अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक।। 6 जनवरी 2026।।
छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा शासकीय अधिकारी कर्मचारियों की आदत में सुधार और काम काज में कसावट लाने के लिए शुरू किए गए कार्यस्थल में ई अटेंडेंस प्रणाली का फायदा चंद दिनों में ही नजर आने लगा है, वहीं उपस्थिति के लिए सुबह शाम निर्धारित समय पर ई अटेंडेंस करने की बाध्यता का कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग द्वारा विरोध शुरू कर दिया गया है। स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग सहित अन्य विभाग के कर्मचारियों का भी कहना है कि सरकार यदि ई अटेंडेंस चाहती है तो कर्मचारियों को इसके लिए सरकारी मोबाइल उपलब्ध कराए। क्योंकि निजी मोबाइल पर फोन पे सहित अन्य गोपनीय जानकारी संग्रहित होती है। मौजूदा समय में साइबर ठगी की घटनाएं बढ़ी हैं। शासन कर्मचारियों के निजी मोबाइल पर ही कई तरह के एप डाउनलोड करवाकर कार्य सम्पादित कराया जा रहा है। ऐसी स्थिति में कर्मचारियों पर ऑनलाइन ठगी का खतरा बना रहता है। वहीं ऑनलाइन उपस्थिति को मैदानी कर्मचारियों ने अव्यवहारिक बताते हुए इसे केवल कार्यालयीन कर्मचारियों के लिए कारगर बताया है। मैदानी कर्मचारियों का कहना है कि ड्यूटी के दौरान उन्हें फील्ड में रहना पड़ता है। जिससे कई बार वे कार्यालय से 15 से 20 किमी की दूरी पर भी चले जाते हैं,यदि स्थिति में वे शाम के समय अथवा सुबह कैसे ई अटेंडेंस दे पाएंगे। निर्धारित समय पर कार्यालय में उपस्थित नहीं हो पाने पर उन्हें अनुपस्थित माना जाएगा,जबकि वे फील्ड में ड्यूटी कर रहे होंगे। 10 मिनट की देरी होने पर भी वे अनुपस्थित हो रहे हैं। दूर दराज के इलाको में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों ने भी कहा है कि हुई उपस्थिति प्रणाली से उन्हें व्यवहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने शासन से इस निर्णय पर पुनः विचार किए जाने की मांग की है।
प्रधान पाठक ने पूर्व में दिया था ज्ञापन
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के विकासखंड साजा के शासकीय प्राथमिक शाला केछवई के प्रधानपाठक कमलेश सिंह बिसेन ने जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंप शिक्षकों की निजी संपत्ति मोबाइल पर ऐप डाउनलोड करा विभागीय कार्य कराए जाने पर इसे निजता का उल्लंघन बताते हुए गंभीर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने अपने धन से निजी उपयोग के लिए मोबाइल फोन खरीदा है। इस मोबाइल में फोन पे सहित अन्य निजी जानकारी, तस्वीर होती है। शिक्षा विभाग के द्वारा शासन के आदेश पर आनलाइन कामकाज के लिए मोबाइल पर कई तरह का ऐप डाउनलोड कराया जा रहा है, जिससे सायबर ठगी और गोपनीयता भंग होने की संभावना बढ़ रही है। वे आज से अपने निजी मोबाइल पर विभाग द्वारा बताए गए ऐप में कामकाज नहीं करेंगे, यदि उन पर किसी भी तरह का दबाव बनाया गया तो वे उच्च न्यायालय जाने के लिए विवश होंगे। दर असल प्रधान पाठक ने मध्यप्रदेश में एक शिक्षक के आनलाइन ठगी का शिकार होने के बाद उक्त फैसला लिया। बताया जा रहा है कि mp के शिक्षक ने जब ठगी की शिकायत पुलिस से की तो पुलिस ने शिक्षा विभाग के उक्त ऐप को डिलीट करा दिया।
प्रधान पाठक कमलेश सिंह बिसेन ने बेमेतरा के जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में छत्तीसगढ़ विधा समीक्षा केन्द्र (VSK APP) द्वारा शिक्षक एवं छात्र उपस्थिती कराने के संबंध में गंभीर सवाल उठाया है। उन्होंने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि छ.गः शासन स्कूल जिला विभाग के पत्र क्र. GENS-211 846/2025 SCHOOL EDUCATION SECTION दिनांक 22/09/2023 के आदेशों के परिपालन में बेमेतरा जिला में कार्यरत शिक्षकों को छग विधा समीक्षा केन्द्र (YSK) मोबाइल APP को अपने मोबाइल में डाउनलोड कर, रजिस्ट्रेशन करने एवं प्रतिदिन शिक्षक एवं छात्र उपस्थिती हेतु उपयोग करने का कड़ा आदेश जारी किया गया है। उक्त मोबाइल APP के संबंध में प्रधानपाठक ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि उक्त मोबाइल APP हमारे निजी मोबाइल में उपयोग किया जाता है, जिसमें हमारी निजी गोपनीय जानकारी बैंक खाते की डिटेल, फोटो, विडियों आदि सुरक्षित रहती है। वर्तमान में साइबर फ्राड और निजता के उल्लंघन की खबर लगातार आती रहती हैं। इस कारण यदि इस APP के कारण मेरे साथ किसी प्रकार की साइबर फ्राड, ठगी या निजता का उल्लंघन हो जाता है तो जवाबदार कौन होगा ? मेरा मोबाइल मेरा निजी संपत्ति है, जिसे मैंने स्वयं के व्यय पर खरीदा है। इसके मासिक रिचार्ज का भुगतान में स्वयं के व्यय से करता हूँ। मेरी निजी संपत्ति का कैसे उपयोग करना है मैं इसके लिए पूर्ण स्वतंत्र व जवाबदार हूँ। शासन द्वारा मुझे वेतन, भत्तो के अलावा मोबाइल खरीदने, रिचार्ज कराने हेतु अलग से राशि नहीं दिया जाता। इस स्थिती में शासकीय कार्य हेतु मेरी निजी संपत्ति का उपयोग कराया जाना अनुचित है। सेवा नियमावली में भी इसका उल्लेख नहीं है। प्रधान पाठक ने कहा है कि उक्त मोबाइल APP के उपयोग के पूर्व से ही हमारी मोबाइल में अन्य शासकीय कार्य के APP जैसे PM POSHAN APP, निष्ठा APP, UDSSE, ekaSH, ONLINE छात्रवृत्ती, दीक्षा APP आदि डाउनलोड है और काम कर रहे हैं। उपरोक्त बिंदुओं पर समाधान कारक प्रत्युत्तर प्रदान करें। उचित समाधान न मिलने की स्थिती में वे मोबाइल APP का उपयोग करने में असमर्थता जताई गई है। प्रधानपाठक ने कहा है कि दबावपुर्वक APP का प्रयोग कराने की स्थिती में उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत करने को बाध्य होने जिसकी सम्पूर्ण जवाबदारी डीईओ एवं विभाग की होंगी।

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