अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक।। 10 अप्रैल 2026
सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित मॉन्ट फोर्ड विद्यालय पर जिला शिक्षा अधिकारी सरगुजा दिनेश झा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। स्कूल प्रबंधन पर अभिभावकों को निश्चित दुकानों से महंगी किताबें- कॉपियां बंडल में खरीदने के लिए मजबूर करने, फीस अवैध रूप से बढ़ाने और सीबीएसई नियमों का उल्लंघन करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इस सत्र में 2070 छात्रों से वसूली गई कुल फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है।
आज गुरुवार को लगभग सुबह 10:15 बजे DEO और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ने स्कूल का अचानक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान शिक्षक- पालक बैठक चल रही थी, जिसमें अभिभावकों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। DEO के पत्र क्रमांक 5051/शिकायत अशा.वि./2025-26 में विस्तार से उल्लेख है कि कक्षा 1 से 8वीं तक की सभी किताबें व कॉपियां आशा बुक डिपो और राणा ब्रदर्स से बंडल बनाकर ही खरीदने को कहा गया। अभिभावकों को मोबाइल मैसेज के जरिए इन दुकानों से ही सामग्री लेने का दबाव बनाया गया। एक अभिभावक ने बताया कि स्कूल ने किताबों की सूची दी और निर्देश दिया कि कहां से लेना है। बंडल पूरा न होने पर या एक-दो किताबें कम होने पर भी स्वीकार नहीं किया गया।
निरीक्षण में सीबीएसई एफिलिएशन बायलॉज 2018 के क्लॉज 2.4.7 का स्पष्ट उल्लंघन पाया गया। नर्सरी से 8वीं तक केवल निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें पढ़ाई जा रही हैं, जबकि 9वीं से 12वीं में भी कुछ ऐसी ही महंगी किताबें अनिवार्य हैं। हर साल एडमिशन फीस वसूली जा रही है, जो शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत निषिद्ध है। शिक्षा सत्र 2025-26 की तुलना में 2026- 27 में सभी मदों में 5 से 14 प्रतिशत तक फीस बढ़ाई गई। स्कूल के सूचना पटल पर यूनिफॉर्म व किताबों की सूची भी प्रदर्शित नहीं है।
DEO ने संदर्भ में कलेक्टर सरगुजा की 24 नवंबर 2025 की बैठक, पत्र क्रमांक 2041 (11 फरवरी 2026), 4497 (1 अप्रैल 2026) और अघोषित सक्रिय विद्यालयों की 7 अप्रैल 2026 की बैठक का हवाला दिया। पत्र में कहा गया है कि प्रबंधन ने अभिभावकों पर प्रत्यक्ष दबाव डाला, जो सभी निर्देशों का उल्लंघन है।
प्राचार्य/प्रबंधक को पत्र मिलने के 2 दिनों के अंदर जवाब देने का निर्देश दिया गया है। DEO ने कार्रवाई की तैयारी जताई। अभिभावक संगठनों ने इसे स्वागतयोग्य कदम बताया है। एक अभिभावक ने कहा कि यह लूट बंद होनी चाहिए। स्कूल प्रबंधन को सजा मिले। DEO कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, आगे की जांच जारी रहेगी। यह मामला सीबीएसई नियमों के पालन और निजी स्कूलों की मनमानी पर सवाल खड़े करता है।



