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छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती: शासन इन युवाओं की पीड़ा को समझेगा? या कोर्ट के चक्कर में एक पूरी पीढ़ी बर्बाद हो जाएगी .!..चयनित अभ्यर्थियों ने सीएम को ज्ञापन सौंप की भावुक अपील....

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अंबिकापुर।।रायपुर।। खबरी गुल्लक ।।

सालों की कड़ी मेहनत, प्रारंभिक परीक्षा से लेकर शारीरिक दक्षता और साक्षात्कार तक हर इम्तिहान में कामयाबी हासिल करने वाले छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती के चयनित अभ्यर्थी आज मानसिक तनाव और आर्थिक बदहाली के गर्त में डूबे हुए हैं। अंतिम चयन सूची जारी होने के बावजूद उच्च न्यायालय में लंबित मामलों की वजह से उनकी नियुक्ति रुकी पड़ी है। उम्र का अंतिम कोटा बीतता जा रहा है, लेकिन शासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। चयनित युवाओं ने अब मुख्यमंत्री को सीधे पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।


ये अभ्यर्थी न सिर्फ पुलिस की वर्दी पहनने का सपना देख रहे थे, बल्कि अपने परिवारों का भविष्य संवारने की उम्मीद भी। एक चयनित अभ्यर्थी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, तीन-चार साल की मेहनत के बाद चयन सूची में नाम आया, लेकिन कोर्ट  केस ने सब छीन लिया। घर का एकमात्र कमाने वाला मैं हूं। मां- बाप बीमार हैं, बहन की शादी लटकी है। रोज रोटी के जुगाड़ में भटकते हैं। नींद नहीं आती, डिप्रेशन ने घेर लिया है। उनकी आशंका यही है कि देरी से न सिर्फ अवसर हाथ से निकल जाएगा, बल्कि अन्य भर्तियों के लिए भी अयोग्य हो जाएंगे। आर्थिक संकट इतना गहरा है कि कईयों ने कर्ज ले लिया, कुछ तो मजबूरी में मजदूरी करने लगे हैं।

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में अभ्यर्थियों ने अपनी वेदना खुलकर बयां की है। उन्होंने कहा है कि सभी चरण सफलतापूर्वक पास करने के बावजूद नियुक्ति न मिलने से वे भारी मानसिक तनाव और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। पत्र में दो प्रमुख मांगें उठाई गईं- पहला, आगामी सुनवाई में शासन का पक्ष मजबूती से रखने के लिए महाधिवक्ता को निर्देश दें। दूसरा, कोर्ट में त्वरित सुनवाई का आवेदन दाखिल कर मामले का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करें। हम आपके राज्य के युवा हैं, पुलिस विभाग में सेवा देने को बेताब हैं। कृपया हमारे भविष्य और परिवारों की स्थिति पर विचार करें, पत्र में भावुक अपील की गई है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि शासन की लापरवाही से युवाओं का भविष्य अधर में लटका है। पूर्व में भी ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। 

अभ्यर्थी सवाल उठा रहे हैं

क्या शासन इन युवाओं की पीड़ा को समझेगा? या कोर्ट के चक्कर में एक पूरी पीढ़ी बर्बाद हो जाएगी? विभागीय सूत्र बताते हैं कि नियुक्ति पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री कार्यालय से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इन युवाओं की गुहार अब मुख्यमंत्री के दरवाजे पर है। क्या छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव सरकार उनकी आवाज सुनेगी?



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