अंबिकापुर।खबरी गुल्लक।
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में दो वर्ष पूर्व हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 8 अक्टूबर 2026 को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन दोषियों को मौत की सजा और एक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला 13 अक्टूबर 2024 की रात सूरजपुर कोतवाली में पदस्थ तत्कालीन प्रधान आरक्षक तालिब शेख की पत्नी और 11 वर्षीय बेटी की नृशंस हत्या से जुड़ा है, जिसने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी।
13 अक्टूबर 2024 की रात को सूरजपुर कोतवाली में पदस्थ प्रधान आरक्षक तालिब शेख की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की घर में घुसकर धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई थी। आरोपियों ने हत्या के बाद दोनों के शवों को निर्वस्त्र कर करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित खेत में फेंक दिया था, जो घटना की नृशंसता को दर्शाता है। जांच के दौरान मामले में दुष्कर्म की भी पुष्टि हुई थी, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो गया। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और पुलिस ने जांच के बाद मामले में 6 लोगों पर मुकदमा चलाया था। मुख्य आरोपी में आदतन बदमाश कुलदीप साहू और पूर्व एनएसयूआई जिलाध्यक्ष चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके शामिल थे।सूरजपुर की फास्ट ट्रैक अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान दो आरोपियों को पहले ही बरी कर दिया था, जबकि शेष चार आरोपियों के खिलाफ अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने उन्हें दोषी माना।
दोषी कुलदीप साहू फांसी, रिंकू उर्फ फूल सिंह फांसी, चंद्रकांत चौधरी (सीके) को फांसी की सजा और आर्यन उर्फ गोल्डी विश्वकर्मा को आजीवन कारावास की सजा दी गई।
यह मामला अपनी नृशंसता के कारण पूरे छत्तीसगढ़ में चर्चित रहा था। मुख्य आरोपी कुलदीप साहू एक आदतन अपराधी था, जिस पर पहले भी पुलिसकर्मियों पर वाहन चढ़ाने का मामला दर्ज था, जिसमें उसे 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई थी।[9][1 घटना के बाद आरोपी कुलदीप साहू को गिरफ्तार किया गया था और उसकी गिरफ्तारी के बाद इलाके में भारी बवाल मचा था, जिसमें भीड़ ने आरोपी के घर में आग लगा दी थी।
इस कांड के बाद सूरजपुर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को हटाकर प्रशांत ठाकुर को नया एसपी नियुक्त किया गया था, जो मामले की गंभीरता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को 20 लाख रुपये की राशि भी प्रदान की थी। फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल ने इस मामले की सुनवाई की और 29 सितंबर 2026 को चार आरोपियों को दोषी करार दिया था, जबकि दो आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था। पीड़ित पक्ष के वकील संजय अंबस्ट ने मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर (सबसे दुर्लभ में दुर्लभ) बताते हुए अधिकतम सजा की मांग की थी। यह फैसला छत्तीसगढ़ में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों के प्रति सख्त रवैया दर्शाता है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




