अयोध्या।। खबरी गुल्लक।।
चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष के पावन पर्व पर भव्य श्रीराम मंदिर एक बार फिर आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो गया। अभिजीत मुहूर्त में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंदिर के दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र की विधिवत स्थापना की। उन्होंने स्वयं प्रथम आरती उतारी, जिससे पूरा परिसर जय श्रीराम के उद्घोष, शंखध्वनि, घंटों की गूंज और मंगल गान से प्रतिध्वनित हो उठा। इस दिव्य क्षण के साक्षी करीब सात हजार भक्त बने। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
भगवान श्रीराम मंदिर जो जन्मभूमि पर निर्मित होकर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है, यह मंदिर अपनी भव्यता में और समृद्ध हो गया। राष्ट्रपति मुर्मू ने स्थापना के बाद कहा कि यह यंत्र भगवान राम की दिव्य शक्ति का प्रतीक है, जो समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगा। उनके हाथों से हुई आरती ने वातावरण को दिव्यता से भर दिया।
श्रीराम यंत्र की अनूठी खासियतें
यह यंत्र अपनी भव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए विख्यात है। तीन फीट चौड़ा और चार फीट लंबा यह तांबे का निर्मित यंत्र करीब 150 किलोग्राम वजनी है। सिंहासन के ऊपर स्वर्णिम अक्षरों में जय श्रीराम अंकित है, जो दर्शन करने वाले को रोमांचित कर देता है। यंत्र पर कुल 125 देवी-देवताओं के सूक्ष्म चित्र उत्कीर्ण हैं, जो वैदिक मंत्रों और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार तैयार किए गए हैं। इसे सकारात्मक ऊर्जा का भंडार माना जाता है, जो भक्तों को समृद्धि, शांति और प्रभु राम की कृपा प्रदान करेगा।
ज्योतिषियों के अनुसार, इस यंत्र की स्थापना से मंदिर का आध्यात्मिक केंद्र और मजबूत होगा। चैत्र नवरात्रि का यह समय विशेष फलदायी है, क्योंकि नवरात्र मां दुर्गा की आराधना और नववर्ष का प्रारंभ दोनों का संयोग है। अयोध्या में लाखों भक्तों ने इस अवसर पर मंदिर पहुंचकर दर्शन किए। सुरक्षा व्यवस्था अचूक रही हो और पूरा आयोजन राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या अब विश्व पटल पर रामराज्य का प्रतीक बनेगी। इस ऐतिहासिक पल ने देशभर के भक्तों में उत्साह भर दिया। सोशल मीडिया पर जय श्रीराम ट्रेंड कर रहा है, और दूर-दराज से भक्त पहुंच रहे हैं। श्रीराम यंत्र न केवल मंदिर की शोभा बढ़ाएगा, बल्कि आस्था की ज्योति को और प्रज्वलित करेगा।



