अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक ।।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत सिलसिला के ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के लिए बदहाली की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। पेयजल, बिजली जैसी जीवनरेखा सेवाओं से वंचित ये ग्रामीण 9 महीने पहले सरगुजा कलेक्टर के जनदर्शन में गुहार लगा चुके थे, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया। बोरवेल मशीन तो आई, लेकिन बिना सर्वे के सूखी जमीन पर खोदा गया बोर, नतीजा सिफर सिफर निकला । अब ग्रामीण सरपंच से लेकर विभागीय अधिकारियों तक थक चुके हैं। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। यह मामला सरकारी योजनाओं की हकीकत उजागर करता हैजहां करोड़ों खर्च होने के बावजूद गांव अंधेरे और प्यासे पड़े हैं। क्या प्रशासन जागेगा, या सिलसिला का सिलसिला यूं ही चलेगा।
बिना टेस्टिंग के बोर खनन, पानी का नामोनिशान नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि कलेक्टर की पहल पर बोरवेल मशीन तो पहुंची, लेकिन जिम्मेदार विभाग ने बिना जमीन का परीक्षण किए सूखे स्थान पर खनन करा दिया। हमने सरपंच के पास कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बच्चे-बूढ़े दूर के हैंडपंप पर लाइन लगाते हैं, गर्मी में सुख जाने से नाला, ढोढ़ी से पानी लाते हैं बीमारियां फैल रही हैं। ग्रामीण कहते हैं कि कलेक्टर साहब ने वादा किया था, लेकिन विभाग वाले कुछ नहीं करते हैं। अब तो हम खुद ही का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं।
खंभा में बिजली जोड़ने 2 - 2 हजार की उगाही का आरोप
विद्युत विभाग की लापरवाही ने ग्रामीणों को और तड़पा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि कलेक्टर के हस्तक्षेप पर बस्ती तक खंभे लगे, तार जोड़े गए, लेकिन मुख्य कनेक्शन भूल गए। अब कर्मचारी 2-2 हजार रुपये की मांग कर रहे हैं। गरीब ग्रामीण बांस-लकड़ी के खंभों पर तार लटका असुरक्षित तरीके से बिजली जोड़ने को विवश हैं। एक चिंगारी और पूरा गांव जल सकता है। विभाग वाले पैसे मांगते हैं, सरपंच चुप हैं।

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