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छत्तीसगढ़ में लू की चेतावनी के बीच सुशासन तिहार, कर्मियों के सेहत से खिलवाड़.. बच्चों की छुट्टी की खुशी मायूसी में बदली! ..आनलाइन आवेदन या ठंड के मौसम में सुझाव

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अंबिकापुर।।खबरी गुल्लक ।।28 अप्रैल 2026।।

छत्तीसगढ़ में मई-जून की तपिश भरी गर्मी और लू की चेतावनी के बीच राज्य सरकार द्वारा घोषित सुशासन तिहार ने शासकीय कर्मचारियों, उनके बच्चों और ग्रामीणों में  असंतोष पैदा कर दिया है। 1 मई से 10 जून तक ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में लगने वाले इन शिविरों की तैयारी जोरों पर है, लेकिन भीषण गर्मी के कारण सभी वर्गों की चिंताएं बढ़ गई हैं। कर्मचारी संगठन इसे सेहत के लिए खतरा बता रहे हैं, जबकि ग्रामीण घंटों धूप में इंतजार करने को मजबूर  हैं। वहीं कर्मचारियों के बच्चे ग्रीष्मावकाश में परिवार के साथ घूमने की अधूरी इच्छा से निराश हैं।

शासकीय कर्मचारियों की चिंता सबसे गहरी है। अंबिकापुर जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि काम करने से कोई परहेज नहीं है लेकिन 41-42 डिग्री की गर्मी और लू में घंटों खड़े रहना जानलेवा है। पिछले साल कई सहकर्मी ड्यूटी के दौरान बीमार हो गए थे। सुशासन तिहार अच्छी पहल है, लेकिन इसे ठंडे मौसम में शिफ्ट किया जाना चाहिए। कर्मचारी संगठन के एक नेता ने बताया कि शीतकालीन अवकाश में विधानसभा सत्र के कारण छुट्टी नहीं मिलती, अब ग्रीष्मावकाश में भी विशेष ड्यूटी। यह शोषण है। हम सरकार से मांग करते हैं कि तापमान 40 डिग्री से ऊपर होने पर शिविर स्थगित किए जाएं। कर्मचारियों ने संगठन के माध्यम से  स्वास्थ्य सुविधाओं और वैकल्पिक ऑनलाइन हेल्प डेस्क का सुझाव रखा है।

बच्चे फिर  हुए मायूस

कर्मचारियों के बच्चों की मायूसी भी कम नहीं है। ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान वे परिवार के साथ हिल स्टेशन या समुद्र तट ,नाना नानी के घर  घूमने की योजना बनाते हैं, लेकिन माता-पिता की ड्यूटी के कारण यह सपना टूट जाता है। अंबिकापुर के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले 14 वर्षीय रोहन  ने कहा कि पापा कलेक्टर कार्यालय में हैं। साल भर पढ़ाई के बाद छुट्टियां मिलती हैं, लेकिन वे शिविर में व्यस्त रहते हैं। हम घर पर ही बंद रह जाते हैं। सरकार को हमारी भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए। इसी तरह, एक अन्य छात्रा प्रिया ने बताया मम्मी पटवारी हैं। पिछले दो साल से गर्मी की छुट्टी में कहीं घूमने नहीं गए। हम अकेले रह जाते हैं। कम से कम आधे स्टाफ को रोटेशन के हिसाब से छुट्टी दी जानी चाहिए। अभिभावकों  ने कहा कि बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। सरकार डिजिटल सुशासन तिहार शुरू करे, ताकि परिवार समय साथ बिता सकें।

ग्रामीण भी होते हैं हालाकान 

 ग्रामीण इलाकों में शिविरों में मंत्रियों व अधिकारियों के इंतजार में लोग घंटों धूप में पसीना बहाते हैं। एक ग्राम पंचायत के सरपंच  ने कहा कि भीड़ बढ़ाने के लिए हमें सुबह 10 बजे से बिठा दिया जाता है। दोपहर तक इंतजार, तबीयत खराब हो जाती है। कई बुजुर्ग लू लगने से बीमार पड़ते हैं। शिविर शाम को या छांव में लगाएं। एक किसान  ने शिकायत की मुख्यमंत्री आते हैं, घोषणाएं होती हैं, लेकिन गर्मी में हमारा नुकसान होता है। समस्या ऐप पर हल हो सकती है। ग्रामीण महिला मंडल की सदस्य राधा ने बताया कि महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित। पानी की कमी और धूप से बीमारी के मामले बढ़ते हैं। ठंड में ही तिहार हो।

गांव गली पहुंचेगी सरकार

 कलेक्टर कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा कि सुशासन तिहार जनता की समस्याओं का त्वरित निस्तारण करता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित मंत्री गांव- गली पहुंचेंगे। स्वास्थ्यकर्मी और पानी की व्यवस्था रहेगी। तिथिवार कार्यक्रम जारी हो चुका है।  मौसम विभाग ने 1 मई से लू की चेतावनी जारी की है, जिससे आशंकाएं और गहरी हो गई हैं।

जेहन में अभी भी यह सवाल

 सुशासन तिहार की मंशा सराहनीय है, लेकिन समयबद्धता पर सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारी, बच्चे और ग्रामीण एक स्वर में कह रहे हैं गर्मी में नहीं, ठंड में ही यह  जनसेवा हो। सरकार यदि इन रायों को नजरअंदाज करेगी तो संबंधितों में निराशा होगी।  क्या  सरकार मौसम के अनुकूल बदलाव करेगी? यह सवाल अब भी हर कर्मचारी वर्ग और उनके परिवार के साथ ग्रामीणों के जेहन में है।



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