अंबिकापुर। खबरी गुल्लक।।
छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार नवीन शासकीय महाविद्यालय धौरपुर में जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत, ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ग्राम पंचायत धौरपुर के सरपंच वकील राम कुजूर थे। विशिष्ट अतिथि भूतपूर्व सरपंच जमीरा दशरथ राम एवं मुख्य वक्ता प्रदेश अध्यक्ष जनजाति गौरव युवा समाज के इंदर भगत रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जुगल किशोर कुजूर ने की। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की वंदना, दीप प्रज्वलन तथा जनजातीय समाज के वीर सेनानियों की प्रतिमा पूजन के साथ संपन्न हुई। इसके पश्चात छात्राओं शबनम मिंज, अमीषा, वर्षा, किरण शांडिल्य एवं साथियों ने सरस्वती वंदना, राज्य गीत और स्वागत गीत की प्रस्तुति दी, जिसे उपस्थित जनों ने सराहा।
स्वागत भाषण में प्राचार्य डॉ. जेके कुजूर ने जनजातीय समाज के ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन समुदायों ने सदैव भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्य वक्ता इंदर भगत ने भगवान बिरसा मुंडा के जीवन और उनके योगदान पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने अंग्रेजी शासन की शोषणकारी नीतियों के खिलाफ उलगुलान आंदोलन चलाया और जनजातीय समाज के जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया। वे केवल सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के पुरोधा नहीं थे, बल्कि उन्होंने बिरसाइत धर्म की स्थापना कर आध्यात्मिक चेतना के प्रसार में भी अग्रणी भूमिका निभाई, इसी कारण उन्हें भगवान का दर्जा प्राप्त हुआ।
मुख्य अतिथि वकील राम कुजूर ने अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज ने हमेशा त्याग, समर्पण और बलिदान का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि आज भी जनजातीय समुदाय अपनी पारंपरिक संस्कृति और प्रकृति-आधारित जीवन मूल्यों को संजोए हुए है। जनजातीय पर्व और त्यौहार प्रकृति से गहराई से जुड़े हुए हैं, जिससे उनका पर्यावरण के प्रति सम्मान झलकता है। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. जुनस एक्का ने मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों को जनजातीय गमछा भेंट कर सम्मानित किया। सफल संचालन समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष एवं सहसंयोजक प्रो. संजय कुमार ने किया। कार्यक्रम में सहायक ग्रेड-3 सुग्रेशन सिंह, प्रयोगशाला तकनीशियन सूर्यकांत मानिकपुरी, अतिथि प्राध्यापक श्रीमती ऐश्वर्या डबराल, डॉ. पूजा गुप्ता, मिथुन समददार, दिलसाय, विनोद खलखो, डॉ. सिंधु खाखा, सुश्री गरिमा लकड़ा, इंदुकांत, सुश्री रेखा सिंह सहित महाविद्यालय के समस्त छात्र-छात्राओं की उपस्थिति और योगदान सराहनीय रहा।





