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मालेगांव विस्फोट में भगवा आतंकवाद की फर्जी कहानी बनाने का था दबाव ... मनगढ़ंत कहानी बना भागवत को गिरफ्तार नहीं किया तो मेरा कैरियर कर दिया गया चौपट - पूर्व एटीएस इंस्पेक्टर महबूब मुजावर ने किया दावा (जांच टीम का थे हिस्सा)

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मुंबई। खबरी गुल्लक।। 2 अगस्त 2025।।।

सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर महबूब मुजावर ने कहा कि मालेगांव धमाका मामले में भगवा आतंकवाद कुछ नहीं था, बल्कि एटीएस पर फर्जी कहानी बनाने का दबाव था। भागवत को गिरफ्तार करने की साजिश के पीछे मकसद भी था भगवा आतंकवाद  करना। जो तथ्य से कोसो दूर था। जिसका पालन न किया जा सके, ऐसे आदेश दिए गए थे।  मुजावर ने कहा कि आरोपियों को बरी कर एनआईए कोर्ट ने एटीएस के फर्जीवाड़े को नकार दिया है। बता दें कि शुरुआत में इस मामले की जांच आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने की थी।

मालेगांव विस्फोट मामले की जांच करने वाले महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) का हिस्सा रहे पूर्व एटीएस इंस्पेक्टर ने दावा किया कि आला अफसरों के दबाव के बावजूद उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार नहीं किया, तो मेरा कॅरिअर बिगाड़ दिया। मुझे फर्जी मामले में गिरफ्तार कराया गया।

विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक मुजावर ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का नाम लेते हुए कहा कि विशेष अदालत के फैसले ने फर्जी अधिकारी द्वारा की गई फर्जी जांच को उजागर कर दिया है। जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। उन्होंने कहा कि  मैं यह नहीं कह सकता कि एटीएस ने उस समय क्या जांच की। लेकिन मुझे राम काल सांगरा, संदीप डांगे और दिलीप पाटीदार के अलावा आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के लिए आदेश दिए गए थे। ये सभी आदेश ऐसे थे जिसका पालन नहीं किया जा सके।लेकिन 2011 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जांच अपने हाथ में ले लिया था। मुजावर ने कहा कि वह मालेगांव बम धमाके की जांच में एटीएस का हिस्सा थे, जिसमें 6 लोग मारे गए थे और 101 लोग घायल हुए थे। 

यह है घटना का संक्षिप्त विवरण

क़रीब 17 साल पहले मालेगांव में हुए बम धमाकों में छह लोगों की मौत हुई थी और 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे। बीजेपी नेता साध्वी प्रज्ञा और लेफ़्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित इस मामले में सबसे चर्चित अभियुक्त रहे. साध्वी प्रज्ञा भोपाल से बीजेपी की सांसद रह चुकी हैं। 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में एक मस्जिद के पास खड़ी मोटरसाइकिलों में रखे विस्फोटकों में धमाका हुआइस मामले में लेफ़्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, बीजेपी नेता प्रज्ञा ठाकुर, मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त), अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी के ख़िलाफ़ ग़ैर क़ानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत मामला दर्ज किया गया था। शुरुआत में इस मामले की जाँच महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) कर रहा था, लेकिन 2011 में इसकी जाँच की ज़िम्मेदारी राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी गई थी।  था.इस मामले अदालत ने साध्वी प्रज्ञा समेत सभी अभियुक्त  बरी कर दिया है। 






मुजावर ने कहा कि उन्होंने आला अफसरों के इस आदेश का पालन नहीं किया क्योंकि उन्हें हकीकत पता थी। मोहन भागवत जैसी हस्तियों को पकड़ना मेरी क्षमता से परे था। मैंने जब आदेश का पालन नहीं किया, तो मेरा 40 साल के कॅरिअर को बर्बाद कर दिया गया। फर्जी मामले में मुझे जेल भेजा गया, लेकिन कारण में निर्दोष साबित हुआ। बाद में, एनआईए की जांच में भी मुझे क्लीनचिट मिली। उन्होंने कहा कि मेरे इस दावे के दस्तावेजी सबूत हैं कि कोई भगवा आतंकवाद नहीं था। सब कुछ फर्जी था।

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