अंबिकापुर।खबरी गुल्लक
छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव परवेज आलम गांधी ने UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने की संभावित व्यवस्था को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि छोटे व्यापारी सवाल पूछ रहे हैं और अब मोदी सरकार को जवाब देना चाहिए कि डिजिटल इंडिया का लाभ आम व्यापारी को मिलेगा या उसकी कीमत भी वही चुकाएगा। केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर लगातार यह सवाल उठ रहा है कि सुविधाओं और राहत का लाभ बड़े कारोबारियों तक अधिक क्यों पहुंच रहा है, जबकि छोटे व्यापारी और मध्यम वर्ग बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं। परवेज गांधी ने कहा कि UPI ने देश में डिजिटल भुगतान को आसान और व्यापक बनाया है। करोड़ों उपभोक्ताओं के साथ लाखों छोटे दुकानदारों और व्यापारियों ने इसे अपने दैनिक कारोबार का हिस्सा बनाया है। ऐसे में बड़े मूल्य के चुनिंदा UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट जैसे शुल्क की व्यवस्था की चर्चा छोटे कारोबारियों के लिए चिंता का विषय है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था में शुल्क लगाने की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है और इसका वास्तविक भार किस पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि छोटे दुकानदार पहले से ही किराया, बिजली, परिवहन, कच्चे माल और अन्य कारोबारी खर्चों में वृद्धि का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में डिजिटल भुगतान से जुड़ी अतिरिक्त लागत उनके कारोबार पर और दबाव डाल सकती है। सरकार को आर्थिक दावों और नारों से आगे बढ़कर छोटे व्यापारियों की वास्तविक परिस्थितियों पर ध्यान देना चाहिए।
परवेज गांधी ने कहा कि यदि मोदी सरकार वास्तव में छोटे व्यापारियों के हित में काम करना चाहती है तो उनकी लागत बढ़ाने के बजाय उन्हें राहत देने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। भाजपा सरकार को स्पष्ट करना होगा कि उसकी आर्थिक नीतियों के केंद्र में आम व्यापारी है या बड़े कॉरपोरेट हित। उन्होंने कहा कि देश के छोटे दुकानदार और व्यापारी अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्हें ऐसी व्यवस्था चाहिए जिससे डिजिटल भुगतान और कारोबार करना आसान हो, न कि ऐसी व्यवस्था जिसमें धीरे-धीरे कारोबार की लागत बढ़ती जाए। कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार से मांग की कि UPI शुल्क से संबंधित प्रस्तावित व्यवस्था और उसके दायरे को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए। साथ ही छोटे व्यापारियों पर पड़ने वाले संभावित आर्थिक प्रभाव का आकलन कर ऐसा कोई प्रावधान लागू न किया जाए जिससे उनकी कारोबारी लागत बढ़े।




