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अंबिकापुर के रिंग बांध के विक्रेता पर वास्तविक मालिक से संबंध नहीं... वरिष्ठ पार्षद आलोक दुबे ने लगाया गंभीर आरोप..! कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

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अंबिकापुर।।खबरी गुल्लक ।। 

अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक महत्वपूर्ण जल क्षेत्र रिंग बांध को पाटकर किए जा रहे कथित अवैध प्लाटिंग के प्रयास के खिलाफ वरिष्ठ पार्षद आलोक दुबे ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कलेक्टर सरगुजा अजीत बसंत को ज्ञापन सौंपकर सुझाए गए सभी बिंदुओं पर सूक्ष्म जांच  और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। 

तालाब की जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप

पार्षद आलोक दुबे ने शिकायत में उल्लेख किया है कि नगर निगम के प्रतीक्षा बस स्टैंड के निकट स्थित राजस्व निरीक्षक मंडल क्र. 4, पटवारी हल्का नंबर 15, खसरा नंबर 3714 (रकबा 0.25 हेक्टेयर) की भूमि वास्तव में जल क्षेत्र है। आरोप है कि इस जमीन को नियम विरुद्ध तरीके से पाटकर प्लाटिंग की तैयारी की जा रही है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह भूमि अंबिकापुर नगर निगम के मास्टर प्लान 2021 की सूची में दर्ज तालाबों में से एक है 

नियमों की अनदेखी और गंभीर सवाल

 शिकायत के अनुसार, तत्कालीन हल्का पटवारी ने अपने प्रतिवेदन में स्पष्ट किया था कि जल भराव के कारण उक्त भूमि का सीमांकन और चौहद्दी बताना संभव नहीं है, इसके बावजूद बिना सीमांकन के इसका पंजीयन करा लिया गया।

अतीत का साक्ष्य

 वर्ष 2002 में तत्कालीन नगरपालिका अध्यक्ष कमला त्रिपाठी द्वारा इसी स्थान पर छठ घाट का भूमि पूजन किया गया था, जो इस जमीन के जल क्षेत्र होने का प्रमाण है।

अवैध खरीद-फरोख्त

 पार्षद ने आरोप लगाया है कि जमीन बेचने वाले पक्ष का वास्तविक मालिक से कोई वैध संबंध नहीं है, जिसकी गहन जांच आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला

वरिष्ठ पार्षद आलोक दुबे ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णयों, जैसे जितेंद्र सिंह बनाम मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरमेंट' (2019) और हिंचलाल तिवारी बनाम कमला देवी का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी जल क्षेत्र के स्वरूप को बदला नहीं जा सकता। ये निर्णय स्पष्ट करते हैं कि तालाबों का उपयोग आम जनता के निस्तार के लिए ही होना चाहिए 


प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

पार्षद आलोक दुबे ने कलेक्टर से मांग की है कि उक्त भूमि पर डाली गई मिट्टी को तत्काल हटवाया जाए और इसे इसके मूल जल क्षेत्र के रूप में बहाल किया जाए। क्षेत्र के गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए इस तालाब को संरक्षित करना अनिवार्य है। उल्लेखनीय है कि अंबिकापुर में हाल ही में अन्य जल निकायों पर अतिक्रमण के मामलों में नगर निगम द्वारा नोटिस जारी कर सख्त रुख अपनाया गया है, जिसके चलते इस मामले में भी प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है 


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