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ब्रेकिंग: छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग में नियमों की खुलेआम अवहेलना: अपात्र जूनियरों को उच्च पदों का प्रभार, लाखों- करोड़ों की उगाही का आरोप.. सीनियरों में रोष

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अंबिकापुर/ रायपुर ।। 21 जनवरी 2026:

 छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य विभागों में रिक्त उच्च पदों की नियुक्ति के नाम पर भ्रष्टाचार का काला कारोबार जोरों पर है।  स्पष्ट नियमों और गाइडलाइनों को ताक पर रखकर अपात्र और कनिष्ठ चिकित्सकों को प्रभार सौंपे जा रहे हैं, जबकि वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर पात्र डॉक्टर उपेक्षित हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इस खेल से लाखों-करोड़ों रुपये की कमाई हो रही है।  खुले तौर पर सौदेबाजी चल रही है।  यह मामला  स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सीधा प्रहार भी कर रहा है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से ऐसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, जहां महत्वपूर्ण पदों पर कनिष्ठ अधिकारियों को बिठाकर वरिष्ठों को ठगा जा रहा है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा  इन अनियमितताओं को उजागर करते हुए नियमों का सख्ती से पालन कराने की मांग की गई है। वरिष्ठ चिकित्सकों का आरोप है कि मेडिकल कॉलेजों और जिला स्तर के स्वास्थ्य विभागों में पदों की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। 

मेडिकल कॉलेज रायगढ़ का मामला: वरिष्ठों की उपेक्षा का शर्मनाक उदाहरण

सबसे ताजा उदाहरण मेडिकल कॉलेज रायगढ़ का है। यहां पदस्थ डीन डॉ. विनीत जैन का आकस्मिक निधन हो गया, जिससे अधिष्ठाता का पद रिक्त हो गया। सामान्य प्रक्रिया के अनुसार वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर विषय विशेषज्ञों,  वरिष्ठ चिकित्सकों को प्रभार मिलना चाहिए था, जो वरिष्ठता और अनुभव के मानदंडों पर खरे उतरते हैं। लेकिन शासन स्तर पर हुई मनमानी से एक सहायक प्राध्यापक को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई। मेडिकल कॉलेज के  वरिष्ठ चिकित्सकों में निराशा के साथ गुस्सा  है। वे आरोप लगाते हैं कि उनकी योग्यता को नजरअंदाज कर कनिष्ठ को प्राथमिकता दी गई, जो शासन के अपने निर्देशों का उल्लंघन है। प्रभार वाद के साथ भाई भतीजा बाद भी चरम है और चाहते लोगों को मलाईदार पदों पर बैठा कमाई का खेल खेला जा रहा है। 

जिला स्तर पर फैला भ्रष्टाचार का जाल

स्वास्थ्य विभागों में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) जैसे संवेदनशील पदों पर भी यही कहानी दोहराई जा रही है। सूत्र बताते हैं कि कोरिया जिले में MBBS चिकित्सक को सिविल सर्जन और सीएमएचओ का प्रभार दे दिया गया। सूरजपुर जिले में भी एक जूनियर एमबीबीएस डॉक्टर को सीएमएचओ का प्रभार दे दिया गया है, जबकि कई वरिष्ठ चिकित्सक उपलब्ध थे। सरगुजा जिले में सिविल सर्जन जैसे अधिकारियों की उपेक्षा कर उनसे जूनियर बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) को सीएमएचओ बनाया गया। बलरामपुर जिले में भी वरिष्ठ अधिकारियों को दरकिनार कर जूनियर को यह महत्वपूर्ण पद सौंप दिया गया। कई जिलों में सिविल सर्जन के पदों पर भी इसी पैटर्न से अपात्रों को प्रभार मिला है। पात्र चिकित्सकों का कहना है कि ये नियुक्तियां अवैध उगाही का परिणाम हैं। प्रभार के नाम पर पद बेचे जा रहे हैं। लाखों रुपये की रिश्वत देने वाले अपात्रों को ये जिम्मेदारियां मिल रही हैं, जबकि योग्य वरिष्ठ ठगे जा रहे हैं। एक वरिष्ठ डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया। इस सौदेबाजी से जनता की स्वास्थ्य सेवाएं भी खतरे में हैं, क्योंकि अनुभवहीन अधिकारियों के नेतृत्व में महामारी प्रबंधन, अस्पताल संचालन जैसी जिम्मेदारियां प्रभावित हो रही हैं।

