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भ्रष्टाचारियों के लिए चारागाह बना मैनपाट.. पीएम जनमन योजना में बंदरबांट, नई सड़कें हाथ से उखड़ रही

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अम्बिकापुर/ मैनपाट।। खबरी गुल्लक । 6 मई 2026 

 छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र में प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान के तहत बनी करोड़ों रुपये की सड़क मात्र एक वर्ष के भीतर ही उखड़ने लगी है। कद्रनई से लोटा भवना  तक 2.50 किलोमीटर लंबी यह सड़क  जनमन योजना के अंतर्गत ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित थी। अनुमानित निर्माण राशि 205.74 लाख रुपये तथा पांच वर्ष के संधारण के लिए 19 लाख रुपये खर्च होने थे। लेकिन अब सड़क की ऊपरी परतें इतनी घटिया हो चुकी हैं कि ग्रामीण स्वयं हाथों से उन्हें उखाड़ रहे हैं। पहाड़ी कोरवा और माझी जनजाति बाहुल्य इस PVTG विशेष रूप से संरक्षित जनजाति समूह बस्ती में शासकीय धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए वनवासियों में व्यापक आक्रोश है। खबरी गुल्लक के मैनपाट संवाददाता महेश यादव ने ब्लॉक मुख्यालय से लगभग 20 किमी दूर इस मार्ग में पहुंच अवलोकन किया और स्वयं सड़क की गुणवत्ता परखते हुए वनवासियों से बातचीत भी की । महेश यादव ने बताया कि 

प्रोजेक्ट के कागजातों के अनुसार, कार्य का शिलान्यास 6 मार्च 2024 को हुआ था और निर्माण पूर्णता की संभावित तिथि 21 मार्च 2025 थी। उसके बाद संधारण कार्य 22 मार्च 2025 से 21 मार्च 2030 तक निर्धारित था। ठेकेदार का नाम एम/एस सुनील कुमार अग्रवाल, रायगढ़ (छ.ग.) अंकित है, जबकि कार्य निष्पादन कार्यपालन अभियंता 100-01 अम्बिकापुर जिला सरगुजा के जिम्मे था। कुल जनसंख्या वाले लोटा भावना बसाहट में रहने वाले निवासी अब इस सड़क की दुर्दशा से त्रस्त हैं। बारिश के बाद तो हालात और भी बदतर हो जाते हैं। 

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि सड़क बनने के बाद शुरू में कुछ उत्साह था, लेकिन छह माह के अंदर ही दरारें दिखने लगीं। हमने देखा कि ठेकेदार ने घटिया सामग्री इस्तेमाल किया। बेस नहीं बनाया गया। ऊपरी परत बिना ठीक से कॉम्पैक्ट किए डाली गई, जिससे अब यह आसानी से उखड़ जा रही है। मापदंडों की अवहेलना की गई। ग्रामीण कहते हैं हम खुद हाथ से परतें खोद रहे हैं ताकि जिम्मेदारों का ध्यान जाए। लोटा भावना के कोरवा समुदाय के रामू कोरवा, माझी बस्ती की महिलाएं भी शिकायत करती हैं कि  प्रधानमंत्री जी का यह अभियान आदिवासियों के उत्थान के लिए था, लेकिन यहां तो धन का बंदरबांट हो गया। गुणवत्ता की कोई परवाह नहीं की गई, उनकी आवाज में गुस्सा साफ झलकता है।

मैनपाट क्षेत्र सरगुजा जिले का एक दुर्गम वनाच्छादित पहाड़ी इलाका है, जहां पहाड़ी कोरवा और माझी जैसी PVTG जनजातियां भी बड़ी संख्या में निवास करती हैं। ये समुदाय अत्यंत संवेदनशील हैं और केंद्र सरकार के विशेष अभियान का लाभ इन्हें मिलना था। जनमन योजना के तहत बनाई गई यह सड़क इन बस्तियों को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली थी, जिससे आर्थिक-सामाजिक विकास को गति मिले। लेकिन घटिया निर्माण ने सबकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। ग्रामीणों ने कहा है मैनपाट क्षेत्र में जिस सड़क का भूमि पूजन स्थानीय भाजपा नेता,विधायक के द्वारा किया गया था उस सड़क की हालत 1 साल के भीतर ही दयनीय हो गई।  ठेकेदार सुनील कुमार अग्रवाल से संपर्क नहीं हो पाने से उनका पक्ष स्पष्ट नहीं लिया जा सका। कार्यपालन अभियंता अम्बिकापुर कार्यालय से भी कोई आधिकारिक बयान नहीं मिला। 

ग्रामीणों में रोष

यह घटना प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती है। सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल जिलों में ऐसी योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शी होना चाहिए। ग्रामीणों की मांग है कि ठेकेदार को काला सूचीबद्ध किया जाए, राशि का वसूली हो और सड़क का पुनर्निर्माण तत्काल कराया जाए। वनवासियों की निराशा अब आक्रोश में बदल रही है। यदि शीघ्र समाधान न हुआ तो बड़े आंदोलन की चिंगारी फूट सकती है।


✍️ विकास/ महेश - 99268- 49074 


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