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दृष्टिहीन बालिका के साथ अनाचार करने वाले सौतेले पिता और नाना को अदालत ने दी मौत होने तक कारावास की सजा

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 सूरजपुर। खबरी गुल्लक।। (भूपेंद्र राजवाड़े)।। 

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिला में दृष्टिहीन नाबालिग बालिका के साथ रिश्ते को शर्मशार करते हुए अनाचार किए जाने के मामले में सुनवाई करते हुए अदालत ने आज आरोपी नाना और सौतेले पिता को दोषी ठहराते हुए मौत होने तक आजीवन कारावास से दंडित किया है। सूरजपुर फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय ने यह फैसला दिया। कोर्ट का यह फैसला न सिर्फ पीड़िता को न्याय दिलाने में ऐतिहासिक साबित हुआ है, बल्कि समाज में यह भी स्पष्ट संदेश दे गया कि मासूमों के साथ दुष्कर्म करने वालों के लिए अब कोई माफी नहीं।

न्यायालयीन सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2022 से 2024 तक, नाबालिग दृष्टिहीन बालिका के साथ उसका सौतेला पिता  लगातार दुष्कर्म करता रहा। यह घिनौना अपराध तब सामने आया जब बच्ची ने साहस जुटाकर घटना की जानकारी दी। मामले की जांच में यह भी सामने आया कि उसी दिन जब सौतेले पिता ने बच्ची से दुष्कर्म किया था, उसके कुछ घंटे बाद ही बच्ची का नाना  भी उसे बहलाकर अपने घर ले गया और कमरे में बंद कर उसके साथ दुष्कर्म किया। बच्ची के साथ लगातार हो रहे अमानवीय कृत्य ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया। जिला पुलिस ने तत्परता से जांच करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया और मजबूत केस तैयार कर अदालत में पेश किया।

विशेष न्यायाधीश आनंद प्रकाश वरियाल की अदालत ने मामले की गंभीरता को समझते हुए दोषियों के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाया और कहा कि “ऐसे अपराधियों को समाज में जीने का कोई हक नहीं। मासूमों के साथ दरिंदगी करने वालों को बख्शा नहीं जा सकता।” सौतेले पिता  को पॉक्सो एक्ट की धारा-6 के तहत दोषी मानते हुए अंतिम सांस तक आजीवन कारावास और 1000 रुपये जुर्माना लगाया गया।

वहीं आरोपी नाना को भी पॉक्सो एक्ट व धारा-6 तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा-127 (BNS) के तहत दोषी पाते हुए अंतिम सांस तक आजीवन कारावास, 1 वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास, 500 रुपये जुर्माना और अतिरिक्त दंड सुनाया गया हैं। सरकार की ओर से मामले की पैरवी विशेष लोक अभियोजक नरेश कौशिक ने की। उन्होंने मजबूती से तथ्यों और सबूतों को अदालत के समक्ष रखा।  यह निर्णय छत्तीसगढ़ न्याय व्यवस्था के लिए एक उदाहरण है, जो बाल सुरक्षा और महिला अधिकारों के संरक्षण में मील का पत्थर साबित होगा।

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