अंबिकापुर/ दंतेवाड़ा।। खबरी गुल्लक ।।
जावांगा क्रशर प्लांट में हो रही बेलगाम ब्लास्टिंग स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुरुवार को अनियंत्रित विस्फोट ने सुरक्षा के सारे दावों को ध्वस्त कर दिया। 50 किलो से भारी दर्जनों पत्थर 300 मीटर दूर तक उछलकर प्राथमिक स्कूल की कंक्रीट छत पर गिरे, जिससे छत क्षतिग्रस्त हो गई, गनीमत था कि स्कूल में नहीं थे, वरना गंभीर हादसे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता था। कक्षा के अंदर जा गिरे पत्थरों ने याद दिला दिया कि थोड़ी सी चूक कितने भयानक हादसे को जन्म दे सकती है। सौभाग्य से स्कूल में छात्र-शिक्षक मौजूद नहीं थे, वरना न जाने कितने घर उजड़ जाते। लेकिन सवाल यह है कि क्रशर संचालक की मनमानी और प्रशासन की आंखें बंद करने वाली अनदेखी कब तक चलेगी? स्थानीय ग्रामीण वर्षों से चीख रहे हैं, शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन अफसरों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। अब पुलिस ने चार पर एफआईआर दर्ज कर दो को गिरफ्तार किया है, मगर ग्रामीणों का डर कम नहीं हुआ। ऐसे हालात सरगुजा जिले में भी हैं। अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम असोला,रामपुर क्षेत्र में ब्लास्टिंग से घरों के दीवार क्रेक हो रहे हैं।
संवेदनशील स्थान पर ब्लास्टिंग की अनुमति किसने दी
घटना गुरुवार दोपहर की है। जावांगा क्रशर प्लांट में ब्लास्टिंग के दौरान इतना जोरदार धमाका हुआ कि आसपास का इलाका कांप उठा। विस्फोटक की अतिरिक्त मात्रा से उछले पत्थरों ने 300 मीटर के दायरे में तबाही मचा दी। लगभग 150 मीटर दूर स्थित प्राथमिक स्कूल की मजबूत छत में बड़े-बड़े छेद हो गए। एक पत्थर सीधे कक्षा में जा घुसा, जहां बच्चे रोज पढ़ते हैं। स्कूल प्रबंधन के मुताबिक, अगर समय पर बच्चे मौजूद होते तो स्थिति गंभीर हो जाती। पास ही स्थित ढाबे पर भी पत्थर बरसे, जहां ग्रामीण चाय-पानी पीने आते हैं। इससे आगे सीआरपीएफ कैंप का परिसर भी चपेट में आ गया। सुरक्षा बलों के जवान बाल-बाल बच गए। ग्रामीण बताते हैं कि प्लांट के ठीक सामने ये संवेदनशील स्थान हैं, फिर भी ब्लास्टिंग की इजाजत कैसे मिली?
इन पर दर्ज हुआ एफआईआर
पुलिस ने क्रशर संचालक टी. रमेश, मैनेजर इजराइल, ब्लास्टर और असिस्टेंट ब्लास्टर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 288, 324(5), 326(7) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3 के तहत एफआईआर दर्ज की। धारा 326(7) गैर-जमानती है, जो मामले की गंभीरता बयां करती है। डीएसपी गोविंद दीवान ने बताया कि जांच में पाया गया कि ब्लास्टिंग में निर्धारित सीमा से कहीं अधिक विस्फोटक इस्तेमाल किया गया। सामान्य ब्लास्टिंग में पत्थर 300 मीटर तक नहीं छिटकते। यह सुरक्षा मानकों का घोर उल्लंघन है। दो आरोपी हिरासत में हैं, बाकी की तलाश जारी। लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। वे कहते हैं, यह पहली घटना नहीं। सालों से तेज ब्लास्टिंग से घर हिल जाते हैं, फसलें बर्बाद हो जाती हैं। शिकायतें कीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं।
अनदेखी से मनमानी को बढ़ावा
जावांगा के ग्रामीणों की दशा नर्क जैसी हो चुकी है। प्लांट के आसपास सैकड़ों परिवार रहते हैं। रोजगार के नाम पर ये क्रशर प्लांट खुले, लेकिन बदले में मिला केवल धूल, धुंआ और मौत का साया है । हर ब्लास्टिंग पर घर के बर्तन गिर पड़ते हैं। बच्चे डर से कांपते हैं। फसलें सूख जाती हैं, मवेशी बीमार पड़ते हैं। हमारी जिंदगी दांव पर है। स्कूल के पास ब्लास्टिंग करते हैं बच्चे मरते तो जिम्मेदार कौन होता, प्रशासन सो रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि दो साल पहले भी इसी प्लांट से पत्थर उछलकर एक घर की छत तोड़ चुके थे। ग्रामीणों ने तहसीलदार, एसडीएम तक को ज्ञापन दिए, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। माइनिंग विभाग की अनदेखी ने मनमानी को बढ़ावा दिया। प्लांट को संवेदनशील इलाके में अनुमति किस आधार पर दी गई, यह बड़ा सवाल है।
कलेक्टर के दिए जांच के आदेश
कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने अब हरकत में आते हुए एसडीएम, माइनिंग इंस्पेक्टर और तहसीलदार की संयुक्त जांच टीम गठित की है। टीम प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था, विस्फोटक उपयोग और अनुमति प्रक्रिया की पड़ताल करेगी। लेकिन ग्रामीणों को भरोसा नहीं। वे कहते हैं जांच तो होती रहती है, रिपोर्ट दब जाती है। स्थायी समाधान चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि क्रशर प्लांटों के लिए 500 मीटर के दायरे में कोई स्कूल, अस्पताल या आवासीय क्षेत्र नहीं होना चाहिए। यहां नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। विस्फोटक अधिनियम के तहत अधिक मात्रा इस्तेमाल गंभीर अपराध है। पुलिस जांच में सीसीटीवी फुटेज और विस्फोटक रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
कब तक जिंदगी लगेगी दांव पर
यह घटना न केवल दंतेवाड़ा बल्कि पूरे क्षेत्र के क्रशर प्लांटों पर सवाल उठाती है। छत्तीसगढ़ में सैकड़ों ऐसे प्लांट हैं, जहां ग्रामीणों की उपेक्षा हो रही है। विकास के नाम पर पर्यावरण और जिंदगियां दांव पर लग रही हैं। ग्रामीण संगठन अब आंदोलन की तैयारी में हैं। वे मांग कर रहे हैं- प्लांट बंद हो, दोषियों को सजा मिले और मुआवजा दिया जाए। प्रशासन को चाहिए कि अब झूठे आश्वासनों से ऊपर उठे। अन्यथा ग्रामीणों का गुस्सा भड़क सकता है। क्या कलेक्टर और पुलिस इस बार न्याय सुनिश्चित करेंगे, या यह भी एक और रिपोर्ट में दफन हो जाएगा? जावांगा के ग्रामीण इंतजार कर रहे हैं।



