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सूरजपुर जिले में सात साल में 41 हाथियों की गई जान ... वन विभाग ने पैसा बहाया... पर नही बचा पाया प्राण,... ध्वस्त सूचना तंत्र और लापरवाह मैदानी अमले से शिकारी हुए बेलगाम ... इस बार हाथी की हत्या कर जल्लादों ने 16 से अधिक टुकड़े किए... करंट से किया काम तमाम ....

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 सूरजपुर। (भूपेंद्र राजवाड़े)। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर वन मंडल में पिछले सात सालों में 41 जंगली हाथियों की मौतें हुई हैं, मगर वन विभाग का अमला वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए जागरूकता और गज प्रबंधन के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाने के बाद भी हाथियों की मौत नही रोक पा रहा है। आला अधिकारियों के ध्वस्त सूचना तंत्र और मैदानी अमले के अकर्मण्यता के कारण सूरजपुर वन क्षेत्र में जंगली जानवरों के शिकारी सक्रिय हो गए हैं, आए दिन मृत जानवरों के अंगों, खाल की तस्करी हो रही है। इस बार जिले के रमकोला वन परिक्षेत्र में न सिर्फ करंट से एक हथिनी की हत्या की गई बल्कि बर्बरता की सारी हदें पार करते हुए हाथी के शव को सूंड, पैर सहित अन्य अंगों के 16 टुकड़े करते हुए दफना दिया गया। जंगल में इतनी बड़ी घटना हुई मगर आश्चर्यजनक ढंग से वन अमले को इसकी भनक तक नहीं लग पाई। बताया जा रहा है कि करीब एक माह पहले यह घटना हुई। मुखबिर की सूचना पर विभाग हरकत में आया, और संदेहियो के निशानदेही पर अलग अलग गढ्ढों से मृत हाथी के अंगों, कंकाल को बरामद करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

यह आरोपी हुए गिरफ्तार

नरेंद्र सिंह पिता रामशरण गोंड  वर्ष, रामचंद्र पिता स्व. शिवलाल अगरिया, जनकू राम पिता स्व. ननकु राम, माधव अगरिया पिता राय सिंह वन विभाग की टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। घटना स्थल पर वाइल्ड लाइफ सीएफ केआर बढ़ाई, डीएफओ पंकज कमल, उप वन मंडल अधिकारी आशुतोष भगत, उप संचालक हाथी रिजर्व निवास तंतेरी आदि मौजूद रहे। 

करंट से सर्वाधिक मौतें

सूरजपुर जिले में अब तक हाथियों की हुए मौत के मामले में इस बात का विभाग खुलासा कर चुका है कि अधिकांश मौतें करंट से हुई। इस मामले में विद्युत विभाग का मैदानी अमला भी जिम्मेदार है। वन क्षेत्र के लुंजपुंज नीचे तक झूलते तार के कारण कई हाथी करंट की चपेट में आकर काल के गाल में समाए। वहीं हाथियों द्वारा लगातार जान और माल को नुकसान को पहुंचाए जाने से हाथी मानव द्वंद की स्थिति भी निर्मित हो रही है, इसे भी हाथियों की मौत के लिए बड़ा कारण माना जा रहा है।

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