मैनपाट।। खबरी गुल्लक ।। 13 जनवरी 2026।।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में 'शिमला' के नाम से प्रसिद्ध पर्यटन नगरी मैनपाट के ग्राम सपनादर में शासकीय वन भूमि पर हुए अवैध अतिक्रमण को हटाने का प्रयास मंगलवार को हंगामे में बदल गया। वन विभाग की टीम जेसीबी मशीनों के साथ कार्रवाई के लिए पहुंची, लेकिन कब्जाधारियों ने इसका जबरदस्त विरोध करते हुए मशीनों के सामने लेटकर रास्ता रोक लिया। इस घटना ने स्थानीय स्तर पर तनाव पैदा कर दिया है और अब मामला राजस्व व वन विभाग के बीच भूमि विवाद का बन गया है।
घटना दोपहर करीब 12 बजे की है, जब वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सपनादर पहुंचे। उनके पास जेसीबी मशीनें थीं, जो अवैध निर्माण और कब्जे को हटाने के लिए लाई गई थीं। लेकिन जैसे ही मशीनें आगे बढ़ीं, कब्जाधारी परिवारों ने चिल्लाते हुए विरोध शुरू कर दिया। मुख्य कब्जाधारी कतवारू यादव, रूपनारायण यादव और देवधारी यादव ने आरोप लगाया कि यह भूमि वर्ष 2003 में बालकों माइंस सर्वे के दौरान राजस्व कर्मियों द्वारा राजस्व भूमि घोषित की गई थी। उन्होंने दावा किया कि उनके पूर्वज करीब 50-60 वर्षों से इस भूमि पर काबिज हैं और यहां गौपालन करते आ रहे हैं। हमने कभी वन भूमि पर कब्जा नहीं किया, यह हमारी पीढ़ियों की संपत्ति है कतवारू यादव ने कहा।
कब्जाधारियों ने मांग की कि कार्रवाई से पहले राजस्व विभाग द्वारा पुनः सर्वे कराया जाए और स्पष्ट किया जाए कि भूमि वन विभाग की है या राजस्व की। उनका कहना था कि बिना सर्वे के बलपूर्वक बेदखली असंवैधानिक है। विरोध के दौरान ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई और नारेबाजी शुरू हो गई। स्थिति बिगड़ने पर वन विभाग को कार्रवाई स्थगित करनी पड़ी। पुलिस को भी मौके पर बुलाया गया, जिसने दोनों पक्षों को शांत कराया।
वहीं वन विभाग के अधिकारियों का रुख सख्त है। मैनपाट वन परिक्षेत्र अधिकारी ने बताया कि यह शासकीय वन भूमि है, जिस पर अवैध कब्जा हो गया था। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई की जा रही है। पुराने सर्वे के दावे गलत हैं, वन रिकॉर्ड में यह हमारी भूमि दर्ज है। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोबारा कार्रवाई होगी।
सरगुजा जिले में वन और राजस्व भूमि के बीच सीमांकन का पुराना मुद्दा है, जो बड़ा सवाल बन गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ऐसे कब्जे गरीब परिवारों की मजबूरी हैं, जबकि वन विभाग पर्यावरण संरक्षण का हवाला देता है। जिला प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है और मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
यादव समाज ने कहा वरना होगा आंदोलन
इस मामले में सर्व यादव समाज के जिला मीडिया प्रभारी महेश यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह बंजर भूमि गौठान के रूप में उपयोग हो रही है। यदि यह वन भूमि है तो कब्जाधारियों को वन पट्टा दिया जाए, अन्यथा राजस्व विभाग से नियमानुसार पट्टा की कार्रवाई हो। बलपूर्वक बेदखली की कोशिश की गई तो समाज उग्र आंदोलन करेगा। महेश यादव ने जिलाधिकारी और वन संचालक से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि न्याय नहीं मिला तो पूरे जिले में धरना-प्रदर्शन होंगे।
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