न्यायालय का सख्त रुख: वरिष्ठों को कनिष्ठों के अधीन काम कराना प्रताड़ना

वरिष्ठ चिकित्सकों  ने इस मुद्दे पर न्यायालय के फैसलों का भी हवाला दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि कनिष्ठ अधिकारियों के अधीन वरिष्ठ चिकित्सकों को काम करने के लिए मजबूर करना मानसिक प्रताड़ना का रूप है। ऐसे मामलों में कई फैसले आ चुके हैं, जो शासन को वरिष्ठता का सम्मान करने का निर्देश देते हैं। वरिष्ठ चिकित्सकों का कहना है कि इन फैसलों की अवहेलना कर शासन खुद को कानून से ऊपर समझ रहा है।

शासन के निर्देश कागजों पर, अमल  नहीं

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शासन ने खुद ही इन अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए कई निर्देश जारी किए हैं, लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा। छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने वर्ष 2011 से लेकर 2014 तक तीन महत्वपूर्ण पत्र जारी किए, जो स्पष्ट रूप से वरिष्ठ पदों पर वरिष्ठता-सह-योग्यता के मापदंड अपनाने का आदेश देते हैं।पत्र क्रमांक 1 (16 मई 2012) इस पत्र में कहा गया कि विभिन्न विभाग कनिष्ठ अधिकारियों को वरिष्ठ पदों का प्रभार देकर शासन निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं। निर्देश है: वरिष्ठ पद पर चालू प्रभार सौंपने हेतु वरिष्ठता-सह-योग्यता का मापदंड अपनाएं। कनिष्ठ अधिकारियों को तत्काल भारमुक्त कर वरिष्ठों को प्रभार दें। अवर सचिव एल.डी. चोपड़े ने सभी विभागों को पालन रिपोर्ट मांगी।

पत्र क्रमांक 2 (7 फरवरी 2013) पिछले निर्देशों का पालन न होने पर दोबारा चेतावनी दी गई। अवर सचिव एम.आर. ठाकुर ने पालन प्रतिवेदन शीघ्र भेजने को कहा, ताकि मुख्य सचिव को अवगत किया जा सके। 

पत्र क्रमांक 3 (14 जुलाई 2014): मुख्य सचिव विवेक ढांड ने कड़े शब्दों में कहा था रिक्त वरिष्ठ पदों पर कनिष्ठों को बाईपास कर प्रभार न सौंपा जाए। स्थानांतरण नीति के दौरान उल्लंघन न हो, वरना विभागीय सचिव जिम्मेदार होंगे।ये पत्र आज भी लागू हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इन्हें ठेंगा दिखा रहा है। वरिष्ठ चिकित्सकों  ने शासन से मांग की है कि इन गाइडलाइनों का सख्ती से पालन कराया जाए, अपात्रों को भारमुक्त किया जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो।





वरिष्ठ चिकित्सकों में रोष, सेवाओं पर असर

इन घटनाओं से प्रदेश के सैकड़ों वरिष्ठ चिकित्सकों में असंतोष व्याप्त है। वे कहते हैं कि यह न केवल उनकी मेहनत का अपमान है, बल्कि मरीजों की जान से खिलवाड़ भी। अनुभवहीन अधिकारियों के नेतृत्व में अस्पताल प्रबंधन, दवा वितरण और आपातकालीन सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सूचकांक पर बुरा असर पड़ेगा। अब सवाल यह है कि क्या शासन इस भ्रष्टाचार के जाल को तोड़ पाएगा, या यह खेल यूं ही चलता रहेगा। 

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