अंबिकापुर। जिला खाद्य अधिकारी सरगुजा रविंद्र सोनी ने राईस मिलर संचालको द्वारा लगाए गए अवैध वसूली सहित अन्य आरोपों का खंडन करते हुए सभी आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताते हुए बिंदुवार बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि सम्बधित मिलर्स पर नियमानुसार कार्यवाही किये जाने के कारण असत्य एवं निराधार आरोप लगाकर अवैध कार्य करने का दबाव बनाया जा रहा है। बयान में अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों का उन्होंने क्रमवार निम्नलिखित जवाब दिया है-
* उन पर आरोप लगाया गया है कि 30 रु. प्रति क्विंटल के हिसाब से घूस देने वाले राईस मिलर का ही एग्रीमेंट किया जाता है। तत्संबंध में वस्तुस्थिति यह है कि खरीफ वर्ष 2023-24 में 61 राईस मिलो का पंजीयन किया गया है तथा जयशंकर द्वारा संचालित मिल का पंजीयन नहीं किया गया है। पंजीयन नहीं किये जाने का कारण स्पष्ट है कि छ०ग० शासन खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग का पत्र कमांक F4-9/2023/29-1/part-1 नवा रायपुर दिनांक 28/11/2023 की कंडिका 3 में स्पष्ट उल्लेख है कि जिन मिलरो द्वारा कस्टम मिलिंग अंतर्गत उठाया गया धान का 70 प्रतिशत तक चावल जमा कर दिया गया है उनका पंजीयन की कार्यवाही की जाये जयशंकर साहू द्वारा खरीफ वर्ष 2022-23 में उठाव किये गये धान 29390 क्विं. का आनुपातिक चावल 19883 क्विं. के विरूद्ध चावल जमा नहीं किया गया। फलस्वरूप शासन के निर्देश के परिपालन में जयशंकर द्वारा संचालित मिल का पंजीयन नहीं किया गया है।
* राईस मिलरों से वसूली के संबंध में राईस मिल एसोसिएशन सरगुजा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति की कार्यालय को प्राप्त प्रतिलिपि अनुसार उपरोक्त समस्त आरोपो का खण्डन करते हुए स्पष्ट किया है कि सरगुजा जिले के किसी भी मिलर से तथा कथित किसी भी प्रकार की राशि वसूली नहीं की गई है। नियमानुसार राईस मिलो का पंजीयन विगत वर्ष में होते आया है।
* दरिमा रोड़ स्थिति राईस मिल संचालक सतीश अग्रवाल के माध्यम से वसूली का आरोप पूर्णतः असत्य व निराधार है। क्योकि सतीश अग्रवाल द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अवगत कराया गया है कि किसी भी प्रकार की राशि उनके द्वारा वसूली नहीं की गई है।
* 2019 से लेकर 2024 तक कई शिकायते खाद्य अधिकारी के विरूद्ध कोई है परन्तु अब तक कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है। तत्संबंध में वस्तुस्थिति यह है कि खाद्य अधिकारी सरगुजा के विरूद्ध इससे पहले कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुआ है।
* क्वालिटी चेक के नाम पर वसूली के संबंध में वस्तुस्थिति यह है कि क्वालिटी चेक का कार्य नागरिक आपूर्ति निगम के क्वालिटी निरीक्षकों द्वारा किया जाता है ना कि खाद्य अधिकारी द्वारा अतः यह तथ्य पूर्णतः भ्रामक व निराधार है। मिलिंग का पैसा निकलवाने के लिये मांगी जा रही है रिश्वत के संबंध में वस्तुस्थिति यह है कि मिल के बिलिंग व मुगतान का कार्य मार्कफेड द्वारा किया जाता है ना कि खाद्य अधिकारी द्वारा। जबकि स्थिति तो यह है कि श्री जयशंकर साहू को मार्कफेड द्वारा बार-बार बिल प्रस्तुत करने हेतु पत्र प्रेषित किया जा रहा है। परन्तु मिलर द्वारा पेनाल्टी के भय से बिल ही प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है, तो बिल के नाम पर वसूली पूर्णतः असत्य है।
* श्याम एग्रो के संबंध में वस्तुस्थिति यह है कि संचालक द्वारा वर्ष 2021-22 में 184428 क्विं. घान उठाव किया गया था। परन्तु निर्धारित अवधि में चावल जमा नहीं किये जाने के कारण बैंक गारंटी से 3.37 करोड़ की राशि राजसात की गई, तथा वर्ष 2022-23 मे 29390 क्विं. धान उठाव के विरूद्ध चावल जमा नहीं कराये जाने के कारण 5.40 करोड़ राशि मिलर के बैंक गारंटी से राजसात किया गया, तथा आज कि स्थिति में 1.48 करोड की राशि शासन के पक्ष में मिलर को जमा कराया जाना है। परन्तु बार-बार मांग पत्र भेजे जाने के बाद भी मिलर द्वारा शासन के पक्ष में देय 1.48 करोड़ की राशि जमा कराने में रूची नहीं ली जा रही है। मिलर का उक्त कृत्य छ०ग० कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन आदेश 2016 की कंडिका 4(3),5(1) एवं 12 का स्पष्ट उल्लंघन है, जो कि आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3(7) के तहत् दंडनीय है।



