अंबिकापुर/मैनपाट।। खबरी गुल्लक।। 02 मई 2026
सरगुजा जिले के मैनपाट विकासखंड में जंगली हाथियों का आतंक बढ़ता जा रहा है। आज ग्राम कंडराजा के प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला में जंगली हाथियों ने धावा बोलकर स्कूल के चावल, टेबल, कुर्सी, खिड़की ग्रील सहित अन्य शासकीय सामान को नुकसान पहुंचाते हुए राशन चट कर दिया। वहीं, ग्राम चोरकीपानी में दो घरों को नेस्तनाबूद कर फसलों को भी नुकसान पहुंचाया। इन घटनाओं से ग्रामीणों में दहशत फैल गई है। खबरी गुल्लक के मैनपाट संवाददाता महेश यादव ने खतरे के बीच ग्राउंड जीरो रिपोर्टिंग करते हुए प्रभावितों की दशा देखी, उन्होंने बताया कि रातभर जागकर पहरेदारी करने को मजबूर ग्रामीण हाथियों की दहशत में जी रहे हैं। वन विभाग ने क्षति का आंकलन शुरू कर दिया है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की समझाइश दे रहा है। एसडीओ वन सपना मुखर्जी और रेंजर प्रशांत ने बताया कि हाथियों की निगरानी की जा रही है, ताकि मानवीय क्षति रोकी जा सके।
हाथी समस्या का विकराल रूप
मैनपाट क्षेत्र में जंगली हाथियों की समस्या चरम पर पहुंच रही है। कभी मैनपाट के जंगलों में तो कभी पड़ोसी रायगढ़ जिले के कापू रेंज में विचरण करने वाले ये हाथी भोजन की तलाश में मानव बस्तियों में घुस रहे हैं। वन विभाग के अनुसार 14 हाथी दो अलग- अलग दलों में बंटकर लगातार मूवमेंट कर रहे हैं। ये दल रात के अंधेरे में सक्रिय हो जाते हैं, जिससे ग्रामीणों को भनक तक नहीं लग पाती। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में वर्षा ऋतु के बाद चारा -पानी की कमी और मानवीय गतिविधियों के कारण हाथी बस्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। सरगुजा जैसे वन- समृद्ध जिलों में यह समस्या पुरानी है, लेकिन इस बार हाथियों की संख्या और उनकी सक्रियता ने हालात फिर से बिगाड़ दिए हैं। मैनपाट के घने जंगलों से सटे गांवों में रहने वाले ग्रामीण अब अपनी जानमाल की रक्षा के लिए चिंतित हैं।
भारी क्षति: स्कूल से घर तक तबाही
आज की घटनाओं ने क्षति का नया आयाम जोड़ा है। कंडराजा ग्राम के प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला में हाथियों ने घुसकर भंडारित चावल को चट कर लिया। टेबल- कुर्सियां तोड़ डालीं, खिड़की ग्रील उखाड़ फेंकीं और अन्य शासकीय सामान को चूर- चूर कर दिया। स्कूल प्रबंधन ने बताया कि इससे बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। स्कूल को अस्थायी रूप से बंद रखा गया है। दूसरी ओर चोरकीपानी गांव में दो घरों पर हाथियों ने हमला बोल दिया। दीवारें ढहा दीं, छतें उजाड़ दीं और आसपास की फसलें चौपट कर दीं। प्रारंभिक आंकलन में बड़ी क्षति बताई जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि हाथी इतने उग्र थे कि वे घरों के अंदर घुस आए और सामान को इधर- उधर फेंकते रहे। यह केवल आज की घटना नहीं, बल्कि पिछले कई वर्षों से हाथी लगातार उत्पात मचा रहे हैं। प्रभावित परिवार आशियाना उजड़ने से खुले आसमान तले रात गुजारने को मजबूर हो गए हैं।
भय और कौतूहल का माहौल
हाथियों के आतंक से ग्रामीणों की जिंदगी नर्क बनी हुई है। चोरकीपानी के रामू राम ने बताया कि रात को सोते ही नहीं हैं डर लगता है कि कहीं हाथी आ जाएं। बच्चे-बुजुर्ग भयभीत हैं। कंडराजा की महिला लक्ष्मी कहती हैं कि फसलें भी बर्बाद हो रही हैं घर टूट गए। अब क्या करेंगे? ग्रामीण रतजगा करने को मजबूर हैं। महिलाएं और बच्चे घरों में कैद- से रहते हैं। आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक आघात भी गहरा लग रहा है। कौतूहल का माहौल है कि हाथी कब जाएंगे।
वन विभाग की सक्रिय पहल
वन विभाग ने हाथी समस्या से निपटने के लिए कमर कस ली है। एसडीओ वन सपना मुखर्जी ने बताया कि हमारी टीम 24 घंटे हाथियों की निगरानी कर रही है। ट्रैकिंग से उनके मूवमेंट का पता लगाया जा रहा है। रेंजर प्रशांत ने कहा कि ग्रामीणों को हाथियों से दूरी बनाए रखने की समझाइश दी जा रही है। हम क्षति का आंकलन कर रहे हैं और प्रभावितों को मुआवजा दिलवाएंगे। विभाग ने ग्रामीणों को सलाह दी है कि रात में घरों के बाहर न निकले, हाथियों के नजदीक न जाएं, बच्चों को अकेला न छोड़ें। मैनपाट और कापू रेंज में वन अमला तैनात है, जो ग्रामीणों को सतर्क करता रहता है। विभाग हाथियों को जंगल की ओर मोड़ने के लिए ड्राइव भी चला रहा है। सपना मुखर्जी ने आश्वासन दिया कि स्थिति नियंत्रण में है और कोई बड़ा हादसा नहीं होने दिया जाएगा। वन विभाग की पहल सराहनीय है, लेकिन ग्रामीणों की परेशानी कम करने के लिए दीर्घकालिक उपाय जरूरी हैं।



