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22 लाख क्विंटल धान डकार क्यों कर रहे हैं चूहों को बदनाम... विधान सभा में गरमाया मुद्दा, विपक्ष ने कसा तंज.. मचा हंगामा, सभी कांग्रेस विधायक निलंबित

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रायपुर।। खबरी गुल्लक।। 11 मार्च 2026

 छत्तीसगढ़ विधानसभा में चूहों द्वारा लाखों क्विंटल धान खा जाने के हवाले से करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार का मामला गरम हो गया। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाकर सदन की कार्यवाही रोकने की मांग की, जिससे सदन में जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए चूहों को बदनाम करने का तंज कसा और सवाल उठाया कि आखिर 22 लाख 71 हजार क्विंटल धान चूहे कैसे खा सकते हैं। आसंदी ने स्थगन प्रस्ताव नामंजूर कर दिया, जिसके बाद भड़के कांग्रेस विधायकों ने गर्भगृह में नारेबाजी की और वेल में उतर आए। नाराज स्पीकर ने सभी कांग्रेस विधायकों को सदन से निलंबित कर दिया।

यह घटना खरीफ वर्ष 2024-25 के धान उपार्जन और उसके निराकरण से जुड़ी है। विपक्ष का दावा है कि राज्य में संग्रहित धान का भारी हिस्सा चूहों के नाम पर गायब हो गया, जबकि वास्तव में यह कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा बाजार में बेच दिया गया। कांग्रेस विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों से धान की कमी और घपलेबाजी के उदाहरण पेश किए। उन्होंने कहा कि किसानों से उपार्जित धान के गोदामों में चूहों की भारी भरकम संख्या का दावा अवास्तविक है। एक विधायक ने तंज कसते हुए पूछा, क्या चूहे अब ट्रक भरकर धान ले जाते हैं? विपक्ष ने मांग की कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

हंगामे के बीच खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने सरकार की ओर से विस्तृत वक्तव्य दिया। उन्होंने चूहों द्वारा धान खाने और कर्मचारियों द्वारा बिक्री के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। मंत्री ने आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया कि कुल उपार्जित 149.25 लाख टन धान में से 128.62 लाख टन का कस्टम मिलिंग के लिए उठाव हो चुका है। शेष 18.36 लाख टन धान का ऑनलाइन नीलामी के माध्यम से निराकरण किया गया है। वर्तमान में संग्रहण केंद्रों में मात्र 1.60 लाख टन और उपार्जन केंद्रों में 67 हजार टन धान बचा है, जो कुल खरीदी का 3 प्रतिशत से भी कम है।

मंत्री ने आगे बताया कि भारत सरकार द्वारा धान निराकरण की समय सीमा 30 अप्रैल 2026 तक है। एफसीआई के लक्ष्य 62.28 लाख टन के मुकाबले 54.56 लाख टन चावल का उपार्जन हो चुका है, जबकि नागरिक आपूर्ति निगम में 25.43 लाख टन के विरुद्ध 25.28 लाख टन चावल मिल चुका है। कुल शेष चावल उपार्जन मात्र 7.87 लाख टन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि खरीफ 2024-25 का धान निराकरण कार्य पूरा होने के बाद ही वास्तविक सूखत या घाटे की सटीक जानकारी सामने आएगी। सरकार का दावा है कि कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ और सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी रही हैं।

विपक्ष ने मंत्री के वक्तव्य को असंतोषजनक बताते हुए बहिष्कार की चेतावनी दी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी की, चूहों का बहाना अब नहीं चलेगा। किसानों का धान कहां गया? इस घटना ने राज्य की खाद्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निलंबित विधायकों ने सदन के बाहर धरना देने का ऐलान किया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह मुद्दा आगामी चुनावों तक गरमाता रहेगा। सरकार ने जांच का भरोसा दिलाया है, लेकिन विपक्ष संतुष्ट नहीं। 


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