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स्थाई लोक अदालत ने नगर निगम आयुक्त को दिया अल्टीमेटम ... 90 दिन के भीतर बनाएं नाली ... निर्माण शुरू होने तक खुली नाली 15 दिन में ढकें... 15 दिन में परिपालन शुरू नही होने पर 50 हजार जुर्माना .... 90 दिन में निर्माण नही होने पर एक लाख और अगले तीन - तीन माह के अंतराल में एक - एक लाख रुपए देना होगा जुर्माना ....

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अंबिकापुर। संभाग मुख्यालय अंबिकापुर के जिला न्यायालय परिसर से लगी नाली के क्षतिग्रस्त और खुली होने पर दुर्गंध की वजह से न्यायालयीन कर्मचारियों, अधिवक्ताओं को कामकाज में परेशानी होने संबंधी पेश किए गए परिवाद पर सुनवाई करते हुए स्थाई लोक अदालत ने नगर निगम आयुक्त को नाली निर्माण के लिए 90 दिन का अल्टीमेटम देते हुए निर्माण शुरू होने तक 15 दिन के भीतर नाली को ढकने का आदेश जारी किया है। स्थाई लोक अदालत की पीठासीन अधिकारी श्रीमती उर्मिला गुप्ता, सदस्य संतोष कुमार शर्मा ने फैसले में यह भी लिखा है कि इस आदेश के 15 दिन के भीतर परिपालन शुरू नही होता है 50 हजार रुपए जुर्माना जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करना होगा। आदेश के तहत 90 दिन में नाली निर्माण नही होने पर एक लाख रुपए जुर्माना,  इसके बाद प्रति तीन तीन माह के अंतराल में एक एक लाख रुपए जुर्माना जमा करना होगा।  इस तरह के मामले में पहली बार न्यायालय से ऐसा फैसला आया है। न्यायालयीन सूत्रों के मुताबिक अधिवक्ता धनंजय मिश्रा के द्वारा स्थाई लोक अदालत में परिवाद प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया गया था कि नगर निगम आयुक्त की लापरवाही और गांधीचौक स्थित होटल से नाली में बहकर आने वाले जूठन , खाद्य पदार्थों के अवशेषों के कारण निगम की खुली और क्षतिग्रस्त नाली में गंदगी बजबजा रही है, हवा के झोंके से दुर्गंध समूचे न्यायालय परिसर में फैल रहा है, इसकी वजह से न्यायालयीन कर्मचारियों और अधिवक्ताओं को कामकाज में परेशानी हो रही है। इस आरोप पर नगर निगम आयुक्त ने जवाब प्रस्तुत करते हुए दावा किया था कि निगम द्वारा नाली की नियमित सफाई करने के साथ दवा भी डाला जा रहा है, समय समय पर होटल संचालकों को नाली में गंदगी न बहाने नोटिस जारी किया जाता है। वर्तमान समय में 47.50 लाख रुपए की लागत से नाली निर्माण होने की जानकारी भी देते हुए सेवा में कमी नहीं करने का दावा किया था। इधर होटल संचालकों ने भी नाली में गंदगी न बहाते हुए निगम की स्वच्छता वाहन और सुअर फॉर्म में बेचने का दावा किया था, मगर इन दावों के विपरित नाली की स्थिति होने पर विद्वान न्यायाधीश द्वारा उक्त फैसला दिया गया।

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