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मध्यप्रदेश मॉडल अपनाते हुए मृतक सेवक के परिवार को अनुग्रह राशि बढ़ाकर 1.25 लाख दे सरकार- भानु प्रताप यादव

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अंबिकापुर।। दुर्ग।।  13 जनवरी 2026।। 

 छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष भानु प्रताप यादव ने राज्य सरकार से शासकीय सेवक की सेवाकाल में मृत्यु पर उसके परिवार को दिए जाने वाले अनुग्रह अनुदान एक्सग्रेशिया राशि की सीमा बढ़ाने की मांग की है। वर्तमान में यह राशि अधिकतम 50 हजार रुपये तक सीमित है, जबकि पड़ोसी मध्यप्रदेश ने इसे 1.25 लाख रुपये तक बढ़ा दिया है। यादव ने इस संबंध में माननीय मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री एवं मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन के नाम जिलाध्यक्ष महोदय दुर्ग के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किया है।

संघ जिलाध्यक्ष भानु प्रताप यादव ने लिखित बयान जारी कर कहा कि राज्य सरकार का वर्तमान प्रावधान शासकीय सेवक की सेवा में रहते हुए मृत्यु होने पर उसके परिवार को वेतनमान में बेंड वेतन एवं ग्रेड वेतन के योग के छह माह के बराबर अधिकतम  पचास हजार रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान करने का है। लेकिन अब प्रदेश के शासकीय सेवकों को सातवें वेतन आयोग के तहत वेतनमान प्राप्त हो चुका है, जिसके अनुरूप यह सीमा अपर्याप्त हो गई है। यादव ने मध्यप्रदेश शासन के वित्त विभाग, वल्लभ भवन मंत्रालय भोपाल के पत्र क्रमांक एफ-4-1/25/नियम/चार, दिनांक 3 अप्रैल 2025 का हवाला देते हुए बताया कि वहां शासकीय सेवक की सेवाकाल में मृत्यु पर मृतक के परिवार को वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के तहत देय वेतन के छह गुना के बराबर अधिकतम  एक लाख पच्चीस हजार रुपये की अनुग्रह राशि स्वीकृत की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का गठन वर्ष 2000 में मध्यप्रदेश से पृथक होने के बाद भी समय-समय पर मध्यप्रदेश के शासकीय कर्मचारी हितार्थ निर्णय यहां लागू होते रहे हैं। मध्यप्रदेश रि-ऑर्गेनाइजेशन एक्ट 2000 की धारा 61 के आधार पर भी यह आदेश छत्तीसगढ़ में लागू हो सकता है।

संघ की यह है मांगें

शासकीय सेवक की मृत्यु पर अनुग्रह राशि की सीमा को तत्काल 1.25 लाख रुपये तक बढ़ाया जाए।  सातवें वेतन आयोग के अनुरूप वेतन गणना के आधार पर छह गुना राशि प्रदान की जाए।  इस संबंध में शीघ्र अधिसूचना जारी कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।  भानु प्रताप यादव ने कहा कि यह कदम न केवल मृतक सेवकों के परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करेगा, बल्कि शासकीय कर्मचारियों में सुरक्षा की भावना भी पैदा करेगा। उन्होंने Collector  दुर्ग से अनुरोध किया है कि ज्ञापन को शीघ्र शासन के समक्ष प्रस्तुत करवाएं। संघ ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की राह अपनाई जा सकती है।

 छत्तीसगढ़ में सातवें वेतन आयोग के कार्यान्वयन के बाद कई कल्याणकारी योजनाओं में संशोधन की मांग लंबे समय से चल रही है। पड़ोसी राज्यों के बेहतर प्रावधानों का उदाहरण देकर कर्मचारी संगठन लगातार दबाव बना रहे हैं।



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