सूरजपुर। भूपेंद्र राजवाड़े। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिला में फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर सहायक शिक्षक बनी कांग्रेस नेता और बंग समाज के पूर्व अध्यक्ष दिलीप धर की पत्नी संचिता रानी मंडल को शिकायत की जांच और गड़बड़ी की पुष्टि होने पर डीईओ के द्वारा तत्काल प्रभाव से बर्खास्त ( शासकीय सेवा से पृथक ) करने की कार्यवाही की है। सूरजपुर जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा इस संबंध में 1 मार्च को आदेश जारी किया गया। संचिता रानी मंडल वर्तमान समय में शासकीय प्राथमिक शाला सोनवाही उपकापारा विकास खंड सूरजपुर में प्रधान पाठक के पद पर पदस्थ थी। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश में उल्लेख किया गया है कि टी-संवर्ग, संचिता रानी मण्डल, प्रधान पाठक, शासकीय प्राथमिक शाला सोनवाही उपकापारा, विकासखण्ड सूरजपुर, कार्यालय कलेक्टर आदिम जाति कल्याण विभाग अम्बिकापुर जिला सरगुजा का आदेश क्रमांक /698/शिक्षा-स्था./आ.ज.क./94 अम्बिकापुर दिनांक 17 मार्च 1994 के सरल क्रमांक-3 द्वारा संचिता रानी मण्डल की , सहायक शिक्षक (अलिपिकीय तृतीय श्रेणी) के पद पर प्रथम नियुक्ति अनुसूचित जाति प्रवर्ग के लिए आरक्षित रिक्त पद के विरूद्ध उनके द्वारा प्रस्तुत "चमार" जाति के प्रमाण पत्र के आधार पर हुई थी। वर्तमान में प्रधान पाठक के पद पर शासकीय प्राथमिक शाला सोनवाही उपकापारा, विकासखण्ड सूरजपुर जिला सूरजपुर (छ०ग०) में पदस्थ हैं।
ऐसे सामने आया मामला
जारी आदेश में उल्लेख है कि संचिता रानी मण्डल के द्वारा फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर शासकीय नौकरी प्राप्त करने की शिकायत की जाँच जिला स्तरीय जाति सत्यापन समिति जिला सूरजपुर छ.ग. के द्वारा पत्र क्रमांक /1525/जाति सत्या./आ.वि./18-19 सूरजपुर दिनांक 11.10.2018 के द्वारा की गई, जिसमें श्रीमती मण्डल के द्वारा जाति सत्यापन हेतु साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया और न ही उपस्थित हुई। तदोपरान्त कार्यालय आयुक्त सरगुजा संभाग, अम्बिकापुर के निर्देशन में कलेक्टर जिला सूरजपुर के आदेश क्रमांक /3508/शिकायत / जनदर्शन /2017-18 सूरजपुर दिनांक 18. जुलाई 2017 के द्वारा तहसीलदार सूरजपुर को जाति प्रमाण पत्र सत्यापन दायरा पंजी में करते हुए स्पष्ट अभिमत हेतु निर्देशित किया गया।
जांच में आरोप की हुई पुष्टि
तहसीलदार सूरजपुर के द्वारा उनके "दायरा पंजी वर्ष 1990-91 एवं वर्ष 1991-92 का अवलोकन किया गया। जिसके अनुसार दिनांक 10.06.1992 को संचिता रानी मण्डल पुत्री मनिन्द्रनाथ मंडल जाति चमार की निवास स्थान सूरजपुर के नाम से जारी जाति प्रमाण पत्र दायरा पंजी में दर्ज होना नहीं पाया गया। तथा उक्त दिनांक को किसी भी व्यक्ति का कोई भी प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में उक्त जाति प्रमाण पत्र वैद्य नहीं है।" तद्नुसार श्रीमती संचिता रानी मण्डल की जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया।
कलेक्टर ने दिए थे कार्यवाई के निर्देश जाति प्रमाणपत्र के फर्जी होने की पुष्टि होने पर कलेक्टर सूरजपुर के द्वारा श्रीमती मण्डल के द्वारा फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने के कारण कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया । जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा संचिता रानी मण्डल को अपना पक्ष, जवाब हेतु अवसर दिया गया। जिसका जबाव 27 सितंबर 2023 को दिया गया। जो समाधान कारक नहीं पाया गया। पुनः जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा संचिता रानी मण्डल को दस्तावेजी साक्ष्य सहित अपना पक्ष रखने हेतु अंतिम अवसर दिया गया, मगर दिनांक 28 फरवरी 2024 को श्रीमती मण्डल के द्वारा अधोहस्ताक्षरकर्ता के समक्ष उपस्थित होकर अपने बचाव पक्ष में कोई भी ठोस दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। दोनों अवसर में कोई भी संतोषप्रद प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।
शासन के इस आदेश के तहत हुई कार्यवाई
डीईओ द्वारा आदेश में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ शासन, समान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय के परिपत्र क्रमांक एफ 13-1/2008/ 1-3 दिनांक 24.07.2008 के अनुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के झूठे (फर्जी / गलत) प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति प्राप्त करने वाले शासकीय सेवको का तत्काल सेवाएं समाप्त किए जाने के निर्देश दिये है, इनके लिए विभागीय जाँच अथवा किसी अन्य जाँच की आवश्यकता नहीं है। अतः श्रीमती मण्डल को शासकीय सेवा से पृथक (Dismissed) किए जाने का निर्णय लिया गया है। जिससे डीईओ द्वारा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-12 में प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, उक्त नियमों के नियम-10 (आठ) के अन्तर्गत् श्रीमती संचिता रानी मण्डल, प्रधान पाठक, शासकीय प्राथमिक शाला सोनवाही उपकापारा, विकासखण्ड सूरजपुर जिला सूरजपुर को तत्काल प्रभाव से शासकीय सेवा से पृथक करने की कार्यवाही की गई।
मामला पुराना, किया गया निराकरण
सूरजपुर जिला शिक्षा अधिकारी रामलाल पटेल ने बताया कि यह प्रकरण काफी पुराना है। शिकायत की जांच में जाति प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया था। कार्यवाई के पूर्व संबंधित कर्मचारी को अपना पक्ष रखने के लिए विधिवत अवसर दिया गया था, मगर किसी भी प्रकार का संतोष जनक जवाब नहीं मिला। जिससे ऐसे मामलों में शासन द्वारा दिए गए निर्देश के तहत 1 मार्च को प्रकरण का निराकरण करते हुए संचिता रानी मंडल को सेवा से बर्खास्त किया गया।



