सरगुजा, सूरजपुर में भूपेश के प्रवास के दौरान कांग्रेस की गुटबाजी दिखी चरम पर ... पैलेस खेमा ने बनाई दूरी, समर्थकों ने माला पहना नारे लगाए सड़क पर

सरगुजा, सूरजपुर में भूपेश के प्रवास के दौरान कांग्रेस की गुटबाजी दिखी चरम पर ... पैलेस खेमा ने बनाई दूरी, समर्थकों ने माला पहना नारे लगाए सड़क पर

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अंबिकापुर/सूरजपुर।। खबरी गुल्लक।। 30 दिसंबर 2025

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में भूपेश बघेल vs पैलेस गुट की जंग एक बार फिर सूरजपुर के रंगमंच पर उतर आई। पूर्व सीएम भूपेश बघेल के सरगुजा-सूरजपुर दौरे पर कांग्रेस का एक खेमा जोर-शोर से स्वागत करता नजर आया, तो दूसरा पैलेस गुट (जय-बीरू ब्रिगेड) नामोनिशान गायब! कार्यकर्ताओं के बीच खुली दूरी, एक-दूसरे पर तीखे तंज—यह 'शक्ति प्रदर्शन' कम, गुटबाजी का काला अध्याय ज्यादा साबित हुआ। राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोरों पर है: क्या यह कांग्रेस की एकता का ढोंग है या आगामी विधानसभा चुनाव से पहले खुला फूट?

सम्मेलन के बाद दोनों खेमा देते रहे दलील

जिला कांग्रेस कमेटी के नए अध्यक्ष शशि सिंह के पहले कार्यकर्ता सम्मेलन में भूपेश बघेल की एंट्री ने तो सियासी ड्रामा को चरम पर पहुंचा दिया। जिले की सीमा से सेवाकुंज तक भूपेश खेमे के समर्थक बैनर लहराते, नारे लगाते स्वागत करते दिखे, लेकिन पैलेस गुट के चेहरे नदारद। हजारों कार्यकर्ता जुटे, लेकिन भीड़ के बीच गुटबाजी की खाई साफ नजर आई, जय और बीरू के समर्थक अलग- थलग, आपस में नजरें तक नहीं मिला रहे। सम्मेलन के बाद दोनों खेमों के नेता अपनी- अपनी दलीलें ठोंकते नजर आए हमारी एकता अटल है,  लेकिन सवाल वही क्या यह दिखावा टिकेगा।

भूपेश बघेल ने मंच से भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने 95 नई योजनाओं से नवा छत्तीसगढ़ गढ़ा, भाजपा सब बंद कर रही। अराजकता फैली है, रोजगार ठप, भर्तियां रुकीं, अधिकारी, कर्मचारी, महिलाएं, युवा, किसान, मजदूर सब सड़कों पर। स्कूल बंद हो रहे, गौठान खत्म, मनरेगा पर साजिश!  किसानों के धान खरीदी के चक्करों और निजीकरण पर केंद्र-राज्य सरकारों को ललकारा। कांग्रेस की विचारधारा को रेखांकित करते हुए कहा कि हम आजादी से लड़ रहे हैं, अत्याचार के खिलाफ खड़े हैं। लेकिन असली सवाल यही है भूपेश का यह दौरा कांग्रेस को एकजुट करेगा या गुटबाजी को हवा देगा।  पूर्व मंत्री स्व. तुलेश्वर सिंह को याद कर मंच से आह्वान किया कि शशि सिंह को सहयोग दें, संगठन मजबूत करें। राजनीतिक पंडितों का मानना है, पैलेस गुट की अनुपस्थिति चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकती है। अंबिकापुर और सूरजपुर की यह घटना छत्तीसगढ़ कांग्रेस के भविष्य की घंटी बजा रही है!



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