अम्बिकापुर।खबरी गुल्लक
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड ने महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। छत्तीसगढ़ में टीबी मुक्त विकासखंड की दिशा में चयनित चार विकासखंडों में बतौली भी शामिल है। निर्धारित मानकों के आधार पर विकासखंड में किए गए कार्यों और उपलब्धियों का आकलन करने के लिए मूल्यांकन टीम बतौली पहुंचेगी। बतौली में टीबी उन्मूलन के लिए लगातार सक्रिय खोज अभियान, जोखिम वाले व्यक्तियों की स्क्रीनिंग, आवश्यकतानुसार छाती का एक्स-रे, बलगम की जांच तथा आधुनिक मॉलिक्यूलर जांच के माध्यम से संभावित मरीजों की शीघ्र पहचान पर जोर दिया जा रहा है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ पीएस मार्को,क्षय विभाग के जिला नोडल अधिकारी डॉ शैलेंद्र गुप्ता ने बताया कि टीबी मुक्त क्षेत्र की दिशा में एक महत्वपूर्ण सूचक प्रति 1,000 आबादी पर टीबी के नोटिफाइड मरीजों की संख्या 1 या उससे कम रखना है। इसके साथ केवल मरीजों की संख्या कम होना पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि समुदाय में पर्याप्त संख्या में संभावित टीबी मरीजों की खोज एवं जांच हो रही हो, ताकि बीमारी छिपी न रह जाए। इस उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव-गांव में हाई रिस्क आबादी की पहचान, घर-घर स्क्रीनिंग, लक्षण वाले व्यक्तियों का एक्स-रे एवं आवश्यकतानुसार बलगम/मॉलिक्यूलर जांच कराई जा रही है। टीबी की पुष्टि होने पर मरीज का तत्काल उपचार शुरू कर उसकी नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।
टीबी मुक्त क्षेत्र के मूल्यांकन में टीबी नोटिफिकेशन रेट के साथ उपचार सफलता, दवा प्रतिरोध की जांच, मरीजों का नियमित फॉलो-अप, पोषण सहायता तथा समुदाय की भागीदारी जैसे पहलुओं को भी महत्व दिया जाता है। टीबी मुक्त पंचायत के राष्ट्रीय संकेतकों में उपचार सफलता और Drug Susceptibility Testing के साथ पात्र मरीजों तक पोषण सहायता पहुंचाने पर भी जोर है। स्वास्थ्य विभाग का विशेष प्रयास है कि किसी भी संभावित मरीज की पहचान देर से न हो। लगातार दो सप्ताह या उससे अधिक खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात में पसीना आना, कमजोरी अथवा बलगम में खून आने जैसे लक्षण पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति की तत्काल टीबी जांच कराई जाए।
बतौली विकासखंड में टीबी मुक्त अभियान को जनभागीदारी से जोड़ते हुए पंचायत प्रतिनिधियों, मितानिनों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा स्थानीय समुदाय का सहयोग लिया जा रहा है। टीबी मरीजों के साथ भेदभाव न करने, उपचार पूरा कराने तथा परिवार और निकट संपर्क में रहने वाले व्यक्तियों की जांच पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। जिला स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य केवल आंकड़ों में टीबी मरीजों की संख्या कम दिखाना नहीं, बल्कि अधिक से अधिक संभावित मरीजों की जांच कर बीमारी की शीघ्र पहचान, पूर्ण उपचार और संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना है।
बतौली की उपलब्धि पूरे सरगुजा जिले के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सफल मूल्यांकन से जिले के अन्य विकासखंडों अम्बिकापुर, लखनपुर, लुण्ड्रा, उदयपुर, मैनपाट और सीतापुरमें भी टीबी उन्मूलन गतिविधियों को और गति देने में सहायता मिलेगी।
स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि टीबी के लक्षणों को छिपाएं नहीं और जांच से न डरें। टीबी की जांच एवं उपचार सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध है तथा समय पर पहचान और पूरा उपचार टीबी को हराने की सबसे प्रभावी रणनीति है।




