अंबिकापुर। सायबर ठगों के द्वारा लोगों को चूना लगाने के लिए तरह - तरह के पैंतरे आजमाए जा रहे हैं। चिंता की बात यह है कि लगातार घटना होने के बाद भी लोग फंस रहे हैं। अब सायबर ठगों के निशाने पर पेंशन धारक हैं, अथवा सेवानिवृत होने वाले कर्मचारी। इस तरह की घटना बढ़ने पर पुलिस के द्वारा लोगों को जागरूक करने सोशल मीडिया का उपयोग किया जा रहा है। पुलिस द्वारा लोगों को जागरूक करने सोशल मीडिया में डाले गए पोस्ट में बताया गया है कि आजकल साइबर आपराधियों द्वारा पेंशन धारकों को "जीवन प्रमाण पत्र " ऑनलाइन अपडेट करने के लिए कॉल किया जा रहा है, उनके पास पेंशन धारकों का पूरा डेटा जैसे नियुक्ति का दिनांक, सेवानिवृत्ति का दिनांक, पीपीओ नंबर (पेंशनभोगी भुगतान आदेश संख्या), आधार कार्ड संख्या, स्थायी पता, ईमेल आईडी, सेवानिवृत्ति पर प्राप्त राशि, मासिक पेंशन, नॉमिनी आदि की जानकारी होती है। वे उन्हें इस पूरे डेटा के साथ कॉल करते हैं, ताकि पेंशन धारक को यह विश्वास दिलाया जा सके कि वे पेंशन निदेशालय से हैं। वे पेंशन धारकों का पूरा डेटा बताते हुये उनका जीवन प्रमाण पत्र अपडेट करने हेतु ओटीपी साझा करने के लिए कहते हैं। एक बार जब पेंशन धारक फोन पर आये हुये ओटीपी को साझा कर देते हैं तो, जालसाजों को पेंशन धारक के बैंक खाते का डायरेक्ट एक्सेस कन्ट्रोल मिल जाता है। तत्पश्चात वे पेंशन धारक के खाते में जमा समस्त राशि को तुरन्त दुसरे 'फर्जी बैंक खातों' या 'वॉलेट' में स्थानांतरित कर देते हैं।
इसलिए जागरूक रहें, पेंशन निदेशालय' कभी भी किसी पेंशन धारक को उनका 'जीवन प्रमाण पत्र ऑनलाइन अपडेट करने के लिए कॉल नहीं करता है और न ही ऑनलाइन जीवन प्रमाण पत्र अपडेट करता है। यह पेंशन धारकों का कर्तव्य है कि वे अपने जीवन प्रमाण पत्र को व्यक्तिगत रूप से पेंशन निदेशालय में जाकर अपडेट करायें । इस तरह आने वाली फर्जी फोन से बचे व साइबर थाना, पुलिस को सूचित करें ।



