सूरजपुर। (भूपेंद्र राजवाड़े)। जंगली हाथियों की लगातार हो रही मौत के बावजूद वन विभाग की लापरवाही दूर होने का नाम नहीं ले रही है। इस बार ग्रामीणों की सूचना के बाद भी पशु चिकित्सक के नही आने से एक बीमार भालू की मौत हो गई। यह घटना चांदनी बिहारपुर क्षेत्र के ग्राम उमझर से लगे बस्ती में हुई। ग्रामीणों का कहना है कि उनके द्वारा जब वन कर्मियों के माध्यम से पशु चिकित्सकों को जानकारी दी गई तब भालू जिंदा था, इस सूचना के 12 घंटे बीतने के बाद भी बीमार भालू के उपचार के लिए कोई नही पहुंचा जिससे अंततः उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों ने कहा कि यदि समय रहते भालू को उपचार मिलता तो शायद उसकी जान बच जाती। उमझर के ग्रामीणों के मुताबिक उक्त भालू पिछले तीन तीन से बस्ती में घुस रहा था , जिससे लोगों में भालू के हमले का भय बना हुआ था। ग्रामीणों द्वारा वन विभाग को सूचना दी गई, मौके पर विभाग का अमला गांव में पहुंचा और अनुमान लगाया गया था कि संभवतः भालू बीमार है। मगर विभाग के अधिकारी समय रहते भालू का इलाज नहीं करा पाए। भालू की मौत होने के बाद पंचनामा पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद शव का अंतिम संस्कार किया गया। रेंजर ललित साय पैकरा ने बताया कि गांव में भालू के होने पर निगरानी व सुरक्षा के लिए वन अमले को भेजा गया था, पशु चिकित्सक को भी सूचना दी गई थी, उन्होंने बताया कि मृत भालू के शव का अंतिम संस्कार करा दिया गया है।
केवल नाम का राष्ट्रीय उद्यान
सूरजपुर जिला का गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान केवल नाम का उद्यान बन कर रह गया है। वन्य प्राणियों की सुरक्षा व प्रबंधन के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाने के बाद भी जानवरों की लगातार मौतें हो रही हैं। विभाग का मैदानी अमला न जंगल की सुरक्षा कर पा रहा है और न ही वन्य प्राणियों की। यही कारण है कि जंगल कटने से जानवर इंसानों के रहवास बस्तियों में घुस रहे हैं, वहीं बीमार वन्य प्राणियों के इलाज के प्रति बरती जा रही लापरवाही से भी मौतें हो रही हैं।



