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| हाथियों के भय से घर से बाहर भागे लोगों की भीड़ |
अंबिकापुर। खबरी गुल्लक।।
छत्तीसगढ़ का संभाग मुख्यालय अंबिकापुर 25 सदस्यीय जंगली हाथियों के दस्तक से कांप उठा है। सोमवार को देर शाम जंगल की शांति को चीरते हुए जंगली हाथियों का विशाल दल शहर के बाहरी इलाकों में पहुंचा और देखते ही देखते पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। महामाया पहाड़ स्थित ओरियंटल पब्लिक स्कूल के समीप इन हाथियों का दल डटा हुआ है, जिससे आसपास के मोहल्लों में रहने वाले नागरिकों में भय का माहौल है। स्थानीय लोगों ने बताया कि हाथियों के झुंड के शहर की ओर आने की सूचना रात करीब साढ़े आठ बजे मिली । पहले तो लोगों ने इसे अफवाह समझा, लेकिन थोड़ी ही देर बाद चिंघाड़ की आवाज से इसकी पुष्टि हुई। भय के कारण कई परिवार दूरस्थ इलाकों की ओर रवाना हुए। कुछ लोगों ने अपने रिश्तेदारों या परिचितों के घर शरण ली। रात के अंधेरे में ऐसा डर लगा मानो कोई भूचाल आ गया हो। चारों तरफ भगदड़ मची रही। विदित हो कि इसके पूर्व भी हाथी अंबिकापुर में प्रवेश कर उत्पात मचा चुके हैं। हाथियों को आबादी वाले इलाके से दूर खदेड़ने के लिए वन विभाग की टीम ने पसीना बहाया। डीएफओ के निर्देश पर विशेष हांका दल जिसमें प्रशिक्षित वनकर्मियों और स्थानीय ग्रामीणों को शामिल किया गया है यह टीम भी हाथियों को खदेड़ने मशक्कत करती रही। पटाखे भी फोड़े गए।
नागरिकों कर रहे सतर्क
पुलिस और जिला प्रशासन के द्वारा नागरिकों को सतर्क रहने की अपील की जा रही है कृपया घरों से बाहर न निकलें, अनावश्यक रूप से मोबाइल फ्लैशलाइट या टॉर्च का उपयोग न करें। हाथियों के पास जाने या उन्हें भगाने की कोशिश न करें। इसके अलावा, वन विभाग द्वारा लगातार हाथियों की गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। महामाया पहाड़, जरहागढ़ और खैरबार मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई गई है। गश्ती वाहन बार-बार इलाके का निरीक्षण कर लोगों को सतर्क कर रहे हैं। हाथियों के झुंड की मौजूदगी का असर अब सामान्य जनजीवन पर भी दिखने लगा है। स्थानीय व्यापारियों ने भी अपनी दुकानों को जल्दी बंद कर दिया। महामाया रोड, खैरबार रोड और नवागढ़, श्रीगढ़ में शाम होते ही वीरानी छा गई ।
बढ़ रहा हाथी मानव संघर्ष
सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर और कोरिया जिलों में पिछले कुछ वर्षों से मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएँ तेजी से बढ़ी हैं। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ पिछले दो वर्षों में सरगुजा संभाग में हाथियों द्वारा की गई घटनाओं में कई लोगों की मौत और दर्जनों घरों को नुकसान हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जंगलों में हाथियों के लिए पर्याप्त चारा और जल नहीं रहेगा, तो ऐसी घटनाएँ और बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हाथियों के प्राकृतिक गलियारों पर मानवीय अतिक्रमण रोकना सबसे ज़रूरी है। जब उनके आवागमन के मार्ग में गाँव या फार्म हाउस बनते हैं, तो टकराव स्वाभाविक है।
उठाए जा रहे हैं जरूरी कदम
वन विभाग ने विशेष ड्रोन सर्वे का निर्णय लिया है, ताकि हाथियों की सटीक लोकेशन और उनके मूवमेंट की दिशा पर समय-समय पर नजर रखी जा सके। इसके अलावा, आसपास के गाँवों में रात्रि चौकीदार दल बनाए जा रहे हैं, जो किसी भी हरकत की सूचना तुरंत कंट्रोल रूम को देंगे।
देखते ही देखते पसर गया सन्नाटा
अंबिकापुर की रातें फिलहाल भय और अनिश्चितता से घिरी हैं, लेकिन वन विभाग को उम्मीद है कि दो-तीन दिनों के भीतर हाथियों का झुंड जंगल की गहराई की ओर लौट जाएगा। इस बीच, नागरिक प्रार्थना कर रहे हैं कि किसी प्रकार की अनहोनी न हो। बिजली के खंभों पर बंधी लाइटें बुझी हुई हैं, गलियाँ सूनी हैं, और दूर कहीं पहाड़ की तलहटी में खड़े विशाल शरीर वाले हाथियों की परछाइयाँ मंद-मंद हिल रही हैं मानो पूरी रात शहर को परख रही हों कि कौन पहले थकेगा इंसान या वन्य जीवन का यह निडर दल।



