वर्ग किमी जमीन चीनियों ने कब्जा कर ली है? .. सिंघवी ने सुनवाई की शुरुआत में कहा था अगर कोई विपक्षी नेता मुद्दे नहीं उठा सकता, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा- अगर आप सच्चे भारतीय हैं, तो ऐसी बात नहीं कहेंगे, सोशल मीडिया के बदले संसद में अपनी बात क्यों नहीं कहते ? यह संभव है कि एक सच्चा भारतीय कहे कि हमारे 20 सैनिकों को पीटा गया और मार डाला गया और यह चिंता का विषय है। जस्टिस दत्ता ने कहा जब सीमा पर संघर्ष हो रहा हो, तो क्या दोनों पक्षों में लोगों का मारा जाना असामान्य है? राहुल गांधी को केवल उचित जानकारी होगी। यदि वे प्रेस में छपी बातें भी नहीं कह सकते तो वह विपक्ष के नेता नहीं हो सकते। इस पर जस्टिस दत्ता ने कहा, आपको जो कुछ भी कहना है, संसद में क्यों नहीं कहते? सोशल मीडिया पोस्ट में ऐसा क्यों कहना पड़ता है! राहुल गांधी की टिप्पणियों से असहमति जताते हुए जस्टिस दत्ता ने पूछा कि राहुल को कैसे पता कि 2,000 वर्ग किमी भारतीय क्षेत्र पर चीन ने कब्जा कर लिया था? क्या आप वहां थे? क्या आपके पास कोई विश्वसनीय सबूत है? आप बिना सबूत के बयान क्यों दे रहे हैं? अगर आप एक सच्चे भारतीय होते, तो यह सब नहीं कहते। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक कोर्ट ने कहा सवाल उठाने के लिए आपके पास एक उचित मंच संसद मौजूद है। अधिवक्ता सिंघवी ने कहा राहुल अपनी टिप्पणियों को बेहतर ढंग से व्यक्त कर सकते थे। मगर यह शिकायत केवल सवाल उठाने के लिए उन्हें परेशान करने का प्रयास मात्र है, जो एक विपक्षी नेता का कर्तव्य है। अधिवक्ता सिंघवी ने कहा कि हाईकोर्ट में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को दी गई चुनौती मुख्य रूप से शिकायतकर्ता के अधिकार क्षेत्र पर केंद्रित थी। उन्होंने हाईकोर्ट के तर्क पर सवाल उठाया कि शिकायतकर्ता भले ही सीधा पीड़ित नहीं है, फिर भी वह राहुल की टिप्पणी से अपमानित हुआ है। अंततः पीठ बीएनएसएस की धारा 223 के बिंदु पर विचार को सहमत हो गई है। इसके अनुसार किसी आपराधिक शिकायत का संज्ञान लेने से पहले अभियुक्त को सुनवाई का मौका दिया जाना अनिवार्य है।
सेना के खिलाफ टिप्पणी किए जाने पर सर्वोच्च कोर्ट ने राहुल गांधी को लगाई फटकार... कहा - अगर आप सच्चे भारतीय हैं, तो ऐसी बात नहीं कहेंगे...
अगस्त 04, 2025
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