बलरामपुर/ रामानुजगंज।।
फरवरी 2026 में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा शैक्षिक एवं प्रशासनिक संवर्ग नियमों को लेकर शालेय शिक्षक संघ बलरामपुर-रामानुजगंज ने गंभीर आपत्ति व्यक्त की है इसे शिक्षक एल.बी. संवर्ग एवं ट्राइबल संवर्ग एल बी के अधिकारों के विरुद्ध बताया है। संगठन का कहना है कि सरकार जहां वर्षों से लंबित वास्तविक समस्याओं वरिष्ठता निर्धारण वेतन विसंगति सेवा सुरक्षा पर ठोस निर्णय लेने में असफल रही है, वहीं संवर्ग के हितों को प्रभावित करने वाले निर्णय बिना संवाद और बिना सहमति के लागू किए जा रहे हैं।
संघ ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में एल.बी. संवर्ग के हितों को लेकर संवेदनशील है तो यह स्पष्ट किया जाए कि वर्षों से लंबित वरिष्ठता निर्धारण पर आज तक ठोस निर्णय क्यों नहीं लिया गया। सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति जैसे गंभीर मुद्दे आज भी समाधान की प्रतीक्षा में हैं। यह स्थिति सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़ा करती है।
शालेय शिक्षक संघ ने फरवरी 2026 में जारी राजपत्र में कई गंभीर विसंगतियां और तथ्यात्मक आपत्तियां भी उठाई हैं। शिक्षक एल.बी. संवर्ग के पूर्व निर्धारित कोटे को समाप्त कर दिया गया है। नियमित शिक्षक एवं एल.बी. शिक्षक की एकीकृत वरिष्ठता सूची से पदोन्नति का प्रावधान किया गया है, जिससे एल.बी. संवर्ग को गंभीर नुकसान होगा क्योंकि नियमित शिक्षकों की पदोन्नति के बाद ही एल.बी. संवर्ग के शिक्षकों को अवसर मिल सकेगा।
ट्राइबल एल बी संवर्ग के साथ भी दोयम दर्जे का व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया गया है। उपसंचालक के 66 पदों में से 44 पद शिक्षा विभाग संवर्ग और 22 पद ट्राइबल विभाग संवर्ग को दिए गए हैं। संयुक्त संचालक के 8 पदों में से 7 पद शिक्षा विभाग संवर्ग और केवल 1 पद ट्राइबल संवर्ग को दिया गया है। इसे संघ ने ट्राइबल संवर्ग के हितों की अनदेखी बताया है।
खंड शिक्षा अधिकारी के 288 पदों में पूर्व व्यवस्था (75% प्राचार्य प्रतिनियुक्ति एवं 25% पदोन्नति) को बदलकर 25% प्रतिनियुक्ति एवं 75% पदोन्नति करने को भी संघ ने आपत्तिजनक बताया है। इसके अतिरिक्त अपर संचालक पदों को राज्य प्रशासनिक सेवा में परिवर्तित करना तथा कई उच्च पदों पर सीधी भर्ती लागू करना विभागीय पदोन्नति अवसरों को सीमित करने जैसा निर्णय बताया गया है।
संघ ने यह भी कहा कि डाइट बाइट बीटीआई सहित उपसंचालक स्तर के 27 पदों को पूर्व में 100% पदोन्नति से भरा जाता था, जिसे बदलकर 50% पदोन्नति एवं 50% सीधी भर्ती कर दिया गया है, जो विभागीय कर्मचारियों के हितों के विरुद्ध है।जिला अध्यक्ष उपेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि वर्तमान राजपत्र शिक्षक एल.बी. संवर्ग के भविष्य पर सीधा प्रहार है। उन्होंने कहा कि वर्षों से शिक्षक एल बी संवर्ग न्याय की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार केवल आश्वासन देती रही है। यदि शिक्षकों के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास जारी रहा तो शिक्षक समाज सड़क से लेकर शासन स्तर तक निर्णायक संघर्ष करने को बाध्य होगा।प्रांतीय पदाधिकारी कमलेश मेहता ने कहा कि ट्राइबल संवर्ग के साथ अवसरों में असमानता प्रशासनिक संतुलन और नीति न्याय दोनों के खिलाफ है। संविलियन के बाद भी यदि समान अवसर नहीं मिलते तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज अब प्रतीक्षा नहीं करेगा और आवश्यकता पड़ने पर प्रदेश स्तर पर संगठित आंदोलन किया जाएगा। जिले के समस्त ब्लॉक अध्यक्षों ने एक स्वर में कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जब शिक्षक हितों की बात आती है तो वर्षों तक प्रक्रिया चलती है, लेकिन जब अधिकार सीमित करने की बात आती है तो निर्णय तुरंत लागू कर दिए जाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तत्काल संशोधन नहीं किया तो शिक्षक संगठन चरणबद्ध आंदोलन, धरना, प्रदर्शन के लिए व्यापक की रणनीति पर काम करेगा।
शालेय शिक्षक संघ बलरामपुर-रामानुजगंज ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक एल.बी. संवर्ग अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस निर्णय चाहता है। संगठन ने सरकार से तत्काल संवाद स्थापित करने, राजपत्र में संशोधन करने और सभी संवर्गों के साथ न्यायसंगत व्यवस्था लागू करने की मांग की है। साथ ही संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि एल.बी. संवर्ग के साथ पक्षपातपूर्ण व्यवहार जारी रहा तो भविष्य में व्यापक आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी, क्योंकि शिक्षक समाज अपने हक और अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करने को बाध्य है।

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