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ब्रेकिंग : स्वरंग किड्स एकेडमी पर जिला शिक्षा अधिकारी ने ठोका 1 लाख जुर्माना .. तत्काल संचालन बंद करने निर्देश.. स्थानीय भाषा बोलने के कारण बच्चे को प्रवेश न देने का मामला

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अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक ।। दिनांक 18 अप्रैल 2026  

जिला शिक्षा अधिकारी  सरगुजा दिनेश कुमार झा ने स्थानीय सरगुजिहा भाषा बोलने वाले चार वर्षीय मासूम बच्चे को निजी संस्था स्वरंग किड्स एकेडमी (पेशागी एजूकेशन सोसायटी), चोपड़ापारा अम्बिकापुर में प्रवेश न देने के मामले में गंभीर दंडात्मक कार्रवाई करते हुए संस्था पर 1,00,000 रुपये का जुर्माना आधारोपित किया है और आगामी आदेश तक इसके संचालन को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया है।  

जारी आदेश  में कहा गया है कि  निजी प्ले‑स्कूल स्वरंग किड्स एकेडमी ने एक चार वर्षीय बच्चे का एडमिशन इस आधार पर रोक दिया कि वह अभी केवल स्थानीय सरगुजिहा बोली में बात करता है, जिसे शिक्षक समझ नहीं पा रहे; इसलिए उसे प्रवेश नहीं दिया जा सकता, ऐसा संस्था प्रबंधन द्वारा बच्चे के पिता से कहा गया।  संस्था की ओर से यह भी कहा गया कि यहां वैसे महंगे–सुविधायुक्त माहौल में पढ़ने वाले बड़े घरों के बच्चे हिंदी में बात करते हैं और वे आपके बच्चे से सरगुजिहा सीख जाएंगे, जिससे स्कूल की भाषाई संस्कृति प्रभावित होगी। 

जांच के दौरान यह पाया गया कि स्वरंग किड्स एकेडमी बिना शासन से संबंधित जरूरी मान्यता लिए ही संचालित हो रहा था, जो शिक्षा विभाग के नियमों के खिलाफ था। 

जिला शिक्षा अधिकारी ने इस कार्य को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के खंड 18 (5) का स्पष्ट उल्लंघन बताते हुए 1 लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया और आगामी आदेश तक संस्था का संचालन तत्काल स्थगित कर दिया। 

श्रीमती रूमी घोष, वरिष्ठ प्राचार्य, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय केदारपुर, अम्बिकापुर की अध्यक्षता में गठित जांच दल ने न केवल समाचार में बताई गई घटना की पुष्टि की, बल्कि यह भी साफ किया कि संस्था बिना विभागीय मान्यता के चल रही थी, जिस पर दल ने लिखित रिपोर्ट जमा की।

इस तरह के भाषाई भेदभाव को नवीन शिक्षा नीति 2020 और छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग के प्रावधानों के सर्वथा विपरीत बताया गया, जिसमें स्थानीय भाषाओं को प्रोत्साहन देने की बजाय उन्हें बाधा के रूप में लेना अनुचित घोषित हुआ। 

अधिरोपित 1,00,000 रुपये का जुर्माना शासन कोष में बैंक चालान द्वारा जमा करते हुए चालान की प्रति जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत करना अनिवार्य निर्देशित किया गया है।  इस आदेश की प्रतिलिपि निज सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग, रायपुर को सूचनार्थ भेजी गई है, जिससे राज्य स्तर पर भी इस तरह के भेदभाव के मामलों पर नजर रखी जा सके। जिला प्रशासन ने इस मामले में साफ तौर पर सिद्ध किया है कि किसी भी बालक को उसकी स्थानीय बोली या भाषा के आधार पर शिक्षा से वंचित करना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह निजी पूर्व‑प्राथमिक, प्रायमरी या उच्चकक्षाओं का विद्यालय हो। 


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