अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक।। 16 फरवरी 2026
सरगुजा जिले के अंबिकापुर अनुविभाग में राष्ट्रीय राजमार्ग NH-343 की बदहाली, नाला निर्माण से किसानों की परेशानी, गंभीर जल संकट और अवैध प्लॉटिंग-ब्लास्टिंग की समस्याओं से तंग ग्रामीणों ने कड़ा रुख अपनाया है। ग्राम पंचायत रनपुर के पेट्रोल पंप पर 17 फरवरी को दोपहर 12 बजे चक्का जाम करने की घोषणा करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को ज्ञापन सौंपा है। 10 दिनों में समस्याओं का समाधान न होने पर प्रदेश स्तरीय उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
जर्जर सड़क से दुर्घटनाओं का खतरा
NH-343 की अंबिकापुर से रामानुजगंज मार्ग की स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है। जगह-जगह बड़े गड्ढे, धूल के गुबार और सड़क किनारे मिट्टी का ढेर दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। निर्माण कार्य के दौरान उड़ने वाली धूल से राहगीरों व वाहन चालकों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है, खासकर मोड़ों पर मिट्टी डंपिंग से दृश्यता कम हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग सुस्त है, जिससे यात्रा जानलेवा बन गई है।
नाला निर्माण से 100 किसान प्रभावित
अंबिकापुर आउटर रिंग रोड पर रजपुरी के आगे नाले का निर्माण किसानों की सिंचाई को बाधित कर रहा है। लगभग 100 किसानों की कृषि भूमि पर जल निकासी प्रभावित हो गई है। ज्ञापन में मांग की गई है कि नाला निर्माण स्थल को तत्काल आगे उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित किया जाए तथा निकासी के लिए तीन-चार पाइप लगाए जाएं। इससे फसलें सुरक्षित रहेंगी और किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाव होगा।
जल जीवन मिशन के बाद भी सूखा
रानपुर, राजपुर, असोला व देवगढ़ ग्राम पंचायतों में जल संकट चरम पर है। जल जीवन मिशन के कार्य पूर्ण होने के बावजूद बोरवेल की कमी से ग्रामीण परेशान हैं। किसानों को सिंचाई के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जबकि गर्मी बढ़ने से पीने के पानी की भी किल्लत हो रही है। स्थानीय निवासियों ने पर्याप्त बोरवेल स्थापित करने की मांग उठाई है, अन्यथा आंदोलन तेज होगा।
अवैध प्लॉटिंग-ब्लास्टिंग से घरों पर संकट
क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग और चट्टानी इलाकों में ब्लास्टिंग से ग्रामीणों के घरों में दरारें पड़ रही हैं। पत्थर तोड़ने के धमाकों से भूकंप जैसे झटके महसूस हो रहे हैं, जिससे संपत्ति क्षति व जानमाल का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने तत्काल कार्रवाई की मांग की है, अन्यथा प्रशासन जिम्मेदार ठहराया जाएगा। यह मुद्दा स्थानीय सुरक्षा के लिए सबसे संवेदनशील है।
ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि 10 दिनों के भीतर सभी मांगें पूरी न होने पर ग्रामीण सड़क जाम के बाद प्रदेशव्यापी आंदोलन को मजबूर होंगे। शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा, प्रशासन की लापरवाही से ग्रामीण जीवन दांव पर है, अब चुप्पी तोड़ने का समय आ गया है। स्थानीय लोग प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की अपेक्षा कर रहे हैं। यह आंदोलन सरगुजा के विकास मॉडल पर सवाल खड़े करता है।

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