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तातापानी के धनगांव में भगवान श्री कृष्ण की रास लीला उत्सव 5 नवंबर से... जाने इस बार क्या रहेगा खास

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बलरामपुर।। खबरी गुल्लक।। (जिला प्रतिनिधि उत्तम सरकार)

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिला के ग्राम धनगॉंव  तातापानी में पिछले   44 वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार इस बार भी श्रीकृष्ण भगवान की रास लीला उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष की रास लीला उत्सव  5/11/2025 से 14/11/2025 तक आयोजित होगा। जिसमें 6 नवम्बर से 10नवम्बर तक अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्ध कथा वाचक पूज्य प्राची देवी के श्री मुख से भागवत कथा का पाठ किया जाएगा । दिनांक 12 नवम्बर से 14 नवम्बर तक विभिन्न प्रदेशों से आए कीर्तन मंडली तथा स्थानीय कीर्तन मंडली द्वारा अखण्ड नाम संकीर्तन का गायन किया जाएगा । अंतिम तीन दिन भण्डारे का आयोजन किया जाएगा ।दस दिवसीय मेला उत्सव में क़तार में लगी दुकानें उत्सव की सुंदरता में चार चाँद लगाने का काम करता है ।

मिट्टी की 150 से अधिक प्रतिमाओं में श्री कृष्ण जी की लीलाओं का वर्णन 

कृष्ण भगवान की लीलाओं का वर्णन मिट्टी से बनी 150 से अधिक जीवंत मूर्तियों के माध्यम से किया जाता हैं ।स्थानीय मूर्तिकार सचिन हालदार कहना हैं कि “ विगत 44 वर्षों से मेरे गुरु स्व. श्री अतुल भास्कर के सानिध्य में रहा कर मूर्ति निर्माण कार्य प्रारंभ किया था । तब से लेकर आज तक रास लीला की मूर्तियों का निर्माण कार्य करते आ रहा हूँ । आज से 47 से वर्ष पूर्व शिव संप्रदाय के संत  स्व. विश्वनाथ गिरि पगला बाबा जी का आगमन स्व. मनोरंजन विश्वास के माध्यम से ग्राम धनगॉंव में हुआ था । उनकी प्रेरणा से स्व. सखानाथ हालदार,स्व. जोगेंद्र नाथ विश्वास , स्व. संतोष राय ,स्व. क्षितिज सरकार,स्व. प्रशांत सरकार, स्व.शांति रंजन विश्वास ,स्व.जगदीश राय ,स्व. मानिक बनर्जी , रंजीत मुखर्जी,  कृष्ण पद विश्वास,  विनय विश्वास , खोकन बछाड़ सहित अन्य लोगों द्वारा रास लीला समिति गठित कर उत्सव की शुरुआत की गई थी ।  रंजीत मुखर्जी ने बताया कि  पहले वर्ष रास लीला का बजट मात्र तेरह सौ रुपये था। उस समय  सभी कार्य जन सहयोग से होता था । स्थानीय कलाकारों द्वारा निःशुल्क मूर्तियों का निर्माण ,भजन, कीर्तन, नाटक और संगीत आदि का कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाता था । वर्तमान समय में आर्केस्ट्रा में प्रस्तुत संगीत कार्यक्रम में वो शालीनता नहीं दिखाई देती हैं । मर्यादा का पालन होना चाहिए। 

भाईचारा और सौहाद्र की मिशाल

     प्रधान पाठक  प्रभाकर मुखर्जी का कहना है कि  रास लीला उत्सव भाईचारा , सौहार्द और एकता का संदेश देता है। रास लीला उत्सव की सबसे बड़ी परंपरा रही हैं कि सभी धर्मों और संप्रदाय के लोगों द्वारा एक साथ मिलकर तन , मन और धन से सहयोग प्रदान किया जाता हैं । कार्यक्रम से पहले से सिर्फ़ कार्यक्रम का रूपरेखा तैयार की जाती हैं । सभी बड़े कार्यक्रम का खर्च धार्मिक आस्था में विश्वास रखने वाले समाज सेवी लोग स्वयं से आगे आकर करते हैं । गॉंव के लोगों बैठक में तय निर्धारित राशि चंदा के रूप में जमा करते हैं । क्षेत्रवासी अपनी इच्छा अनुसार चंदा प्रदान करते हैं । सभी के सहयोग के बिना इतना बड़ा कार्यक्रम होना संभव नहीं है । इस वर्ष अच्छी बारिश होने के कारण किसानों में ख़ुशी हैं । मेले में लगने वाले दुकानों में अच्छी ख़ासी रौनक दिखाई देने की उम्मीद है।

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